सारनाथ बना भारत का 45वाँ विश्व धरोहर स्थल, शेखावत बोले — वाराणसी और देश के लिए ऐतिहासिक गर्व
सारांश
मुख्य बातें
बौद्ध धर्म की पवित्र नगरी सारनाथ को यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) ने 25 जुलाई को भारत का 45वाँ विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति की 48वीं बैठक में यह मान्यता प्रदान की गई। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इसे देश और वाराणसी वासियों के लिए अत्यंत गर्व का क्षण बताया।
मंत्री शेखावत की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार, 4 अगस्त को कहा, 'यह पल हम सबके लिए, देश के लिए, खासकर वाराणसी वासियों के लिए बहुत गर्व और सौभाग्य की बात है।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और नेतृत्व में सारनाथ की इस पुरातात्विक और धार्मिक धरोहर को यूनेस्को की सूची में स्थान मिला है।
शेखावत ने बताया कि सारनाथ को 1998 में ही यूनेस्को की संभावित सूची (टेंटेटिव लिस्ट) में सम्मिलित किया गया था। लगभग 27 वर्षों के इंतज़ार के बाद अब इसे अंतिम और आधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई है।
सारनाथ का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
सारनाथ वह पवित्र स्थान है जहाँ भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के पश्चात अपना प्रथम उपदेश दिया था — इसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहा जाता है। बौद्ध धर्म के उद्गम स्थल के रूप में इसकी वैश्विक महत्ता असाधारण है।
इस धरोहर स्थल में चौखंडी स्तूप — जहाँ बुद्ध अपने प्रथम शिष्यों से मिले थे — के अतिरिक्त धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार और अशोक स्तंभ जैसे अमूल्य पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं। यह समूचा परिसर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रमाण है।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर असर
विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद वाराणसी में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। मंत्री शेखावत के अनुसार इससे न केवल वाराणसी की स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान और सुदृढ़ होगी।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार काशी-अयोध्या-मथुरा धार्मिक पर्यटन गलियारे को सक्रिय रूप से विकसित कर रही है। सारनाथ का यूनेस्को दर्जा इस पूरे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और प्रमुखता से स्थापित करेगा।
स्थानीय जनता और बौद्ध समुदाय में उत्साह
सारनाथ के विश्व धरोहर स्थल बनने की घोषणा के बाद स्थानीय निवासियों और दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अब जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार सहित अनेक बौद्ध-बहुल देशों से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों का आगमन बढ़ेगा।
गौरतलब है कि भारत में अब कुल 45 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हो गए हैं, जो देश को वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर के मानचित्र पर और ऊँचाई पर ले जाता है। सारनाथ की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य विरासत के संरक्षण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।