वाराणसी में भूटान का बौद्ध मंदिर: ₹1 वार्षिक किराए पर 30 साल के लिए 2 एकड़ भूमि, भारत-भूटान कूटनीति को नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में भारत-भूटान द्विपक्षीय संबंधों को सांस्कृतिक आधार देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। 10 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग और रॉयल गवर्नमेंट ऑफ भूटान के बीच एक लीज डीड समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत वाराणसी के अजईपुर, परगना कोलअसला, तहसील पिंडरा में स्थित 2 एकड़ भूमि भूटान सरकार को 30 वर्षों के लिए मात्र ₹1 वार्षिक किराए पर दी जाएगी। इस भूमि पर भूटान सरकार एक बौद्ध मंदिर और अतिथि गृह का निर्माण करेगी।
समझौते का विवरण और हस्ताक्षर प्रक्रिया
यह लीज डीड एग्रीमेंट पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह और अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात की उपस्थिति में बुधवार को संपन्न हुआ। भूटान सरकार की ओर से नई दिल्ली स्थित रॉयल भूटानी दूतावास की उप-मिशन प्रमुख ताशी पेल्डन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से विशेष सचिव मृदुल चौधरी ने हस्ताक्षर किए।
चांसरी प्रमुख सांगे थिनले और काउंसलर (वित्त) चिमी वांगमों गवाह के रूप में समारोह में उपस्थित रहीं। दोनों पक्षों के बीच अभिलेखों का औपचारिक आदान-प्रदान भी संपन्न हुआ और भूमि हस्तांतरण से जुड़ी सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।
सारनाथ और बौद्ध परिपथ के लिए महत्व
वाराणसी के निकट स्थित सारनाथ वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। यह स्थल विश्वभर के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, 'सारनाथ पहले से ही बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण प्रेरणास्थलों में शामिल है। यहाँ भूटान द्वारा बौद्ध मंदिर और गेस्ट हाउस का निर्माण होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान और मजबूत होगी।'
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बौद्ध परिपथ के विकास को विशेष प्राथमिकता दे रही है। संकिसा, कुशीनगर और अन्य प्रमुख बौद्ध स्थलों पर उच्च स्तरीय पर्यटन एवं आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसने विदेशी तीर्थयात्रियों की पहुँच को सुगम बनाया है।
आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव
पर्यटन मंत्री ने कहा कि इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे, पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी पर्यटकों की आमद में वृद्धि होगी। यह समझौता ऐसे समय में आया है जब भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सांस्कृतिक कूटनीति को कूटनीतिक उपकरण के रूप में सक्रिय रूप से उपयोग कर रहा है।
रॉयल भूटानी दूतावास की उप-मिशन प्रमुख ताशी पेल्डन ने उत्तर प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 'यह समझौता भारत और भूटान के बीच सांस्कृतिक एवं कूटनीतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खोलेगा।'
पर्यटन नीति की व्यापक समीक्षा
इस अवसर पर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्ष 2017 के बाद पर्यटन विभाग द्वारा किए गए सभी एमओयू की समीक्षा की जाए। साथ ही, 'विजिट माई स्टेट' अभियान को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि प्रदेश में पर्यटन निवेश और पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सके।
उत्तर प्रदेश अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरों के बल पर देश के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है। भूटान के इस बौद्ध धाम की स्थापना से वाराणसी-सारनाथ क्षेत्र की वैश्विक पहचान और गहरी होने की उम्मीद है।