किसानों का योगदान: 'विकसित भारत' के सपने में मुख्यमंत्री धामी का दृष्टिकोण
सारांश
Key Takeaways
- किसानों की भूमिका 'विकसित भारत' के संकल्प में महत्वपूर्ण है।
- किसान सम्मान निधि से आर्थिक सहायता मिल रही है।
- प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा कवच दिया जा रहा है।
- तीन लाख रुपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध है।
- मिलेट्स की खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पंतनगर, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जीबी पंत विश्वविद्यालय में शनिवार को 119वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। सीएम धामी ने कहा कि 2047 का जो 'विकसित भारत' का संकल्प है, उसे पूरा करने में किसान भाइयों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारे किसान भाई केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि समाज के नायक भी हैं, जो लोगों को अन्न उपलब्ध कराते हैं। आज देश भर के किसानों को किसान सम्मान निधि के माध्यम से आर्थिक सहायता मिल रही है। इस निधि के अंतर्गत उत्तराखंड के 9 लाख किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में यह सम्मान राशि प्राप्त हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य देने का प्रयास किया जा रहा है।
सीएम धामी ने कहा कि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और खर-पतवार से होने वाले नुकसान से सुरक्षा देने के लिए भी उपाय किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से हमारी सरकार किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर प्रयासरत है। किसानों को तीन लाख रुपए तक का ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है और कृषि उपकरण खरीदने के लिए फार्म मशीनरी योजना के तहत सब्सिडी दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए 1,200 करोड़ रुपए की लागत से सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट और स्टेट मिलेट मिशन की शुरुआत की है। प्रदेश में बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए 80 प्रतिशत सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है। शहद उत्पादन में हमारा राज्य देश में आठवें स्थान पर पहुंच गया है। हमारे राज्य में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाएं हैं।
यह उल्लेखनीय है कि 119वां अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी 16 मार्च तक चलेगा और इसका विषय 'सशक्त महिला-समृद्ध खेती' रखा गया है। मेले में किसानों को उन्नत बीज, नवीनतम कृषि नवाचारों और मिलेट्स की खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी प्राप्त होगी।
मेले में उन्नत धान, बागवानी और सब्जियों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। कृषि अनुसंधान से जुड़े नवीनतम नवाचारों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस बार विश्वविद्यालय ने मिलेट्स पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। कोदो, झिंगोरा और मंडुआ जैसी पारंपरिक फसलों की बढ़ती महत्ता पर ध्यान दिया जाएगा। इन फसलों की संभावित उच्च बाजार कीमतों को देखते हुए वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीकी जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाएगी।