काली पूजा और दीपावली से पहले कोलकाता का AQI 98 पर, चक्रवात 'अर्नब' से अस्थायी राहत
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता में 28 अक्टूबर 2026 को चक्रवात 'अर्नब' के प्रभाव से वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) घटकर 98 पर आ गया — जो पिछले वर्षों की इसी अवधि में दर्ज 200 से ऊपर के स्तर की तुलना में उल्लेखनीय सुधार है। काली पूजा और दीपावली से ठीक पहले यह राहत शहरवासियों के लिए सुकून की बात है, हालाँकि पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह सुधार स्थायी नहीं है।
मौजूदा स्थिति और वजह
बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती सिस्टम के कारण हवा में नमी बढ़ी है, जिससे वायुमंडल में मौजूद प्रदूषक तत्व काफी हद तक धुल गए हैं। पर्यावरणविदों के अनुसार, इस वर्ष बार-बार बने कम दबाव वाले सिस्टम और चक्रवाती गतिविधियों की वजह से सामान्य से अधिक बारिश हुई है, जिसने त्योहारी मौसम में भी प्रदूषण स्तर को नियंत्रण में रखा। दुर्गा पूजा के दौरान हुई बारिश ने भी प्रदूषण को उस तेज़ी से बढ़ने से रोका, जो आमतौर पर इस मौसम में देखी जाती है।
पर्यावरणविद डॉ. स्वाति नंदी चक्रवर्ती ने कहा कि इस साल काली पूजा से पहले वायु प्रदूषण का स्तर काफी कम है और स्थिति को काफी हद तक सामान्य कहा जा सकता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
ग्रीन टेक्नोलॉजिस्ट और पर्यावरणविद सोमेंद्र मोहन घोष ने स्पष्ट किया कि हवा में जो सुधार दिख रहा है, वह वायुमंडल में अधिक नमी के कारण एक अस्थायी असर है। उनके अनुसार, 6 नवंबर 2026 के बाद प्रदूषण का स्तर तेज़ी से बढ़ सकता है और यह स्थिति मार्च 2027 के मध्य तक बनी रह सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न में भी बदलाव देखे जा रहे हैं, जो इस अस्थायी सुधार का एक और कारण बताया जा रहा है।
प्रशासन की तैयारी
पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, काली पूजा और दीपावली के दौरान प्रदूषण पर नज़र रखने के लिए एक विशेष निगरानी टीम तैयार रखी गई है। अधिकारियों द्वारा पटाखों के उपयोग पर पाबंदियाँ लागू किए जाने की भी उम्मीद है — संभावना है कि पटाखे केवल रात 8 बजे से 10 बजे के बीच ही जलाने की अनुमति दी जाए।
पिछले वर्षों से तुलना
गौरतलब है कि पिछले वर्षों में काली पूजा और दीपावली से पहले ही कोलकाता का AQI 200 के पार जा चुका होता था — यानी पटाखे जलने से पहले ही वायु 'खराब' श्रेणी में आ जाती थी। इस बार 98 का AQI, जो 'संतोषजनक' श्रेणी में आता है, उल्लेखनीय अंतर दर्शाता है। हालाँकि विशेषज्ञ इसे प्रशासनिक सफलता की बजाय प्राकृतिक मौसमी कारकों का परिणाम मानते हैं।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, त्योहारों के बाद चक्रवाती प्रभाव कम होते ही और सर्दी की शुरुआत होते ही प्रदूषण का स्तर फिर से बढ़ेगा। शहरवासियों और प्रशासन दोनों के लिए यह अनुकूल स्थिति एक अवसर है कि त्योहारी पटाखेबाज़ी को सीमित रखकर इस राहत को थोड़ा और बढ़ाया जाए।