मद्रास हाई कोर्ट सख्त: वल्ललर सत्य ज्ञान सभा की 30 एकड़ भूमि से अतिक्रमण हटाने पर कुड्डालोर कलेक्टर को 4 हफ्ते का अल्टीमेटम
सारांश
मुख्य बातें
मद्रास उच्च न्यायालय ने 10 अक्टूबर 2026 को कुड्डालोर जिला कलेक्टर को कड़ा निर्देश दिया कि वे वल्ललर सत्य ज्ञान सभा की भूमि पर अतिक्रमण करने वालों का पूरा विवरण हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग को चार सप्ताह के भीतर सौंपें। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि 2024 में ही अतिक्रमणकारियों की पहचान हो जाने के बावजूद विवरण प्रस्तुत न करना अस्वीकार्य है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला कुड्डालोर जिले के वडलूर स्थित प्रसिद्ध वल्ललर तीर्थस्थल पर सत्य ज्ञान सभा की 30 एकड़ भूमि से अतिक्रमण हटाने की माँग से जुड़ी याचिकाओं पर आधारित है। न्यायालय पहले भी अधिकारियों को अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करने और उचित कार्रवाई करने के निर्देश दे चुका था। इसके अलावा, पेरुवेली (विशाल खुले स्थान) पर अतिक्रमण रोकने के लिए चारदीवारी निर्माण का आदेश भी पहले ही दिया जा चुका है।
ताज़ा सुनवाई में क्या हुआ
न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन और न्यायमूर्ति ई. मनोहरन की खंडपीठ के समक्ष हुई ताज़ा सुनवाई में HR&CE विभाग ने अदालत को बताया कि पेरुवेली के चारों ओर बाड़े की दीवार के निर्माण के लिए भूमि सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और निर्माण की अनुमानित लागत प्रतीक्षित है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने अतिक्रमणकारियों का विवरण जिला कलेक्टर से माँगा था, परंतु अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। जिला कलेक्टर के पक्ष ने जानकारी देने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया।
न्यायालय की नाराज़गी और निर्देश
न्यायाधीशों ने जिला कलेक्टर के पक्ष से यह जानना चाहा कि जब अतिक्रमणकारियों की पहचान 2024 में ही हो चुकी थी, तो विवरण सौंपने में इतनी देरी क्यों हुई। इस पर न्यायालय ने जिला कलेक्टर को चार सप्ताह के भीतर अतिक्रमणकारियों का पूरा विवरण HR&CE विभाग को देने का आदेश दिया। साथ ही, विभाग को निर्देश दिया गया कि विवरण मिलते ही संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी कर उचित कार्रवाई की जाए।
पुलिस अधीक्षक को भी तलब किया
न्यायालय ने पेरुवेली के चारों ओर पहले लगाई गई बाड़ को हुए नुकसान की जाँच में कोई प्रगति न होने पर गहरी नाराज़गी जताई। इस पर कुड्डालोर के पुलिस अधीक्षक को मामले में प्रतिवादी बनाने का आदेश दिया गया और उन्हें 5 नवंबर 2026 तक जाँच की स्थिति पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया। गौरतलब है कि यह मामला धार्मिक स्थलों की सरकारी भूमि सुरक्षा की व्यापक चुनौती को उजागर करता है।
आगे क्या होगा
HR&CE आयुक्त को पेरुवेली की बाड़ निर्माण की दिशा में उठाए गए कदमों पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया गया है। अदालत की सख्ती से स्पष्ट है कि अगली सुनवाई में यदि विवरण और रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं हुई, तो संबंधित अधिकारियों को और कड़े परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।