4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सारनाथ बना भारत का 45वाँ विश्व धरोहर स्थल, केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले — वाराणसी और देश के लिए ऐतिहासिक गर्व

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सारनाथ बना भारत का 45वाँ विश्व धरोहर स्थल, केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले — वाराणसी और देश के लिए ऐतिहासिक गर्व

सारांश

27 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिला — भारत का 45वाँ। बुसान में हुई 48वीं बैठक में लिए गए इस निर्णय ने बौद्ध धर्म की जन्मस्थली को वैश्विक पहचान दिलाई और वाराणसी के पर्यटन को नई ऊँचाई देने का मार्ग खोल दिया।

मुख्य बातें

यूनेस्को ने 25 जुलाई 2025 को सारनाथ को भारत के 45वें विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी।
यह निर्णय दक्षिण कोरिया के बुसान में यूनेस्को विश्व धरोहर समिति की 48वीं बैठक में लिया गया।
सारनाथ को 1998 में यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किया गया था — अंतिम मान्यता 27 वर्ष बाद मिली।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इसे वाराणसी वासियों और पूरे देश के लिए 'गर्व और सौभाग्य' का पल बताया।
धरोहर स्थल में धमेख स्तूप , चौखंडी स्तूप , मूलगंधकुटी विहार और अशोक स्तंभ शामिल हैं।
विश्व धरोहर दर्जे से वाराणसी में पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

बौद्ध धर्म की पवित्र धरती सारनाथ को अब वैश्विक मंच पर एक नई और स्थायी पहचान मिल गई है। यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) ने 25 जुलाई 2025 को सारनाथ को भारत के 45वें विश्व धरोहर स्थल के रूप में आधिकारिक मान्यता दी। यह निर्णय दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति की 48वीं बैठक में लिया गया।

मंत्री शेखावत की प्रतिक्रिया

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार, 4 अगस्त को वाराणसी में इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'यह पल हम सबके लिए, देश के लिए, खासकर वाराणसी वासियों के लिए बहुत गर्व और सौभाग्य की बात है।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और नेतृत्व में सारनाथ की इस पुरातात्विक और धार्मिक धरोहर को यूनेस्को की सूची में जगह मिली है।

शेखावत ने बताया कि सारनाथ को 1998 में ही यूनेस्को की संभावित सूची (टेंटेटिव लिस्ट) में शामिल किया गया था। लगभग 27 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद अब इसे अंतिम और औपचारिक मान्यता प्राप्त हुई है।

सारनाथ का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

सारनाथ वह पावन स्थल है जहाँ भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के पश्चात अपना प्रथम उपदेश दिया था — इस घटना को 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहा जाता है। बौद्ध धर्म के उदय का यही केंद्र बिंदु माना जाता है। यह धरोहर स्थल अनेक अमूल्य पुरातात्विक संरचनाओं का संगम है, जिनमें शामिल हैं:

चौखंडी स्तूप — जहाँ बुद्ध अपने प्रथम शिष्यों से मिले थे; धमेख स्तूप; धर्मराजिका स्तूप; मूलगंधकुटी विहार; और अशोक स्तंभ — जो भारत के राष्ट्रीय चिह्न का स्रोत है।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर असर

केंद्रीय मंत्री शेखावत के अनुसार, विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद सारनाथ में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे न केवल वाराणसी की स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वैश्विक छवि भी और सुदृढ़ होगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार बौद्ध सर्किट पर्यटन को प्राथमिकता दे रही है।

स्थानीय और बौद्ध समुदाय में उत्साह

इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद वाराणसी और सारनाथ के स्थानीय निवासियों तथा बौद्ध अनुयायियों में व्यापक उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अब विश्वभर से श्रद्धालु और शोधार्थी इस स्थल की ओर आकर्षित होंगे। गौरतलब है कि इससे पहले भारत के 44 स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान पा चुके थे, और सारनाथ इस प्रतिष्ठित सूची में नवीनतम प्रविष्टि है।

आगे की राह

विश्व धरोहर दर्जे के साथ अब सारनाथ के संरक्षण, विकास और प्रबंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन अनिवार्य होगा। पर्यटन मंत्रालय से अपेक्षा है कि वह इस स्थल के समग्र विकास के लिए एक विस्तृत योजना शीघ्र प्रस्तुत करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह मान्यता 1998 में संभावित सूची में दर्ज होने के पूरे 27 वर्ष बाद मिली है। असली कसौटी अब यह होगी कि क्या सरकार इस दर्जे के साथ आने वाले संरक्षण दायित्वों को पर्यटन विस्तार की महत्वाकांक्षाओं के साथ संतुलित कर पाएगी। अनेक विश्व धरोहर स्थलों पर अत्यधिक पर्यटन से मूल संरचनाओं को नुकसान पहुँचने के उदाहरण विश्वभर में मौजूद हैं। वाराणसी के लिए यह सुनहरा अवसर तभी सार्थक होगा जब धरोहर संरक्षण की ठोस कार्ययोजना विकास की घोषणाओं से आगे निकले।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा कब और कहाँ मिला?
सारनाथ को 25 जुलाई 2025 को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। यह निर्णय दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति की 48वीं बैठक में लिया गया।
सारनाथ भारत की विश्व धरोहर सूची में कौन-से नंबर पर है?
सारनाथ भारत का 45वाँ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बन गया है। इससे पहले भारत के 44 स्थल इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल थे।
सारनाथ का बौद्ध धर्म में क्या महत्व है?
सारनाथ वह पवित्र स्थल है जहाँ भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहा जाता है। इसी कारण बौद्ध धर्म के उदय की भूमि सारनाथ को माना जाता है।
सारनाथ विश्व धरोहर स्थल में कौन-कौन सी ऐतिहासिक संरचनाएँ हैं?
इस धरोहर स्थल में धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार और ऐतिहासिक अशोक स्तंभ शामिल हैं। चौखंडी स्तूप वह स्थान है जहाँ बुद्ध अपने प्रथम शिष्यों से मिले थे।
विश्व धरोहर दर्जे से वाराणसी को क्या फायदा होगा?
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, इस दर्जे से सारनाथ में देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में बड़ी वृद्धि होगी। इससे वाराणसी की स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और भारत की सांस्कृतिक वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले