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त्रिची सरकारी अस्पताल में नर्सिंग छात्रा गीतालक्ष्मी की मौत: CPI ने माँगा ₹50 लाख मुआवजा और न्यायिक जाँच

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त्रिची सरकारी अस्पताल में नर्सिंग छात्रा गीतालक्ष्मी की मौत: CPI ने माँगा ₹50 लाख मुआवजा और न्यायिक जाँच

सारांश

त्रिची सरकारी अस्पताल में नर्सिंग की दूसरे वर्ष की छात्रा गीतालक्ष्मी की कथित चिकित्सीय लापरवाही से मौत ने तमिलनाडु में आक्रोश फैला दिया है। CPI ने ₹50 लाख मुआवजे, न्यायिक जाँच और परिवार को सरकारी नौकरी की माँग रखी है — और सरकारी अस्पतालों की जवाबदेही पर सवाल तेज़ हो गए हैं।

मुख्य बातें

21 वर्षीया गीतालक्ष्मी , त्रिची सरकारी अस्पताल के नर्सिंग ट्रेनिंग स्कूल की दूसरे वर्ष की छात्रा, की कथित चिकित्सीय लापरवाही से मौत हो गई।
आरोप है कि एनेस्थीसिया देने से पहले अनिवार्य मेडिकल टेस्ट नहीं कराए गए और पूरी रात उचित इलाज नहीं मिला।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने ₹50 लाख मुआवजे, न्यायिक जाँच और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की माँग की।
छात्रा पुदुकोट्टई जिले के थोंडामानल्लुर गाँव की निवासी थी और उसी अस्पताल में इलाज भी करा रही थी जहाँ वह प्रशिक्षण ले रही थी।
अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

तमिलनाडु के त्रिची सरकारी जनरल अस्पताल में 21 वर्षीया नर्सिंग छात्रा गीतालक्ष्मी की कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण मौत हो जाने के बाद मामला गंभीर रूप ले चुका है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने इस घटना को गंभीर लापरवाही करार देते हुए राज्य सरकार से ₹50 लाख मुआवजे और न्यायिक जाँच की माँग की है। 23 मई को सामने आई इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कौन थी गीतालक्ष्मी

गीतालक्ष्मी त्रिची सरकारी अस्पताल के नर्सिंग ट्रेनिंग स्कूल में दूसरे वर्ष की छात्रा थी। वह पुदुकोट्टई जिले के कोलाथुर तालुका के थोंडामानल्लुर गाँव निवासी सेट्टू की बेटी थी। वह उसी सरकारी अस्पताल में नाक से जुड़ी बीमारी का इलाज करा रही थी, जहाँ वह प्रशिक्षण भी ले रही थी।

कथित लापरवाही का विवरण

परिजनों और CPI नेताओं के आरोपों के अनुसार, इलाज के दौरान छात्रा को एनेस्थीसिया दिया गया, लेकिन कथित तौर पर इससे पहले अनिवार्य मेडिकल टेस्ट नहीं कराए गए। इसी चूक के चलते उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। आरोप यह भी है कि हालत गंभीर होने के बावजूद पूरी रात छात्रा को समुचित उपचार नहीं दिया गया, जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई। अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

CPI की माँगें

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। पार्टी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — पहली, मामले की निष्पक्ष न्यायिक जाँच ताकि मौत के वास्तविक कारण सामने आ सकें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो; दूसरी, छात्रा के परिवार को ₹50 लाख का मुआवजा; और तीसरी, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी

सार्वजनिक आक्रोश और व्यापक असर

इस घटना के उजागर होने के बाद त्रिची जिले में लोगों में गहरी नाराज़गी देखी जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षु छात्रों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता पहले से ही बहस का विषय रही है। गौरतलब है कि यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि सरकारी चिकित्सा व्यवस्था में जवाबदेही के व्यापक सवाल भी उठाता है।

आगे क्या होगा

स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। CPI ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाए तो आंदोलन तेज़ किया जाएगा। न्यायिक जाँच की माँग के साथ यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर दबाव बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक साथ मरीज़ और कर्मचारी दोनों होते हैं। एनेस्थीसिया से पहले अनिवार्य परीक्षण न कराने का आरोप, यदि सिद्ध होता है, तो यह प्रोटोकॉल की विफलता नहीं बल्कि व्यवस्थागत उदासीनता का संकेत है। तमिलनाडु की स्वास्थ्य सेवाएँ देश में अपेक्षाकृत बेहतर मानी जाती हैं, इसीलिए इस घटना का राजनीतिक दबाव और अधिक है। न्यायिक जाँच की माँग उचित है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या जाँच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएँगे और क्या दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई होगी।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिची में नर्सिंग छात्रा गीतालक्ष्मी की मौत कैसे हुई?
कथित तौर पर गीतालक्ष्मी को नाक की बीमारी के इलाज के दौरान एनेस्थीसिया दिया गया, लेकिन परिजनों के अनुसार इससे पहले ज़रूरी मेडिकल टेस्ट नहीं कराए गए। हालत बिगड़ने के बाद भी कथित तौर पर पूरी रात उचित उपचार नहीं मिला, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।
CPI ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — छात्रा के परिवार को ₹50 लाख का मुआवजा, मामले की निष्पक्ष न्यायिक जाँच, और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी। पार्टी ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपील भी की है।
गीतालक्ष्मी कौन थी और वह कहाँ से थी?
गीतालक्ष्मी 21 वर्षीया नर्सिंग छात्रा थी जो त्रिची सरकारी अस्पताल के नर्सिंग ट्रेनिंग स्कूल में दूसरे वर्ष में पढ़ रही थी। वह पुदुकोट्टई जिले के कोलाथुर तालुका के थोंडामानल्लुर गाँव के निवासी सेट्टू की बेटी थी।
अस्पताल प्रशासन ने इस मामले पर क्या कहा है?
अभी तक त्रिची सरकारी अस्पताल प्रशासन और तमिलनाडु स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की जाँच की स्थिति भी स्पष्ट नहीं की गई है।
इस घटना का व्यापक महत्व क्या है?
यह मामला सरकारी अस्पतालों में चिकित्सीय प्रोटोकॉल के पालन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाता है। विशेष रूप से यह उजागर करता है कि प्रशिक्षु छात्र, जो उसी संस्थान में मरीज़ भी होते हैं, उन्हें उचित देखभाल मिलना सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी किसकी है।
राष्ट्र प्रेस
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