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मध्य प्रदेश गोकुल धाम नीति 2025: 5,000 गौवंश अनिवार्य, 125 एकड़ शासकीय भूमि का प्रावधान

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मध्य प्रदेश गोकुल धाम नीति 2025: 5,000 गौवंश अनिवार्य, 125 एकड़ शासकीय भूमि का प्रावधान

सारांश

मध्य प्रदेश की गोकुल धाम नीति 2025 गौ-संरक्षण को सरकारी दायित्व से निजी निवेश-आधारित आत्मनिर्भर मॉडल में बदलने का प्रयास है — जहाँ 5,000 गौवंश, 125 एकड़ भूमि और बायो-सीएनजी से पर्यटन तक की व्यावसायिक श्रृंखला एक साथ जोड़ी गई है।

मुख्य बातें

स्वावलंबी गौशाला नीति 2025 (गोकुल धाम) के तहत प्रत्येक परियोजना में न्यूनतम 5,000 गौवंश का पालन अनिवार्य है।
कुल गौवंश में से कम से कम 30% दुधारू नस्ल की गायें होना आवश्यक।
प्रत्येक 5,000 गौवंश पर अधिकतम 125 एकड़ शासकीय भूमि; अतिरिक्त 1,000 गौवंश पर 25 एकड़ और व्यावसायिक गतिविधि के लिए 5 एकड़ अलग से।
निराश्रित गौवंश के लिए प्रतिदिन प्रति पशु ₹40 का सरकारी अनुदान।
नीति में बायो-सीएनजी, जैविक खाद, दुग्ध प्रसंस्करण और पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना शामिल।
राज्यमंत्री लखन पटेल ने 27 मई 2025 को भोपाल में गौसंवर्धन बोर्ड की समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी।

मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने 27 मई 2025 को स्पष्ट किया कि स्वावलंबी गौशाला नीति 2025 (गोकुल धाम स्थापना नीति) के अंतर्गत प्रत्येक परियोजना में न्यूनतम 5,000 गौवंश का पालन अनिवार्य है, जिनमें से कम से कम 30 प्रतिशत दुधारू नस्ल की गायें होना आवश्यक है। मंत्री पटेल ने भोपाल में गौसंवर्धन बोर्ड के कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी दी।

नीति के प्रमुख प्रावधान

नीति के तहत प्रत्येक 5,000 गौवंश की परियोजना के लिए अधिकतम 125 एकड़ शासकीय भूमि उपयोग के अधिकार के आधार पर आवंटित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक 1,000 गौवंश की वृद्धि पर 25 एकड़ अतिरिक्त भूमि का प्रावधान है। व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए अलग से 5 एकड़ भूमि भी दी जा सकेगी।

निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए शासन की मौजूदा नीति के अनुसार प्रति गौवंश प्रतिदिन ₹40 का अनुदान दिया जा रहा है।

नीति का मुख्य उद्देश्य

राज्यमंत्री पटेल ने बताया कि मध्यप्रदेश स्वावलंबी गौशाला (गोकुल धाम) स्थापना नीति 2025 का केंद्रीय लक्ष्य प्रदेश में वृहद स्वावलंबी गौशालाओं का एक सुदृढ़ मॉडल खड़ा करना है। इसके तहत निराश्रित गौवंश को संतुलित आहार, व्यवस्थित आवास और आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही सरकारी बजट पर न्यूनतम भार डालते हुए अधिकाधिक निराश्रित पशुओं का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है।

नीति में पड़त भूमि के विकास और निजी भागीदारी के माध्यम से गौ-उत्पादों के निर्माण व विपणन की एक व्यापक श्रृंखला तैयार करने की परिकल्पना भी शामिल है।

व्यावसायिक एवं ऊर्जा संभावनाएँ

इस नीति के अंतर्गत निजी निवेश और भागीदारी के ज़रिए गोपालन, दुग्ध प्रसंस्करण, जैविक खाद, पंचगव्य, बायो-सीएनजी, औषधि और पर्यटन को प्रोत्साहन दिया जाएगा। गोबर और कृषि अवशेषों से NPK युक्त जैविक खाद तैयार होगी, जिससे मिट्टी की उर्वरता और कृषि उत्पादन में वृद्धि अपेक्षित है।

इसके अलावा बायोगैस, सीएनजी और सोलर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की भी योजना है। प्राकृतिक परिवेश में स्थित गौशालाओं को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी इस नीति का हिस्सा है।

समीक्षा बैठक और अगले कदम

मंत्री पटेल ने बैठक के दौरान नीति के अंतर्गत जारी निविदा में प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। यह नीति प्रदेश में गौ-संरक्षण को एक आत्मनिर्भर और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य मॉडल में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति तेज़ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी व्यवहार्यता कई अनुत्तरित प्रश्नों पर टिकी है — निजी निवेशक 5,000 पशुओं की न्यूनतम सीमा और भूमि-उपयोग की शर्तों को कितना आकर्षक पाएंगे, यह स्पष्ट नहीं है। ₹40 प्रतिदिन का अनुदान वर्तमान पशु-पालन लागत के मुकाबले पर्याप्त है या नहीं, इस पर विशेषज्ञों में मतभेद रहा है। बायो-सीएनजी और पर्यटन जैसे वैकल्पिक राजस्व स्रोतों की सफलता बाज़ार संपर्क और आधारभूत संरचना पर निर्भर होगी, जिसका विवरण अभी नीति में नहीं है। यदि निविदा प्रक्रिया में पर्याप्त निजी भागीदारी नहीं मिली, तो निराश्रित गौवंश की समस्या का बोझ एक बार फिर सरकारी खज़ाने पर ही पड़ेगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वावलंबी गौशाला नीति 2025 (गोकुल धाम) क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार की नीति है जिसका उद्देश्य निजी निवेश के ज़रिए वृहद स्वावलंबी गौशालाएँ स्थापित करना और निराश्रित गौवंश का व्यवस्थित प्रबंधन करना है। इसमें दुग्ध उत्पादन, जैविक खाद, बायो-सीएनजी और पर्यटन जैसी व्यावसायिक गतिविधियाँ एकीकृत की गई हैं।
गोकुल धाम परियोजना के लिए न्यूनतम गौवंश की संख्या कितनी है?
नीति के अनुसार प्रत्येक परियोजना में न्यूनतम 5,000 गौवंश का पालन अनिवार्य है। इनमें से कम से कम 30 प्रतिशत दुधारू नस्ल की गायें होनी चाहिए।
गोकुल धाम के लिए कितनी शासकीय भूमि मिलेगी?
5,000 गौवंश की परियोजना के लिए अधिकतम 125 एकड़ शासकीय भूमि उपयोग के अधिकार पर दी जाएगी। प्रत्येक अतिरिक्त 1,000 गौवंश पर 25 एकड़ और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 5 एकड़ अलग से मिलेगी।
निराश्रित गौवंश के लिए सरकार कितना अनुदान दे रही है?
शासन की मौजूदा नीति के अनुसार निराश्रित गौवंश के लिए प्रतिदिन प्रति पशु ₹40 का अनुदान दिया जा रहा है।
इस नीति से किन क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा?
नीति के तहत गोपालन, दुग्ध प्रसंस्करण, जैविक खाद, पंचगव्य, बायो-सीएनजी, औषधि और पर्यटन को प्रोत्साहन दिया जाएगा। साथ ही सोलर और बायोगैस ऊर्जा संयंत्रों के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा में भी निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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