क्या ईरान में अशांति के पीछे अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है? अब्बास अराघची का दावा
सारांश
Key Takeaways
- ईरान में चल रहे प्रदर्शनों के पीछे अमेरिकी और इजरायली हस्तक्षेप का आरोप।
- अब्बास अराघची के अनुसार, ईरान के पास कई सबूत हैं।
- प्रदर्शन के दौरान कई हथियारबंद लोग शामिल थे।
- आतंकवादी गतिविधियों में अमेरिका और इजरायल का हाथ होना बताया गया।
- ईरान में सुरक्षा बलों और आम लोगों के बीच झड़पें हुईं।
नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ईरान में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच, अमेरिका और ईरान के बीच आरोपों का खेल जारी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को तेहरान में विदेशी डिप्लोमैट्स के साथ बैठक में यह आरोप लगाया कि ईरान के वर्तमान संकट के पीछे अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है।
ईरान में हिंसा के आरंभ होने के बाद, अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुँचाया, तो अमेरिकी सेना ईरान पर हमला कर सकती है। अराघची ने बैठक में कहा कि ईरान के पास कई सबूत हैं, जो दर्शाते हैं कि देश में हाल की अशांति में अमेरिका और इजरायल की महत्वपूर्ण भूमिका है।
यह बयान तब आया है जब प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच हिंसक झड़पों में कई लोगों की जानें गई हैं। देशभर में कई मस्जिदों, मेडिकल सेंटरों और अन्य इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया है। अराघची के अनुसार, यह विद्रोह इस हद तक बढ़ गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सैन्य हस्तक्षेप का बहाना मिल सके।
उन्होंने कहा, "हमारे पास ईरान में हाल के दिनों में हुए आतंकवादी कार्रवाइयों के संबंध में अमेरिका और इजरायल के शामिल होने के कई दस्तावेज और सबूत हैं।"
अराघची ने कहा, "प्रदर्शन के दौरान कुछ हथियारबंद लोग भी नजर आए। तेहरान के पास ऐसे ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड हैं, जिनमें कथित तौर पर आतंकवादी गुर्गों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने, सुरक्षा बलों को निशाना बनाने और आम नागरिकों पर हमला करने के निर्देश दिए गए थे।"
उन्होंने आगे कहा कि "मारे गए कई लोगों को पीछे से गोलियां लगीं। तेहरान के पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि कुछ गुर्गों को विदेशी ताकतों से सीधे आदेश मिले थे। यह सबूत स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि इन आतंकवादी कार्यों में अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है।"
अराघची ने यह भी दावा किया कि घुसपैठियों को इजराइल की मोसाद इंटेलिजेंस एजेंसी ने मदद की थी। उन्होंने कहा कि फारसी बोलने वाले मोसाद के गुर्गों ने इन विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ की थी।