यमन तट पर सशस्त्र नाव का जहाज पर हमला, ओमान के पास टैंकर में आग — खाड़ी में समुद्री तनाव फिर भड़का
सारांश
मुख्य बातें
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, यमन के तट के निकट एक सशस्त्र नाव — जिसमें 6 बंदूकधारी सवार थे — ने एक वाणिज्यिक जहाज पर गोलीबारी की, जिसके बाद जहाज पर तैनात सुरक्षा दल ने जवाबी कार्रवाई की। यह घटना 10 जून को हुई और फिलहाल जाँच जारी है। इसी दिन ओमान के सोहार बंदरगाह से लगभग 37 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में एक टैंकर के इंजन रूम में आग लग गई, जिसमें एक व्यक्ति हताहत हुआ।
यमन तट पर गोलीबारी की घटना
UKMTO की रिपोर्ट के मुताबिक, सशस्त्र नाव ने वाणिज्यिक पोत को निशाना बनाया। जहाज पर मौजूद सुरक्षा टीम ने तत्काल जवाब दिया और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। घटना के विस्तृत ब्यौरे की जाँच अभी जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब लाल सागर और अदन की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा पहले से ही नाजुक बनी हुई है।
ओमान के पास टैंकर में आग
UKMTO के अनुसार, सोहार से 37 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित टैंकर के इंजन रूम में आग भड़की। इस हादसे में एक व्यक्ति हताहत हुआ, हालाँकि हताहत की प्रकृति और आग लगने के कारणों की अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। बचाव और जाँच अभियान जारी बताया जा रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में बढ़ता दबाव
रिपोर्टों के अनुसार, संघर्षविराम के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएँ थमी नहीं हैं। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में हजारों जहाज फँसे हुए बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से विश्व के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहाँ की अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को सीधे प्रभावित कर सकती है।
खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया
बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने हालिया घटनाओं की निंदा करते हुए ईरान की कार्रवाइयों पर कड़ी आपत्ति जताई है। माना जा रहा है कि खाड़ी देशों के नेता क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए ईरान और अमेरिका दोनों पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा सकते हैं। यह स्थिति ऐसे समय में उभरी है जब मध्य पूर्व में कूटनीतिक संतुलन पहले से ही अत्यंत नाज़ुक है।
आगे क्या
समुद्री सुरक्षा एजेंसियाँ दोनों घटनाओं की जाँच कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग पर इन घटनाओं का असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि बीमा प्रीमियम और मार्ग-परिवर्तन की लागत पहले से बढ़ी हुई है। क्षेत्र में स्थिरता बहाल होने तक जहाज़रानी कंपनियाँ वैकल्पिक मार्गों पर विचार कर सकती हैं।