29 अक्टूबर 2026
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लेखक गांव इंटरनेशनल फेस्टिवल 2026 संपन्न, सीएम धामी बोले — उत्तराखंड बना साहित्य-कला का वैश्विक केंद्र

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लेखक गांव इंटरनेशनल फेस्टिवल 2026 संपन्न, सीएम धामी बोले — उत्तराखंड बना साहित्य-कला का वैश्विक केंद्र

सारांश

देहरादून में पाँच दिवसीय 'लेखक गांव इंटरनेशनल फेस्टिवल 2026' का समापन हुआ, जिसमें 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सीएम धामी ने इसे उत्तराखंड को वैश्विक साहित्यिक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।

मुख्य बातें

लेखक गांव इंटरनेशनल फेस्टिवल 2026 का समापन 29 अक्टूबर 2026 को देहरादून में हुआ।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समापन समारोह में कहा कि 'लेखक गांव' अब साहित्य, कला और संगीत का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
इस पाँच दिवसीय महोत्सव में 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया, जिनके कार्यकाल में उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था।
'लेखक गांव' को उत्तराखंड को विश्व के साहित्यिक मानचित्र पर स्थापित करने का माध्यम बताया गया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को देहरादून में आयोजित 'लेखक गांव इंटरनेशनल फेस्टिवल 2026' के समापन समारोह में शामिल हुए और कहा कि 'लेखक गांव' अब साहित्य, कला और संगीत के एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है। 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी वाले इस पाँच दिवसीय महोत्सव का समापन रचनात्मक विचार-विमर्श और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की एक नई यात्रा के शुभारंभ के रूप में हुआ।

मुख्यमंत्री धामी का संबोधन

समापन सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 'लेखक गांव' की अवधारणा को परिभाषित करते हुए कहा कि यह महज ईंट-पत्थरों की संरचना नहीं है, बल्कि 'विचारों की साधना स्थली' है जहाँ शब्द बीज बनकर अंकुरित होते हैं। उन्होंने कहा, 'यहां संस्कृति हमारी पहचान को संवारने का काम करती है।' धामी ने इस महोत्सव के समापन को किसी कार्यक्रम का अंत नहीं, बल्कि 'रचनात्मकता की एक नई यात्रा की शुरुआत' बताया।

अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को विशेष रूप से स्मरण किया, जिनके कार्यकाल में उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था। उन्होंने कहा कि वाजपेयी जी 'शब्दों के साधक' थे और उनकी वाणी में माँ सरस्वती का वास था। धामी के अनुसार, 'उनके अंदर गंगा जैसी गहराई और हिमालय जैसी ऊँचाई थी। अगर आज वह हमारे बीच सशरीर होते तो लेखक गांव की कल्पना को देखकर काफी प्रफुल्लित होते।' उन्होंने यह भी कहा कि अटल जी ने सिखाया कि 'शब्द भी राष्ट्र निर्माण के लिए शस्त्र बन सकते हैं।'

महोत्सव की भागीदारी और स्वरूप

इस अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न माध्यमों से भाग लिया। पाँच दिनों तक चले इस आयोजन में साहित्य, कला और संस्कृति पर केंद्रित अनेक सत्र आयोजित हुए, जिनमें भारत और विश्व के विद्वानों, कलाकारों एवं साहित्यकारों ने अपने विचार साझा किए। यह आयोजन स्थानीय प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने का भी अवसर बना।

उत्तराखंड को वैश्विक साहित्यिक मानचित्र पर स्थान

मुख्यमंत्री ने कहा कि 'लेखक गांव' उत्तराखंड जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य को विश्व के साहित्यिक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह आयोजन न केवल स्थानीय कलाकारों और साहित्यकारों को मंच देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनकी जड़ों से जोड़ने और उन्हें सही दिशा में प्रेरित करने का माध्यम भी बनता है। गौरतलब है कि उत्तराखंड पहले से ही पर्यटन और आध्यात्म के क्षेत्र में वैश्विक पहचान रखता है, और 'लेखक गांव' इस छवि में सांस्कृतिक-साहित्यिक आयाम जोड़ रहा है।

आगे की राह

समापन समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने इस महोत्सव को एक सतत सांस्कृतिक आंदोलन का हिस्सा बताया। मुख्यमंत्री धामी ने संकेत दिए कि 'लेखक गांव' का यह अंतरराष्ट्रीय स्वरूप आगे भी बनाए रखा जाएगा, ताकि उत्तराखंड वैश्विक साहित्यिक और सांस्कृतिक विमर्श में अपनी उपस्थिति और मज़बूत कर सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह देखना ज़रूरी होगा कि यह नेटवर्क साल-दर-साल कितना गहरा होता है। उत्तराखंड के पास सांस्कृतिक पूँजी की कोई कमी नहीं है, परंतु उसे वैश्विक साहित्यिक पहचान में बदलने के लिए निरंतर संस्थागत निवेश और स्थानीय लेखकों को मुख्यधारा में लाने की ठोस योजना अनिवार्य है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेखक गांव इंटरनेशनल फेस्टिवल 2026 क्या है?
यह देहरादून, उत्तराखंड में आयोजित एक पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव है, जिसमें 60 से अधिक देशों के साहित्यकारों, कलाकारों और विद्वानों ने भाग लिया। इसका समापन 29 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में हुआ।
लेखक गांव फेस्टिवल में कितने देशों ने भाग लिया?
इस महोत्सव में 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न माध्यमों से हिस्सा लिया। भारत और विश्व के अनेक विद्वानों और साहित्यकारों ने साहित्य व कला पर अपने विचार साझा किए।
सीएम धामी ने 'लेखक गांव' के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 'लेखक गांव' केवल ईंट-पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि 'विचारों की साधना स्थली' है। उन्होंने इसे उत्तराखंड को विश्व के साहित्यिक मानचित्र पर स्थापित करने और युवा पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम बताया।
धामी ने अटल बिहारी वाजपेयी को क्यों याद किया?
मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को इसलिए स्मरण किया क्योंकि उन्हीं के कार्यकाल में उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था। उन्होंने वाजपेयी को 'शब्दों का साधक' बताते हुए कहा कि यदि वे आज होते तो 'लेखक गांव' की कल्पना देखकर प्रफुल्लित होते।
'लेखक गांव' उत्तराखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
'लेखक गांव' स्थानीय कलाकारों और साहित्यकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच देता है और उत्तराखंड को एक सांस्कृतिक-साहित्यिक केंद्र के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक है। यह आयोजन राज्य की पर्यटन और आध्यात्मिक छवि में साहित्यिक आयाम जोड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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