मध्य प्रदेश: सीएम मोहन यादव ने दी किसानों को उर्वरक चयन की स्वतंत्रता, ई-विकास 2.0 लागू
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 अगस्त 2026 को घोषणा की कि प्रदेश के किसान अब अपनी आवश्यकता के अनुसार कोई भी एक उर्वरक बिना किसी अनिवार्य संयोजन के खरीद सकेंगे। शिवपुरी जिले की कृषि उपज मंडी, पिपरसमा में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित करते हुए उन्होंने ई-विकास 2.0 प्रणाली की शुरुआत का ऐलान किया, जिसे किसानों के लिए अधिक सहज और पारदर्शी बनाया गया है।
ई-विकास 2.0: क्या बदला किसानों के लिए
मुख्यमंत्री यादव ने स्पष्ट किया कि नई ई-विकास 2.0 प्रणाली के तहत किसान अपनी पसंद का कोई भी एक उर्वरक खरीद सकेंगे — उन्हें पहले की तरह अनिवार्य संयोजन (कॉम्बो) लेने की बाध्यता नहीं होगी। यह बदलाव उन किसानों के लिए राहत की बात है जो अक्सर अनचाहे उर्वरक संयोजन खरीदने को मजबूर होते थे।
इसके साथ ही सरकार ने शून्य प्रतिशत ब्याज पर अग्रिम खाद उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, ताकि आर्थिक तंगी किसी भी किसान के लिए खाद खरीदने में बाधा न बने।
फार्मर आईडी अभियान: 20 अगस्त से शुरुआत
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि प्रदेश में फार्मर आईडी बनवाने का अभियान 20 अगस्त से प्रारंभ किया जा चुका है। इस अभियान की खास बात यह है कि किसानों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे — शासकीय दल स्वयं किसानों के घर जाकर उनकी फार्मर आईडी बनाएंगे। यह पहल डिजिटल कृषि पहचान को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ऋण चुकाने की समय-सीमा में बड़ा बदलाव
किसानों को अब तक 31 मार्च तक ऋण की राशि चुकानी अनिवार्य थी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि यह समय-सीमा समाप्त कर दी गई है। अब किसान वर्ष के किसी भी समय अपना ऋण चुका सकेंगे, जिससे उन्हें मौसमी आय के अनुसार भुगतान करने की सुविधा मिलेगी।
विविध कृषि अपनाने की अपील
मुख्यमंत्री यादव ने किसानों से आग्रह किया कि वे केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित न रहें, बल्कि बागवानी, डेयरी फार्मिंग, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में भी कदम रखें। उन्होंने शिवपुरी जिले की मूंगफली की देशव्यापी पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि जिले को 'कृषि का सिरमौर' बनाने का लक्ष्य है।
आगे की राह
ई-विकास 2.0 और फार्मर आईडी अभियान जैसी पहलें मध्य प्रदेश सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में डिजिटल पारदर्शिता लाना और किसानों की आय बढ़ाना है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और ज़मीनी प्रभाव आने वाले खरीफ और रबी सीजन में स्पष्ट होगा।