लखनऊ अलीगंज अग्निकांड: केजीएमयू से 5 बच्चों को मिली छुट्टी, जयंत की रीढ़ में गंभीर चोट — इलाज जारी
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में भर्ती 5 छात्रों को छुट्टी दे दी गई है, जबकि दो गंभीर रूप से घायल छात्रों का उपचार अभी भी जारी है। 23 जून को हुई इस त्रासदी में 15 बच्चों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं, जिनका केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है।
केजीएमयू में मरीज़ों की स्थिति
केजीएमयू के डॉ. प्रेम राज सिंह ने बताया कि 15 बच्चों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था, जबकि घायल अवस्था में लाए गए 8 बच्चों की स्थिति स्थिर है। उन्होंने कहा कि अब तक की जानकारी के अनुसार बच्चों की मौत दम घुटने से हुई है।
केजीएमयू के प्रवक्ता के.के. सिंह ने विस्तार से बताया कि जिन 5 छात्रों को छुट्टी दी गई, उनकी चोटें अपेक्षाकृत कम गंभीर थीं। गंभीर रूप से घायल दो छात्रों में से एक लवप्रीत नाम की लड़की है, जिसके बाएं जांघ में चोट आई है। एक्स-रे में कोई फ्रैक्चर नहीं पाया गया। उनके परिवार के दिल्ली से आने पर उन्हें छुट्टी दी जा सकती है अथवा किसी अन्य केंद्र में भेजा जा सकता है।
जयंत की हालत — रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट
दूसरे गंभीर मरीज़ जयंत का मामला अत्यंत चिंताजनक है। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे ऊपरी मंजिल से कूदते दिख रहे थे। प्रवक्ता के.के. सिंह के अनुसार, जयंत एक लोहे की रॉड पर गिरे, जो उनकी पीठ के निचले हिस्से में घुस गई, जिससे स्पाइनल कॉर्ड (रीढ़ की हड्डी) में चोट आई। इस कारण उनके शरीर का निचला हिस्सा अभी सुन्न है।
रात में किए गए सीटी स्कैन में रीढ़ की हड्डी और नसों में चोट तथा सूजन की पुष्टि हुई है। अब एमआरआई किया जाना है, जिसके आधार पर यह तय होगा कि आगे सर्जरी की आवश्यकता होगी या दवाओं से उपचार संभव होगा।
प्रशासन और चिकित्सा नेतृत्व की प्रतिक्रिया
केजीएमयू की वाइस चांसलर प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा, 'मुझे हर पल की जानकारी है। जिनकी मौत हो चुकी है, उनका पोस्टमार्टम करना होगा, और जिनका इलाज हो सकता है, उन्हें बचाने पर हमारा पूरा ध्यान है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल अपनी पूरी क्षमता से पीड़ितों की सेवा में जुटा है।
राजनीतिक दौरे और जवाबदेही की माँग
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने इस घटना को 'बेहद दुखद और दर्दनाक' बताते हुए कहा कि खबरें आ रही हैं कि फायर ब्रिगेड समय पर मौके पर नहीं पहुंची। उन्होंने माँग की कि इसकी जाँच होनी चाहिए।
गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब देशभर में कोचिंग सेंटरों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। आने वाले दिनों में जयंत के एमआरआई नतीजे और प्रशासन की जाँच रिपोर्ट इस त्रासदी की पूरी तस्वीर सामने लाएगी।