7 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मद्रास हाई कोर्ट ने पूर्व मंत्री ईवी वेलू को रेत खनन मामले में अंतरिम राहत देने से किया इनकार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मद्रास हाई कोर्ट ने पूर्व मंत्री ईवी वेलू को रेत खनन मामले में अंतरिम राहत देने से किया इनकार

सारांश

मद्रास हाई कोर्ट ने DMK के पूर्व मंत्री ईवी वेलू और उनके पुत्र को मलप्पामबाड़ी झील से कथित अवैध रेत खनन मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। 45 लाख से अधिक घन फीट रेत निकालने और ₹8.22 करोड़ के सरकारी नुकसान का आरोप है। DVAC को 6 नवंबर तक जवाब देना है।

मुख्य बातें

मद्रास हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को पूर्व मंत्री ईवी वेलू और पुत्र ईवी कुमारन की अंतरिम राहत याचिका खारिज की।
मामला तिरुवनमलाई की मलप्पामबाड़ी झील से 45,72,058 घन फीट रेत के कथित अवैध उत्खनन से जुड़ा है।
शिकायत के अनुसार सरकारी खजाने को ₹8.22 करोड़ का नुकसान हुआ।
DVAC को 6 नवंबर 2026 तक अदालत में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
एफआईआर 24 सितंबर को दर्ज हुई; यह वेलू के खिलाफ DVAC का दूसरा मामला है।
वेलू और कुमारन दोनों ने किसी भी संलिप्तता से इनकार किया है।

मद्रास हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री ईवी वेलू और उनके पुत्र ईवी कुमारन की अंतरिम राहत की याचिका खारिज कर दी। यह मामला तिरुवनमलाई जिले की मलप्पामबाड़ी झील से कथित अवैध रेत खनन से जुड़ा है, जिसमें सरकारी खजाने को ₹8.22 करोड़ का नुकसान होने का आरोप लगाया गया है।

क्या है मुख्य मामला

न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने पिता-पुत्र की एकतरफा अंतरिम रोक की याचिका को नामंजूर करते हुए सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-विरोधी निदेशालय (DVAC) को 6 नवंबर 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। दोनों ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर 24 सितंबर को दर्ज एफआईआर को रद्द करने की माँग की थी।

आरोपों की पृष्ठभूमि

शिकायतकर्ता अरप्पोर इयक्कम के जयराम वेंकटेशन के अनुसार, 14 दिसंबर 2025 को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के उत्तर क्षेत्र युवा विंग सम्मेलन के आयोजन स्थल को समतल करने के लिए मलप्पामबाड़ी झील से 45,72,058 घन फीट रेत निकाली गई। शिकायत के अनुसार, यह रेत उस कंपनी की भूमि को समतल करने के लिए इस्तेमाल की गई जिसमें कुमारन निदेशक के पद पर हैं। कथित खुदाई नवंबर 2025 के आसपास हुई बताई गई है।

आरोपियों का पक्ष

विधानसभा में DMK के वर्तमान व्हिप 76 वर्षीय वेलू और 48 वर्षीय कुमारन ने किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया है। वेलू ने अपनी याचिका में यह तर्क दिया कि यह एफआईआर मई 2026 में TVK सरकार के सत्ता में आने के बाद दर्ज की गई — जिसे उन्होंने राजनीतिक मंशा का संकेत बताया। यह DVAC की ओर से उनके खिलाफ दूसरा मामला है, जबकि पहला राजमार्ग निर्माण से संबंधित मुकदमा पहले से न्यायालय में विचाराधीन है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में रेत खनन विवाद लंबे समय से राजनीतिक और पर्यावरणीय विमर्श के केंद्र में रहा है। गौरतलब है कि आठ एकड़ में फैली मलप्पामबाड़ी झील की कथित खुदाई ने स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को हुए नुकसान को लेकर भी चिंताएँ उठाई हैं। कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालत का यह रुख दर्शाता है कि प्रथम दृष्टया मामला सुनवाई योग्य माना गया है।

आगे की कार्रवाई

DVAC को 6 नवंबर 2026 तक अपना जवाब दाखिल करना है, जिसके बाद अदालत आगे की सुनवाई करेगी। मामले का परिणाम तमिलनाडु की राजनीति और रेत खनन नीति दोनों पर व्यापक असर डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही के बीच की रेखा पर सवाल उठाता है। वेलू का यह तर्क कि मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है, ध्यान देने योग्य है, लेकिन 45 लाख घन फीट रेत की कथित खुदाई और ₹8.22 करोड़ के नुकसान के आरोप की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। तमिलनाडु में रेत खनन माफिया दशकों से राजनीतिक संरक्षण के साये में फला-फूला है — असली परीक्षा यह है कि DVAC की जाँच तथ्यों पर आधारित रहती है या राजनीतिक दबाव में आकार लेती है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाई कोर्ट ने ईवी वेलू को अंतरिम राहत क्यों नहीं दी?
न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने एकतरफा अंतरिम रोक की याचिका खारिज करते हुए DVAC को 6 नवंबर 2026 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को सुनवाई योग्य माना, इसलिए तत्काल राहत देने से इनकार किया।
ईवी वेलू पर रेत खनन मामले में क्या आरोप हैं?
आरोप है कि नवंबर 2025 के आसपास तिरुवनमलाई जिले की मलप्पामबाड़ी झील से 45,72,058 घन फीट रेत निकाली गई, जिससे सरकारी खजाने को ₹8.22 करोड़ का नुकसान हुआ। यह रेत कथित तौर पर उस कंपनी की जमीन को समतल करने के लिए इस्तेमाल हुई जिसमें वेलू के पुत्र कुमारन निदेशक हैं।
अरप्पोर इयक्कम कौन है और उन्होंने शिकायत क्यों दर्ज कराई?
अरप्पोर इयक्कम तमिलनाडु का एक नागरिक समाज संगठन है जो भ्रष्टाचार-विरोधी मुद्दों पर सक्रिय रहता है। संगठन के जयराम वेंकटेशन ने DVAC में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर 24 सितंबर को एफआईआर दर्ज हुई।
ईवी वेलू का राजनीतिक पक्ष क्या है?
76 वर्षीय वेलू वर्तमान में तमिलनाडु विधानसभा में DMK के व्हिप हैं और पूर्व में राज्य मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने इस एफआईआर को TVK सरकार के सत्ता में आने के बाद राजनीतिक दबाव में दर्ज किया गया बताया है और किसी भी संलिप्तता से इनकार किया है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
DVAC को 6 नवंबर 2026 तक मद्रास हाई कोर्ट में जवाब दाखिल करना है, जिसके बाद अगली सुनवाई होगी। अदालत का अंतिम निर्णय एफआईआर रद्द होने या मामले की जाँच जारी रहने के बारे में स्पष्टता देगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले