किरन रिजिजू का दावा: केरल चुनाव में रिकॉर्ड जीत की तैयारी
सारांश
Key Takeaways
- केंद्र मंत्री किरण रिजिजू का एनडीए केरल चुनाव में रिकॉर्ड जीत का दावा।
- कांग्रेस की नीतियों पर तीखी आलोचना।
- केरल के लोग अब कम्युनिस्टों और कांग्रेस का खेल समझ चुके हैं।
- केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी का तेलंगाना में कांग्रेस की फर्जी गारंटियों का जिक्र।
- आने वाले चुनावों में कई नेता केरल में वादे करने आ रहे हैं।
कोल्लम, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल विधानसभा चुनाव में एनडीए की सीटों पर जीत की उम्मीदों को लेकर केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने शुक्रवार को कहा कि हम रिकॉर्ड संख्या में सीटें जीतेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि मैं केरल के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जो भी हम करेंगे, वह भारत की भलाई के लिए होगा। हम हर समुदाय को साथ लेकर चलेंगे। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में देखती है और उन्हें खुश करने का प्रयास करती है। किरण रिजिजू ने सवाल उठाया, "अगर मुसलमान गरीब हैं, तो उन्हें गरीब किसने बनाया? कांग्रेस पार्टी ने।"
किरन रिजिजू ने कहा कि आज वे क्रिश्चियन समुदाय को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब कोई उनकी बात सुनने वाला नहीं है। केरल के लोग अब कम्युनिस्टों और कांग्रेस पार्टी का खेल समझ चुके हैं। इतने वर्षों से ये दोनों ग्रुप सत्ता का आदान-प्रदान करते रहे हैं। अब तीसरी पार्टी को मौका मिलने का समय है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उन्हें कोई गंभीरता से नहीं लेता।
इस बीच, केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने केरल के लोगों के लिए एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी की ‘फर्जी गारंटियों’ का उल्लेख किया और लोगों को सावधान रहने की अपील की। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि केरल अपने शिक्षित और जागरूक नागरिकों के लिए जाना जाता है, जो वोट देने से पहले सोच-समझकर निर्णय लेते हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों में कई नेता केरल आ रहे हैं और कई वादे कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मैं एक केंद्रीय मंत्री और तेलंगाना का सांसद होने के नाते वहां की स्थिति को करीब से देख चुका हूं। तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में आने के लिए 6 गारंटी और 420 से ज्यादा वादे किए थे, जो किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों से जुड़े थे। इन वादों का बड़े स्तर पर प्रचार किया गया था, जिसमें सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी जैसे बड़े नेताओं ने भाग लिया था, लेकिन ये गारंटी पूरी तरह से फर्जी साबित हुई हैं।