वाराणसी को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के रूप में मान्यता दिलाने की मांग की गई
सारांश
Key Takeaways
- वाराणसी की सांस्कृतिक धरोहर और प्राचीनता को मान्यता मिलनी चाहिए।
- राज्यसभा में सरकार से यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के लिए प्रस्ताव की मांग की गई है।
- वाराणसी में पिछले 11 वर्षों में महत्वपूर्ण विकास हुआ है।
- पर्यटन में वृद्धि के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे का योगदान है।
- काशी को सिटी ऑफ म्यूजिक के रूप में मान्यता दी गई है।
नई दिल्ली, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वाराणसी को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा दिलाने के लिए प्रस्ताव को शीघ्रता से आगे बढ़ाने की मांग राज्यसभा में उठाई गई।
शुक्रवार को राज्यसभा में कहा गया कि वाराणसी विश्व के सबसे प्राचीन और लगातार बसे शहरों में से एक है। यहाँ के प्राचीन मंदिर, पौराणिक गंगा के घाट और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराएँ इसे अद्वितीय बनाती हैं। यहाँ का संगीत, कला और वास्तुकला विश्वभर में प्रसिद्ध है और इसकी पहचान पूरी दुनिया में है।
भाजपा के राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि वह आज पूरे सदन और देश का ध्यान भगवान शिव की नगरी काशी अर्थात् वाराणसी की पर्यटन संभावनाओं और सांस्कृतिक धरोहर की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले ग्यारह वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में वाराणसी ने विकास की एक महत्वपूर्ण यात्रा तय की है। २०१४ से पहले यह शहर गंदगी, टूटी सड़कों और बिजली के उलझे तारों जैसी समस्याओं से जूझ रहा था, लेकिन आज यह तेजी से एक आधुनिक और वैश्विक शहर के रूप में उभर रहा है। प्रधानमंत्री ने अपनी अनेक यात्राओं के दौरान अपनी कर्मभूमि को ६०,००० करोड़ रुपए से अधिक के बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स की सौगात दी है। चाहे वह काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण हो, घाटों का पुनर्निर्माण हो या सड़कों का चौड़ीकरण, हर जगह विकास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे के माध्यम से १०,००० करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है और इसका लाभ जमीन पर दिखाई दे रहा है। इस बेहतर बुनियादी ढांचे का सीधा प्रभाव पर्यटन पर पड़ा है। २०२५ के आंकड़ों के अनुसार ७.२६ करोड़ से अधिक पर्यटक वाराणसी आए और १२० देशों के पर्यटकों ने यहाँ आकर दर्शन किए। यह दर्शाता है कि वाराणसी अब एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन केंद्र बन चुका है।
उन्होंने कहा कि इतनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित शहरों में से एक होने के बावजूद, वाराणसी की सांस्कृतिक धरोहर को अभी तक आधिकारिक रूप से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल नहीं किया गया है। हालाँकि, २०१५ में यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क ने काशी को सिटी ऑफ म्यूजिक के रूप में मान्यता दी थी। २०२६ की शुरुआत तक भारत के ४४ स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। २०१७ में अहमदाबाद को भारत का पहला वर्ल्ड हेरिटेज सिटी घोषित किया गया और २०१९ में जयपुर को यह सम्मान मिला। वाराणसी के दो प्रमुख स्थल सारनाथ १९९८ से और वाराणसी के ऐतिहासिक घाटों का समूह २०२१ से यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि २०२६ में प्रधानमंत्री की कर्मभूमि काशी को भी वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का आधिकारिक दर्जा मिले। सेठ ने सरकार और संस्कृति मंत्रालय से यह आग्रह किया है कि वाराणसी को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी घोषित करवाने के लिए औपचारिक प्रस्ताव को तेजी से आगे बढ़ाया जाए, ताकि हमारी इस प्राचीन और पवित्र नगरी को विश्व स्तर पर वह सम्मान मिल सके जिसकी वह वास्तव में हकदार है।