21 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

केजीएमयू नर्सिंग छात्रा दिव्यांशी यादव की मौत पर हंगामा, अटेंडेंस प्रेशर पर छात्रों के गंभीर आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
केजीएमयू नर्सिंग छात्रा दिव्यांशी यादव की मौत पर हंगामा, अटेंडेंस प्रेशर पर छात्रों के गंभीर आरोप

सारांश

लखनऊ के केजीएमयू में डेंगू से पीड़ित नर्सिंग छात्रा दिव्यांशी यादव की मौत ने एक कड़वी सच्चाई उजागर कर दी — अटेंडेंस का डर बीमारी से भी बड़ा था। छात्रों का आरोप है कि मेडिकल लीव न मिलने और डिग्री लेट होने के भय ने उसे बीमार हालत में भी क्लास आने पर मजबूर किया।

मुख्य बातें

केजीएमयू की 2025 बैच की नर्सिंग छात्रा दिव्यांशी यादव की डेंगू से मौत के बाद 21 सितंबर 2026 को कैंपस में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए।
छात्रों का आरोप — बीमार होने के बावजूद अटेंडेंस प्रेशर के कारण दिव्यांशी ने मेडिकल लीव नहीं ली और कॉलेज आती रही।
कथित तौर पर मौखिक रूप से चेतावनी दी गई थी कि इलेक्टिव मॉड्यूल मिस करने पर 6 महीने का बैक लगेगा।
17 सितंबर को घर गई दिव्यांशी की 20 सितंबर को मौत हो गई; वापसी की तारीख 21 सितंबर लिखी थी।
छात्राओं ने मेडिकल लीव पॉलिसी में बदलाव और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की है।
केजीएमयू प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ में 2025 बैच की नर्सिंग छात्रा दिव्यांशी यादव की मौत के बाद 21 सितंबर 2026 को कैंपस और हॉस्टल में भारी हंगामा मच गया। छात्रों का आरोप है कि अटेंडेंस के अत्यधिक दबाव के कारण दिव्यांशी डेंगू और तेज बुखार की हालत में भी कॉलेज आती रही, और समय पर मेडिकल लीव न मिलने की वजह से उसकी हालत बिगड़ती गई। इस दर्दनाक घटना ने केजीएमयू की लीव पॉलिसी और छात्रों पर डाले जाने वाले मानसिक दबाव को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

छात्रों के अनुसार दिव्यांशी यादव को कुछ दिन पहले हल्का बुखार हुआ था, जो बाद में डेंगू की पुष्टि के साथ गंभीर हो गया। बताया जा रहा है कि उसने 17 सितंबर की शाम एक पत्र लिखकर घर जाने की सूचना दी थी और 20 सितंबर को वापसी की तारीख लिखी थी, क्योंकि 21 सितंबर को इलेक्टिव मैंडेटरी क्लास थी।

एक साथी छात्रा ने बताया, 'उसने कहा था कि मुझे सोमवार को किसी भी हालत में कॉलेज पहुंचना है, वरना मेरी अनुपस्थिति दर्ज हो जाएगी। जिस दिन वो गई, उस दिन भी बोलकर गई कि चाहे कुछ भी हो जाए, मेरी एब्सेंट मार्क हो जाएगी।' घर जाने के ठीक एक दिन बाद दिव्यांशी की मौत हो गई।

छात्रों के आरोप — अटेंडेंस सिस्टम कटघरे में

प्रदर्शनकारी छात्राओं ने केजीएमयू की लीव पॉलिसी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। एक छात्रा ने कहा, 'मेडिकल लीव हर जगह — स्कूल, ऑफिस, यहाँ तक कि AIIMS जैसे संस्थानों में भी — स्वीकार की जाती है, लेकिन हमारे यहाँ नहीं मानी जाती।'

एक अन्य छात्रा ने बताया कि क्लिनिकल ड्यूटी में एक भी दिन की अनुपस्थिति पर डिग्री में देरी और कंपनसेशन ड्यूटी का प्रावधान है। उसने कहा, 'सभी बच्चों को यह डर रहता है कि अपनी डिग्री को लेट क्यों करें, इसलिए हम चाहे जैसी भी हालत हो, रोज़ आते हैं।'

एक छात्रा ने यह भी बताया कि दिव्यांशी पर कथित तौर पर मौखिक रूप से दबाव डाला गया था कि इलेक्टिव मॉड्यूल में न आने पर 6 महीने का बैक लगाया जाएगा। 'यह बात मौखिक तौर पर कही गई थी, लिखित में कुछ नहीं था,' छात्रा ने कहा।

हॉस्टल में डर का माहौल

दिव्यांशी की साथी छात्राओं का कहना है कि पिछले दो दिनों से हॉस्टल में भय का वातावरण है। एक छात्रा ने बताया, 'जब उसकी हालत बहुत खराब हो गई, तभी वह घर गई, और उसके एक दिन बाद उसकी मौत हो गई। सवाल यह है कि वह इतने दिनों तक इंतज़ार क्यों करती रही, पहले क्यों नहीं गई — जवाब सिर्फ अटेंडेंस का डर है।'

छात्रों की माँगें

प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई, मेडिकल लीव पॉलिसी में तत्काल बदलाव और नियमों के पारदर्शी पालन की माँग की है। छात्राओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी माँगें नहीं मानी जातीं, वे प्रदर्शन जारी रखेंगी।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की राह

फिलहाल केजीएमयू प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह मामला उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग और उच्च अधिकारियों तक पहुँचने की उम्मीद है। दिव्यांशी यादव की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र जाँच की माँग भी उठने लगी है, जो आने वाले दिनों में इस मुद्दे को और व्यापक रूप दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दूसरों को स्वास्थ्य का पाठ पढ़ाते हैं, अपने ही छात्रों की बीमारी को नज़रअंदाज़ करते हैं। AIIMS जैसे शीर्ष संस्थान मेडिकल लीव को मान्यता देते हैं, फिर केजीएमयू में यह अपवाद क्यों? सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जो चेतावनियाँ दी गईं, वे मौखिक थीं — लिखित में कुछ नहीं — जो जवाबदेही से बचने का एक स्थापित तरीका है। यह मामला केवल एक छात्रा की मौत नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेजों में छात्र कल्याण नीतियों की व्यापक समीक्षा की माँग करता है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केजीएमयू में नर्सिंग छात्रा दिव्यांशी यादव की मौत कैसे हुई?
छात्रों के अनुसार दिव्यांशी यादव को डेंगू और तेज बुखार था, लेकिन अटेंडेंस के दबाव में वह बीमार हालत में भी कॉलेज आती रही। 17 सितंबर को घर जाने के एक दिन बाद उनकी मौत हो गई। परिजनों और साथी छात्रों का आरोप है कि समय पर मेडिकल लीव न मिलने के कारण उनकी हालत बिगड़ती गई।
केजीएमयू में मेडिकल लीव पॉलिसी क्या है जिस पर सवाल उठ रहे हैं?
छात्रों का कहना है कि केजीएमयू में क्लिनिकल ड्यूटी में एक भी दिन की अनुपस्थिति पर डिग्री में देरी और कंपनसेशन ड्यूटी का प्रावधान है। छात्रों के अनुसार AIIMS जैसे संस्थानों में मेडिकल लीव मान्य होती है, लेकिन केजीएमयू में यह नीति नहीं है।
छात्रों ने केजीएमयू प्रशासन पर क्या आरोप लगाए हैं?
छात्रों का आरोप है कि इलेक्टिव मॉड्यूल में न आने पर 6 महीने का बैक लगाने की मौखिक चेतावनी दी गई थी, जिसकी वजह से दिव्यांशी बुखार में भी क्लास आती रही। छात्रों ने यह भी कहा कि यह धमकी लिखित में नहीं थी, जिससे जवाबदेही तय करना मुश्किल हो गया है।
छात्राओं की क्या माँगें हैं?
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने तीन मुख्य माँगें रखी हैं — जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई, मेडिकल लीव पॉलिसी में तत्काल बदलाव, और नियमों का पारदर्शी पालन। छात्राओं ने माँगें न मानने तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
केजीएमयू प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मामला उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग तक पहुँचने की उम्मीद है। दिव्यांशी की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र जाँच की माँग भी उठ रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले