29 जुलाई 2026
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केशव प्रसाद मौर्य का वाराणसी से वैश्विक शांति का आह्वान: बुद्ध के करुणा संदेश की आज सर्वाधिक जरूरत

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केशव प्रसाद मौर्य का वाराणसी से वैश्विक शांति का आह्वान: बुद्ध के करुणा संदेश की आज सर्वाधिक जरूरत

सारांश

वाराणसी में आषाढ़ पूर्णिमा पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि हिंसा और संघर्ष से जूझती दुनिया को आज बुद्ध के करुणा और अहिंसा के संदेश की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। सारनाथ के यूनेस्को विश्व धरोहर दर्जे को उन्होंने समूची मानवता की साझा उपलब्धि बताया।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 29 जुलाई को वाराणसी में आषाढ़ पूर्णिमा कार्यक्रम को संबोधित किया।
सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने को संपूर्ण मानवता की साझा सांस्कृतिक उपलब्धि बताया।
बौद्ध तीर्थ स्थलों को सड़क, रेल और हवाई संपर्क से जोड़कर बौद्ध पर्यटन और स्थानीय रोज़गार को बढ़ावा देने की बात कही।
संत रविदास की 650वीं जयंती पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दीं।
काशी, सारनाथ, अयोध्या, मथुरा सहित प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों के समग्र विकास के प्रति उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 29 जुलाई को वाराणसी में कहा कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और अहिंसा के संदेश की आज के संघर्षग्रस्त विश्व में सबसे अधिक आवश्यकता है। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर तिब्बतन स्टडीज के सभागार में आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर नई पहचान दिला रहा है।

सारनाथ और यूनेस्को विश्व धरोहर

उपमुख्यमंत्री मौर्य ने सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का वैश्विक सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि सारनाथ — जहाँ भगवान बुद्ध ने अपनी प्रथम धम्मदेशना दी थी — केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि समूची मानवता के लिए शांति, सह-अस्तित्व और करुणा का केंद्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि केवल उत्तर प्रदेश या भारत तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव सभ्यता की साझा धरोहर का सम्मान है।

वैश्विक अनुभव और बुद्ध की प्रासंगिकता

मौर्य ने अपनी रूस यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ भगवान बुद्ध के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों की यात्राओं में उन्हें बुद्ध के प्रति विश्वव्यापी आस्था और भारत के प्रति सम्मान को निकट से देखने का अवसर मिला। उनके अनुसार, आज जब दुनिया हिंसा और संघर्ष की चुनौतियों से जूझ रही है, तब बुद्ध के कालजयी विचार ही स्थायी शांति और सद्भाव का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

अशोक की विरासत और डबल इंजन सरकार

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट अशोक ने भगवान बुद्ध के विचारों को विश्वभर तक पहुँचाने का ऐतिहासिक कार्य किया था। उन्होंने कहा कि आज केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन सरकार उसी विरासत को आगे बढ़ा रही है। बौद्ध धर्म से जुड़े प्रमुख तीर्थ स्थलों को सड़क, रेल और हवाई संपर्क से जोड़ने का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है, जिससे बौद्ध पर्यटन को नई गति मिलने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोज़गार को भी बढ़ावा मिल रहा है।

संत रविदास जयंती और सामाजिक संदेश

मौर्य ने अपने संबोधन में संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती का भी उल्लेख किया और प्रदेश व देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि संत रविदास का सामाजिक समरसता, समानता और मानव सेवा का संदेश आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

आध्यात्मिक स्थलों का समग्र विकास

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार काशी, सारनाथ, अयोध्या और मथुरा सहित सभी प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों के समग्र विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और धार्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। आषाढ़ पूर्णिमा के इस अवसर को उन्होंने मानव कल्याण और विश्व बंधुत्व के मूल्यों को आत्मसात करने का सुअवसर बताया। आने वाले समय में बौद्ध सर्किट के विकास से क्षेत्र की पर्यटन क्षमता और अधिक सुदृढ़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि बौद्ध सर्किट के बुनियादी ढाँचे में निवेश स्थानीय समुदायों — विशेषकर दलित और पिछड़े वर्गों — के लिए मापनीय रोज़गार में कितना तब्दील होता है। 'डबल इंजन' के दावे बार-बार सुनाई देते हैं, पर पर्यटन राजस्व और ज़मीनी रोज़गार के आँकड़ों की स्वतंत्र समीक्षा अभी भी अपेक्षित है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केशव प्रसाद मौर्य ने वाराणसी में क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 29 जुलाई को वाराणसी में आषाढ़ पूर्णिमा कार्यक्रम में कहा कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और अहिंसा के संदेश की आज के हिंसाग्रस्त विश्व में सर्वाधिक ज़रूरत है। उन्होंने सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर दर्जा मिलने को मानवता की साझा उपलब्धि बताया।
सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा क्यों महत्वपूर्ण है?
सारनाथ वह स्थल है जहाँ भगवान बुद्ध ने अपनी प्रथम धम्मदेशना दी थी, इसलिए यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सर्वोच्च तीर्थ है। यूनेस्को का दर्जा मिलने से इस स्थल को अंतरराष्ट्रीय संरक्षण और पहचान मिलती है, जिससे वैश्विक पर्यटन और सांस्कृतिक कूटनीति को बल मिलता है।
बौद्ध पर्यटन विकास से उत्तर प्रदेश को क्या लाभ होगा?
उपमुख्यमंत्री के अनुसार बौद्ध तीर्थ स्थलों को सड़क, रेल और हवाई संपर्क से जोड़ने से बौद्ध पर्यटन को नई गति मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था व रोज़गार को बढ़ावा मिलेगा। इससे विशेष रूप से वाराणसी और सारनाथ के आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि बढ़ने की संभावना है।
संत रविदास की 650वीं जयंती का इस कार्यक्रम में क्या उल्लेख हुआ?
मौर्य ने अपने संबोधन में संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती का उल्लेख करते हुए प्रदेश और देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि संत रविदास का सामाजिक समरसता, समानता और मानव सेवा का संदेश आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
उत्तर प्रदेश सरकार किन आध्यात्मिक स्थलों के विकास पर ध्यान दे रही है?
उपमुख्यमंत्री मौर्य ने काशी, सारनाथ, अयोध्या और मथुरा सहित सभी प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों के समग्र विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इन स्थलों पर सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और धार्मिक पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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