कोलकाता होटल अग्निकांड: 9 मौतों पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय बोले — फायर डिपार्टमेंट की लापरवाही, जांच हो
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने 21 अगस्त को कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित एक होटल में लगी भीषण आग पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई। उन्होंने इस हादसे को 'बेहद दुखद और दर्दनाक' बताते हुए अग्निशमन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और सरकार से तत्काल जांच की मांग की।
होटल अग्निकांड पर क्या बोले सौगत रॉय
सौगत रॉय ने कहा, 'यह बहुत दुखद और दर्दनाक घटना है, जिसमें होटल में ठहरे नौ लोगों की जान चली गई। यह फायर डिपार्टमेंट की लापरवाही की ओर इशारा करता है। सरकार को इस मामले की जांच करनी चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब कोलकाता में अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
सज्जन कुमार के निधन पर प्रतिक्रिया
पूर्व कांग्रेस सांसद और 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार के निधन पर सौगत रॉय ने कहा, 'सज्जन कुमार कांग्रेस के एक अहम नेता थे। बेशक, उन पर इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख-विरोधी दंगों में शामिल होने का आरोप था। इसके अलावा, मैं इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।'
झारखंड हाई कोर्ट के फैसले पर रुख
झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार के 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर रोक लगाने के मामले में सौगत रॉय ने कहा, 'मेरा मानना है कि हाई कोर्ट को अपना फैसला सुनाने का अधिकार है और राज्य सरकार को हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा। यह अच्छी बात है कि हाई कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है।'
कंगना रनौत बनाम शर्मिला टैगोर विवाद पर टिप्पणी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद कंगना रनौत की अभिनेत्री शर्मिला टैगोर पर की गई टिप्पणी के संदर्भ में सौगत रॉय ने कहा, 'कंगना रनौत को 'वंदे मातरम' या इसके इतिहास के बारे में कुछ भी नहीं पता है। उन्हें यह नहीं पता कि रवींद्रनाथ टैगोर ने सलाह दी थी कि 'वंदे मातरम' के केवल शुरुआती दो पैराग्राफ ही गाए जाने चाहिए। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता बनाए रखने के लिए ऐसा कहा था।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'मैं वही मानूंगा जो रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था। उन्होंने 1937 में यह राय दी थी। भाजपा 'वंदे मातरम' के सभी छह पदों को शामिल करने की मांग करके बेवजह इसे मुद्दा बना रही है। मैं भाजपा के नजरिए का समर्थन नहीं करता।' गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' के पदों की संख्या को लेकर राजनीतिक बहस नई नहीं है, परंतु इसे हालिया विवाद ने फिर से केंद्र में ला दिया है।