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सारनाथ यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल, PM मोदी और उपराष्ट्रपति ने बताया राष्ट्रीय गर्व का क्षण

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सारनाथ यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल, PM मोदी और उपराष्ट्रपति ने बताया राष्ट्रीय गर्व का क्षण

सारांश

सारनाथ — जहाँ भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था — अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची का हिस्सा है। PM मोदी और उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने इसे भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक स्तर पर सम्मान बताया। इस मान्यता से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

सारनाथ को 25 जुलाई 2025 को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'हर भारतीय के लिए गर्व का विषय' बताया; उपराष्ट्रपति सी.पी.
राधाकृष्णन ने इसे भारत की आध्यात्मिक विरासत का वैश्विक सम्मान कहा।
सारनाथ वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद 'धर्मचक्र प्रवर्तन' — अपना पहला उपदेश — दिया था।
यहाँ स्थित अशोक स्तंभ-शीर्ष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है, जो इस स्थल की राष्ट्रीय महत्ता को रेखांकित करता है।
इस मान्यता से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन , सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक बौद्ध स्थल सारनाथ अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची का हिस्सा बन गया है। 25 जुलाई 2025 को की गई इस आधिकारिक घोषणा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे पूरे देश के लिए गर्व का अवसर बताया। सारनाथ वह पवित्र भूमि है जहाँ भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश दिया था।

यूनेस्को की घोषणा और ऐतिहासिक महत्व

यूनेस्को ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सारनाथ को आधिकारिक रूप से विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने की पुष्टि की। सारनाथ बौद्ध धर्म के सर्वाधिक पवित्र स्थलों में गिना जाता है — यहीं 'धर्मचक्र प्रवर्तन' हुआ था, अर्थात भगवान बुद्ध ने अपने पाँच शिष्यों को पहली बार धर्म का उपदेश दिया था। यह स्थान सदियों से दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं और इतिहास-प्रेमियों के लिए आस्था एवं अध्ययन का केंद्र रहा है।

उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि 'सारनाथ का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना प्रत्येक भारतीय के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है।' उन्होंने कहा कि सारनाथ शांति, ज्ञान और करुणा का स्थायी प्रतीक है तथा भारत की कालातीत आध्यात्मिक और दार्शनिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। राधाकृष्णन के अनुसार, यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि भारत की प्राचीन सभ्यता और उसके आध्यात्मिक विचार आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घोषणा पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 'यह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।' उन्होंने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश स्थित सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध रहा है और उनके ज्ञान, करुणा तथा सद्भाव का कालजयी संदेश आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस मान्यता से दुनिया भर के अधिक लोग सारनाथ आएंगे और भगवान बुद्ध के आदर्शों से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।

सारनाथ का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परिचय

वाराणसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित सारनाथ में धमेख स्तूप, अशोक स्तंभ और अनेक प्राचीन मठ-विहारों के अवशेष हैं। यह स्थल न केवल बौद्ध धर्म बल्कि भारत की समग्र सांस्कृतिक स्मृति का अभिन्न अंग है। गौरतलब है कि सारनाथ में मिला अशोक स्तंभ-शीर्ष ही भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है, जो इस स्थान की राष्ट्रीय महत्ता को और गहरा बनाता है।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद सारनाथ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को नई गति मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था — विशेष रूप से छोटे व्यापारियों, गाइड और हस्तशिल्पकारों — को प्रत्यक्ष लाभ होगा। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े अवसंरचना प्रोजेक्ट चला रही है।

आगे की राह

विश्व धरोहर दर्जे के साथ भारत सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) पर सारनाथ के संरक्षण एवं प्रबंधन को यूनेस्को के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाए रखने की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी। बौद्ध सर्किट के तहत सारनाथ को बोधगया, कुशीनगर और लुंबिनी से जोड़ने वाली कनेक्टिविटी परियोजनाओं को भी इस मान्यता से नई गति मिलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है — क्या भारत इस मान्यता को संरक्षण की जिम्मेदारी में बदल पाएगा? अजंता-एलोरा और हम्पी जैसे पहले से सूचीबद्ध स्थलों पर अतिक्रमण और अपर्याप्त रखरखाव की समस्याएँ सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं। बौद्ध सर्किट की संभावना तभी साकार होगी जब सारनाथ में पर्यटन-दबाव और विरासत-संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की ठोस नीति हो — राजनीतिक बयानों से परे। यूनेस्को की मुहर अवसर है, गारंटी नहीं।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में कब शामिल किया गया?
सारनाथ को 25 जुलाई 2025 को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया। यूनेस्को ने इसकी घोषणा अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट के माध्यम से की।
सारनाथ बौद्ध धर्म के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
सारनाथ वह पवित्र स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहा जाता है। यह घटना बौद्ध धर्म की नींव मानी जाती है, इसलिए सारनाथ दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए सर्वोच्च तीर्थ स्थलों में से एक है।
PM मोदी और उपराष्ट्रपति ने सारनाथ की यूनेस्को मान्यता पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'हर भारतीय के लिए गर्व का विषय' बताया और कहा कि इससे दुनिया भर के लोग सारनाथ आने और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे भारत की प्राचीन सभ्यता और आध्यात्मिक विचारों का वैश्विक सम्मान बताया।
यूनेस्को विश्व धरोहर दर्जे से सारनाथ और स्थानीय अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा?
इस मान्यता से सारनाथ की वैश्विक पहचान मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद है। इससे स्थानीय व्यापारियों, पर्यटन गाइड और हस्तशिल्पकारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी नई गति मिलने की संभावना है।
सारनाथ में कौन-से प्रमुख ऐतिहासिक स्मारक हैं?
सारनाथ में धमेख स्तूप, अशोक स्तंभ और प्राचीन मठ-विहारों के अवशेष हैं। विशेष रूप से, सारनाथ में मिला अशोक स्तंभ-शीर्ष ही भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है, जो इस स्थल को भारत की राष्ट्रीय पहचान से सीधे जोड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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