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किराना हिल्स प्रहार से घबराया पाकिस्तान, अमेरिका की सक्रियता अचानक बढ़ी — रिटायर्ड मेजर जनरल कटोच

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किराना हिल्स प्रहार से घबराया पाकिस्तान, अमेरिका की सक्रियता अचानक बढ़ी — रिटायर्ड मेजर जनरल कटोच

सारांश

किराना हिल्स पर बेइरादा प्रहार — लेकिन असर बेहद गहरा। रिटायर्ड मेजर जनरल ध्रुव कटोच के अनुसार, इस एक घटना ने अमेरिका को मध्यस्थता के लिए मजबूर किया, पाकिस्तान को घुटने टेकने पर विवश किया और भारत-चीन-पाकिस्तान त्रिकोण की असली तस्वीर उजागर कर दी।

मुख्य बातें

पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान और एयर मार्शल भारती दोनों ने स्पष्ट किया कि किराना हिल्स भारत का जानबूझकर चुना गया लक्ष्य नहीं था।
रिटायर्ड मेजर जनरल ध्रुव कटोच के अनुसार, किराना हिल्स में लोइटरिंग म्यूनिशन ईंधन समाप्त होने पर गिरा और कथित तौर पर वहाँ काफी नुकसान हुआ।
10 मई के बाद अमेरिका की सक्रियता में अचानक वृद्धि हुई; कटोच का आकलन है कि पाकिस्तान ने प्रभावी रूप से घुटने टेके।
पाकिस्तान की परमाणु कमांड संरचना सक्रिय होने की खबरें आई थीं, जिन्हें बाद में पाकिस्तान ने नकारा।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को कथित तौर पर सैटेलाइट और खुफिया सहयोग दिया; भारतीय वायु रक्षा ने पाकिस्तानी हमलों को नाकाम किया।
कटोच ने भविष्य के किसी टकराव में चीन और तुर्की की संयुक्त भूमिका की संभावना के प्रति सतर्क किया।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के किराना हिल्स इलाके में हुए प्रहार को लेकर रक्षा विशेषज्ञ और रिटायर्ड मेजर जनरल ध्रुव कटोच ने 26 अगस्त को स्पष्ट किया कि भले ही यह हमला पूर्व-नियोजित नहीं था, लेकिन इसके रणनीतिक परिणाम अत्यंत दूरगामी रहे। उनके अनुसार, इस घटना के बाद अमेरिका की सक्रियता में अचानक और उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

क्या हुआ किराना हिल्स में

पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह स्वीकार किया था कि किराना हिल्स भारत का जानबूझकर चुना गया लक्ष्य नहीं था। इससे पहले एयर मार्शल भारती भी ऑपरेशन के बाद यह स्पष्ट कर चुके थे कि किराना हिल्स पर प्रहार भारतीय अभियान की मूल मंशा नहीं थी।

कटोच के अनुसार, किराना हिल्स में भेजी गई लोइटरिंग म्यूनिशन कथित तौर पर एक रडार या वायु रक्षा से जुड़े लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए थी। ईंधन समाप्त होने पर यह हथियार उस इलाके में गिरा और कथित तौर पर एक एयर वेंट के रास्ते अंदर तक पहुँच गया, जिससे वहाँ काफी नुकसान हुआ।

अमेरिका की बढ़ी सक्रियता और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

कटोच ने कहा, 10 मई के बाद भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर अमेरिका पहले की तुलना में कहीं अधिक चिंतित नज़र आया। उनके आकलन के अनुसार, इसके पीछे किराना हिल्स में हुआ नुकसान एक महत्वपूर्ण कारण था। उन्होंने कहा, "इरादा चाहे जो रहा हो, लेकिन किराना हिल्स पर प्रहार हुआ और वह काफी सटीक था। इसके बाद अमेरिका की सक्रियता अचानक बढ़ गई।"

रिपोर्टों के अनुसार, उस दौरान पाकिस्तान की ओर से उसकी परमाणु कमांड संरचना को सक्रिय किए जाने की खबरें सामने आई थीं, हालाँकि बाद में पाकिस्तान ने इससे इनकार किया। कटोच ने कहा कि उनके आकलन में पाकिस्तान ने प्रभावी रूप से घुटने टेके और अमेरिका भी मध्यस्थता के लिए एक्शन में आ गया।

किराना हिल्स में कथित परमाणु केंद्रों के बारे में उन्होंने सतर्कता बरती। उन्होंने कहा, "इस संबंध में कई तरह की अटकलें हैं, लेकिन ऐसी संवेदनशील जानकारी की सार्वजनिक रूप से पुष्टि करना मुश्किल है। वहाँ मौजूद कुछ फैसिलिटी के अमेरिकी संबंध हो सकते हैं, लेकिन इसे प्रमाणित तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।"

चीन और तुर्की की भूमिका

कटोच ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को लगातार खुफिया और सैटेलाइट सहयोग दिया। उन्होंने कहा, "चीन और पाकिस्तान के बीच 40-50 वर्षों से रणनीतिक और रक्षा संबंध हैं, और चीन ने पाकिस्तान को सैन्य तथा परमाणु क्षेत्र में भी सहयोग दिया है।"

उनके अनुसार, चीनी खुफिया सहयोग की मदद से पाकिस्तान ने भारत के गहरे इलाकों में कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने इन हमलों को प्रभावी ढंग से नाकाम कर दिया। कटोच ने चेताया कि भविष्य के किसी भी टकराव में भारत को चीनी सैटेलाइट और खुफिया तंत्र के साथ-साथ तुर्की की संभावित भूमिका के लिए भी तैयार रहना होगा।

भारतीय युवाओं से अपील

अमेरिका द्वारा बड़ी संख्या में बी-1/बी-2 वीज़ा रद्द किए जाने की खबरों के संदर्भ में कटोच ने कहा कि इसका असर भारतीयों के एक वर्ग पर भी पड़ सकता है। उन्होंने भारतीय युवाओं से देश लौटकर भारत की अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप क्षेत्र में योगदान देने की अपील की।

उन्होंने कहा, "भारत तेज़ी से बदल रहा है और आने वाले समय में देश में युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।" गौरतलब है कि अमेरिका और यूरोप में भारतीय समुदायों से जुड़ी उनकी कुछ टिप्पणियाँ उनके व्यक्तिगत आकलन पर आधारित थीं और उनके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

आगे क्या

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर रक्षा विशेषज्ञों के विश्लेषण सामने आते रहे हैं, और किराना हिल्स प्रकरण उनमें सबसे अधिक चर्चित बिंदु बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य पर अंतरराष्ट्रीय नज़रें टिकी हैं। आने वाले समय में इस घटनाक्रम के कूटनीतिक और रणनीतिक निहितार्थ और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए इस विश्लेषण को विशेषज्ञ आकलन के रूप में ही पढ़ा जाना चाहिए।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किराना हिल्स पर भारत का हमला जानबूझकर था या बेइरादा?
पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान और एयर मार्शल भारती दोनों ने स्पष्ट किया है कि किराना हिल्स भारत का पूर्व-नियोजित लक्ष्य नहीं था। रिटायर्ड मेजर जनरल ध्रुव कटोच के अनुसार, वहाँ भेजी गई लोइटरिंग म्यूनिशन ईंधन समाप्त होने पर उस इलाके में गिरी।
किराना हिल्स प्रहार के बाद अमेरिका क्यों सक्रिय हुआ?
कटोच के आकलन के अनुसार, 10 मई के बाद अमेरिका की सक्रियता में अचानक वृद्धि हुई और इसके पीछे किराना हिल्स में हुआ नुकसान एक महत्वपूर्ण कारण था। पाकिस्तान की परमाणु कमांड संरचना सक्रिय होने की खबरों ने अमेरिका की चिंता बढ़ाई, हालाँकि पाकिस्तान ने बाद में इससे इनकार किया।
क्या किराना हिल्स में परमाणु केंद्र हैं?
इस बारे में कई अटकलें हैं, लेकिन कटोच ने स्वयं स्वीकार किया कि ऐसी संवेदनशील जानकारी की सार्वजनिक पुष्टि करना मुश्किल है। वहाँ मौजूद कुछ सुविधाओं के अमेरिकी संबंध होने की संभावना जताई गई है, परंतु इसे प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
ऑपरेशन सिंदूर में चीन की क्या भूमिका रही?
कटोच के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को लगातार खुफिया और सैटेलाइट सहयोग दिया। चीनी सहयोग से पाकिस्तान ने भारत के गहरे इलाकों में कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, जिन्हें भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने नाकाम कर दिया।
भविष्य में भारत-पाकिस्तान संघर्ष में किन देशों की भूमिका हो सकती है?
कटोच ने चेताया कि भविष्य के किसी भी सैन्य टकराव में भारत को चीन के सैटेलाइट और खुफिया तंत्र के साथ-साथ तुर्की की संभावित भूमिका के लिए भी तैयार रहना होगा। चीन और पाकिस्तान के बीच 40-50 वर्षों के रणनीतिक और रक्षा संबंध इस संभावना को और प्रासंगिक बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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