ललितपुर बनेगा UP का पहला नेचुरल फार्मिंग डिस्ट्रिक्ट, गोशालाएँ बनेंगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ललितपुर को प्रदेश के पहले पायलट नेचुरल फार्मिंग डिस्ट्रिक्ट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विचार शुरू किया है। इस पहल के तहत गोशालाओं को केवल गोवंश संरक्षण के केंद्र की बजाय किसानों की आर्थिक समृद्धि और ग्रामीण उद्यमिता की नई धुरी बनाने की योजना है। 19 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में इस मॉडल की रूपरेखा पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अधिकारियों के बीच हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) और कृषि विज्ञान केंद्रों के तकनीकी सहयोग से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि यह पूरी कवायद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न के अनुरूप शुरू की गई है।
गोशालाओं में उपलब्ध गोबर एवं अन्य जैविक संसाधनों से प्राकृतिक खाद, जैविक कीट नियंत्रक, वर्मी कम्पोस्ट, गो-काष्ठ और पंचगव्य आधारित उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इन उत्पादों को स्थानीय किसानों तक पहुँचाने की संगठित व्यवस्था विकसित करने की योजना है, जिससे गोशालाओं को आय के नए स्रोत मिलेंगे और किसानों को स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक खेती के संसाधन उपलब्ध होंगे।
ललितपुर पायलट मॉडल की विशेषताएँ
प्रस्तावित मॉडल में ललितपुर जिले की समस्त गोशालाओं, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और ग्रामीण उद्यमियों को एक संगठित आर्थिक व्यवस्था से जोड़ने की योजना है। इस व्यवस्था में प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक संसाधनों के उत्पादन से लेकर कृषि उपज की बिक्री तक की समस्त गतिविधियाँ परस्पर जुड़ी होंगी।
कृषि उत्पादों के संग्रहण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन की संगठित व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रहने देकर उनके उत्पादों का मूल्यवर्धन करना और बेहतर बाज़ार उपलब्ध कराना है।
ऊर्जा उत्पादन और आत्मनिर्भरता
गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रस्तावित मॉडल में ऊर्जा उत्पादन को भी शामिल करने पर विचार किया गया है। उपयुक्त गोशालाओं में गोबर आधारित बायोगैस और कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्र स्थापित करने की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं। इससे गोबर का उपयोग खाद और अन्य उत्पादों के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन में भी किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार भी देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग राज्यों में पायलट कार्यक्रम चला रही है। उत्तर प्रदेश में गोशालाओं और कृषि को एक साथ जोड़ने वाला यह मॉडल अपनी तरह का एक नया प्रयोग है।
वित्तीय और तकनीकी सहयोग
नाबार्ड के सहयोग से किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, संयुक्त देयता समूहों और पात्र किसानों के लिए ऋण, वित्तीय सहायता और क्षमता विकास की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, उपकार और कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से किसानों और गोशाला संचालकों को वैज्ञानिक पद्धतियों पर तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से ग्रामीण स्तर पर छोटे उद्यमों और स्वरोज़गार की संभावनाएँ भी बढ़ने की उम्मीद है।
आगे क्या होगा
ललितपुर में इस पायलट प्रयोग के अनुभवों के आधार पर प्रदेश के प्रत्येक मंडल के एक जनपद में चरणबद्ध तरीके से इस व्यवस्था को विस्तारित करने की संभावना पर मंथन जारी है। अभी यह पूरी पहल योजना और विचार-विमर्श के चरण में है; अंतिम निर्णय और क्रियान्वयन की समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है। इस पूरी पहल के ज़रिए गोवंश संरक्षण, प्राकृतिक खेती, ग्रामीण उद्यमिता और बाज़ार व्यवस्था को परस्पर जोड़कर गोशालाओं और किसानों की आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक नया रास्ता तैयार करने का प्रयास है।