मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव: जीतू पटवारी का खुला पत्र, भाजपा पर जनादेश की खरीद-फरोख्त का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 9 जून को प्रदेश की जनता के नाम एक खुला पत्र लिखकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर लोकतांत्रिक जनादेश को 'खरीद-फरोख्त का बाज़ार' बनाने का आरोप लगाया है। पटवारी ने कहा कि भाजपा का यह कदम लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है।
पटवारी के पत्र में क्या है
पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ओर देशवासियों से त्याग की अपील करते हैं — पेट्रोल-डीजल कम उपयोग करने, सोना कम खरीदने और विदेशी वस्तुओं से परहेज़ करने की सलाह देते हैं — वहीं दूसरी ओर, उनके अनुसार, भाजपा 'लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी' यानी जनता के जनादेश को जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त के व्यापार में बदल रही है।
तीसरे प्रत्याशी पर सवाल
पटवारी ने भाजपा द्वारा राज्यसभा चुनाव में तीसरा प्रत्याशी उतारे जाने पर सीधा निशाना साधा। उनका आरोप है कि मध्य प्रदेश भाजपा ने यह निर्णय अपने राष्ट्रीय नेतृत्व की स्वीकृति और सहमति से लिया है। उन्होंने इसे 'लोकतंत्र विरोधी डबल इंजन द्वारा तैयार किया गया सियासी रंगमंच' बताया। पटवारी ने यह भी कहा कि पहले दो प्रत्याशियों में से एक को पंजाब से लाया गया, जबकि अति पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधि को तीसरे स्थान पर रखा गया — जो उनके अनुसार सामाजिक न्याय के दावों की खोखली बानगी है।
विधायकों की संख्या और कथित जोड़-तोड़ का आरोप
पटवारी ने दावा किया कि विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के हिसाब से भाजपा को तीसरी सीट जीतने के लिए लगभग 10 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की ज़रूरत होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कमी को पूरा करने के लिए 'कमीशन और भ्रष्टाचार से अर्जित काले धन' का उपयोग लोकतंत्र की साख गिराने में किया जाएगा।
कांग्रेस का रुख और उम्मीदवार
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इस चुनाव में 'पूरी दृढ़ता के साथ अपने विचार और संस्कार' के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि पार्टी की ओर से एक संघर्षशील, गांधीवादी महिला उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनके पीछे न धनबल है, न सत्ता का दबाव। पटवारी के अनुसार, उम्मीदवार वर्षों से महिला सम्मान, महिला अधिकार और सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ती रही हैं।
आगे क्या
राज्यसभा की इन तीन सीटों पर मतदान आगामी दिनों में होना है। भाजपा के तीसरे प्रत्याशी की उपस्थिति ने चुनावी समीकरणों को जटिल बना दिया है और कांग्रेस की ओर से लगाए गए ये आरोप चुनाव प्रचार को और तीखा करने वाले हैं। सभी दलों की नज़रें अब उन निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों पर टिकी हैं जो अंतिम परिणाम तय कर सकते हैं।