कुमारस्वामी ने मांड्या में 299 दिव्यांगजनों को बाँटे सहायक उपकरण, ₹2.15 करोड़ की CSR पहल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 29 अगस्त 2026 को मांड्या के अंबेडकर भवन में 299 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित किए। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (ALIMCO) की CSR पहल के तहत वितरित इन उपकरणों का कुल मूल्य ₹50 लाख बताया गया। यह कार्यक्रम इस्पात मंत्रालय की उस व्यापक CSR श्रृंखला का हिस्सा था, जिसमें मांड्या जिले में कुल ₹2.15 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास हुआ।
वितरित सहायक उपकरण
लाभार्थियों को बैटरी-चालित तिपहिया साइकिलें, कृत्रिम अंग, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक साधन प्रदान किए गए। कुमारस्वामी ने कहा, 'दिव्यांग व्यक्तियों को सहानुभूति की आवश्यकता नहीं है — उन्हें गरिमा और आत्मसम्मान से भरा जीवन जीने के अवसर मिलने चाहिए। उन्हें समान अवसर भी मिलने चाहिए और हर किसी का उनके प्रति उत्तरदायित्व है।' मंत्री ने यह भी स्मरण कराया कि जब वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था बनाई थी जिससे दिव्यांगजन सीधे विधान सौधा तक अपनी बात पहुँचा सकते थे।
MIMS में डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का उद्घाटन
कुमारस्वामी ने मांड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (MIMS) में एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली का उद्घाटन किया। यह सुविधा भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के ₹1 करोड़ के CSR अनुदान से स्थापित की गई है। गौरतलब है कि BHEL इस्पात मंत्रालय के अधीन आने वाला सार्वजनिक उपक्रम है, जिससे यह पहल मंत्रालय की सामाजिक दायित्व नीति के अनुरूप है।
हलाली स्कूल और शहरी कॉलेज में शिक्षा निवेश
मंत्री ने हलाली गाँव के सरकारी स्कूल में आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील (AM/NS India) की CSR पहल के तहत ₹32.50 लाख की लागत से निर्मित दो सुसज्जित कक्षाओं का उद्घाटन किया। इसी कंपनी के ₹32.50 लाख के अनुदान से मांड्या शहर के पूर्व नगर पालिका महाविद्यालय में दो नई कक्षाओं की आधारशिला भी रखी गई। कुमारस्वामी ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और केंद्र सरकार स्कूलों व कॉलेजों को गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठा रही है।'
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत सहायक उपकरणों की माँग और आपूर्ति के बीच की खाई को पाटने की ज़रूरत लगातार महसूस की जा रही है। ₹2.15 करोड़ की समग्र CSR राशि मांड्या जैसे अर्ध-शहरी जिले के लिए उल्लेखनीय है, हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि एकबारगी वितरण शिविरों की तुलना में दीर्घकालिक पुनर्वास सेवाओं की आवश्यकता अधिक है। आगे की परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।