क्या तेजस्वी यादव को कोई गंभीरता से लेता है?: जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार
सारांश
Key Takeaways
- तेजस्वी यादव के बयानों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा।
- नीरज कुमार ने उनके मानसिक भ्रमित होने की बात की।
- राजद को अगले 100 दिनों तक बिहार में रहना चाहिए।
- भारत रत्न का पुरस्कार उपलब्धियों पर आधारित होता है।
- राजनीतिक बयानबाजी में जिम्मेदारी जरूरी है।
पटना, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव पर तीखा प्रहार किया।
सोमवार को राष्ट्र प्रेस से बातचीत में नीरज कुमार ने कहा कि आज के दौर में राजनीतिक और मीडिया जगत में तेजस्वी यादव के बयानों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है। उनका कहना था कि तेजस्वी यादव के बयान केवल जनता को भ्रमित करने के लिए होते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि तेजस्वी यादव की स्थिति ऐसी बन गई है कि वह अपने मुद्दों से भाग रहे हैं, जिससे वह अपनी जिम्मेदारियों से बच रहे हैं। तेजस्वी ने गंभीर मुद्दों पर स्पष्टीकरण देने से बचने का प्रयास किया है। राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा 'क्रिमिनल पॉलिटिकल सिडिंकेट' का लांछन लगाया गया है, और रोहिणी आचार्या ने जो आरोप लगाए, उस पर तेजस्वी यादव ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। अगर वे बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की जीत को अपनी जीत बता रहे हैं, तो वह राजद के विधायकों से इस्तीफा क्यों नहीं लेते?
नीरज कुमार ने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव के बयानों से यह स्पष्ट है कि वे अब मानसिक रूप से भ्रमित हो चुके हैं। इसलिए, आज के समय में उन्हें कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि तेजस्वी यादव को अगले 100 दिनों तक बिहार में रहना चाहिए और राजद को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे 100 दिनों तक बिहार में बने रहें। लेकिन उन्हें पता है कि ऐसा नहीं होगा।
नीरज कुमार ने कहा कि तेजस्वी यादव अपने बयानों के कारण अक्सर सवालों के घेरे में आ जाते हैं। आपको याद होगा कि जब कांग्रेस मनरेगा पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में थी, तब उसने राजद को अपने खेमे में शामिल करने की जरूरत महसूस नहीं की। इस स्थिति में यह समझना आसान है कि आज के समय में लोग उन्हें कितनी गंभीरता से लेते हैं।
इसके अलावा, जदयू प्रवक्ता ने राजद सांसद सुरेंद्र यादव के वायरल वीडियो पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि तेजस्वी यादव जिस समीकरण की राजनीति करते थे, उस समीकरण के लोग अब उन पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुरेंद्र यादव इसके लिए मतदाताओं को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेजप्रताप यादव द्वारा अपने पिता लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न देने की मांग पर नीरज कुमार ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि अगर कोई पुत्र अपने पिता के लिए भारत रत्न की मांग करता है, तो यह अचरज की बात नहीं है, लेकिन अगर तेजप्रताप 'कैदी रत्न' की मांग करते, तो यह अधिक उपयुक्त होता। इससे एक नया पुरस्कार भी बन सकता है। यदि तेजप्रताप ऐसा कर पाते हैं, तो उनकी एंट्री भी राजद में हो जाएगी और मुझे पूरा विश्वास है कि उनका कद तेजस्वी यादव से बढ़ जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि भारत रत्न देश का एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है, जो किसी व्यक्ति की उपलब्धियों के आधार पर दिया जाता है, और इसका निर्णय केंद्र सरकार करती है, न कि किसी विशेष व्यक्ति का।
उन्होंने ओवैसी के संदर्भ में देवकीनंदन द्वारा दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कौन क्या बयान देता है, यह उनके व्यक्तिगत विचार से प्रेरित हो सकता है। हमें यह ध्यान रखना होगा कि किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति जनादेश के आधार पर किसी पद पर आता है, न कि वस्त्र या टीका के आधार पर।
जदयू प्रवक्ता ने अपील की कि वे ऐसे बयानों से बचें, क्योंकि इससे कोई लाभ नहीं होगा। बांग्लादेश में जनसंख्या के आंकड़े बताते हैं कि वहां केवल 12 प्रतिशत हिंदू हैं, जो अपनी जीविका के लिए नौकरी पर निर्भर हैं। ऐसी स्थिति में यदि आप इस तरह के विवादित बयान देते हैं, तो इससे बांग्लादेश में रह रहे हमारे हिंदू भाइयों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। बांग्लादेश या पाकिस्तान भारत से अलग हुए थे, और यह दुर्भाग्य की बात है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में हमारे हिंदू भाइयों की सुरक्षा खतरे में है, और हम यहां राजनीतिक रूप से प्रेरित होकर बेबुनियादी बयान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मेरा ओवैसी से सवाल है कि क्या उनकी पार्टी में केवल इस्लाम धर्म मानने वाले लोगों को ही स्थान दिया जाता है? क्या वे अपनी पार्टी में लोगों से उनका धर्म पूछकर उन्हें शामिल करते हैं? मैं लोगों से यही अपील करूंगा कि वे ओवैसी जैसे लोगों के बयानों को गंभीरता से न लें।