महाराष्ट्र एटीएस की 5 जगहों पर छापेमारी, संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय व्हाट्सऐप ग्रुप की जांच तेज़
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को लगातार दूसरे दिन एक संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ी जांच जारी रखते हुए महाराष्ट्र में पांच अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की और कई लोगों से पूछताछ की। एजेंसी को इस ग्रुप में पाकिस्तान और खाड़ी देशों सहित कई देशों के सदस्यों के शामिल होने की जानकारी मिली है।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, महाराष्ट्र ATS इस व्हाट्सऐप ग्रुप की बातचीत और उसके सदस्यों की गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश में है कि क्या इस ग्रुप का संबंध किसी संदिग्ध या गैरकानूनी गतिविधि से है। जांच में यह भी सामने आया है कि ग्रुप में धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग भी सदस्य के रूप में शामिल थे और ग्रुप में धार्मिक विषयों पर चर्चा होती थी।
गौरतलब है कि इस जांच की शुरुआत सोमवार को हुई थी, जब ATS ने रत्नागिरी जिले के राजापुर में रहने वाले एक शिक्षक से कई घंटों तक पूछताछ की थी। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया और जांच आगे बढ़ाई गई।
हिज्बुल मुजाहिदीन से संभावित कड़ी
एजेंसी को कथित तौर पर यह संदेह है कि इस व्हाट्सऐप ग्रुप का संबंध प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन से हो सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक इस संबंध को साबित करने वाला कोई ठोस सबूत या जानकारी सामने नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा एजेंसियां देशभर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र बनाए हुए हैं।
जांचकर्ताओं के अनुसार, ग्रुप में अलग-अलग देशों के सदस्य शामिल थे, जिनमें पाकिस्तान और खाड़ी देशों के नागरिक भी कथित तौर पर हैं। एजेंसी इन सदस्यों की पहचान और उनके बीच हुई बातचीत के स्वरूप को समझने का प्रयास कर रही है।
जांच की मौजूदा स्थिति
अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच अभी भी जारी है और जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, वैसे-वैसे और तथ्य उजागर होंगे। महाराष्ट्र ATS ने अभी तक किसी को औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया है। एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों और ग्रुप में हुई बातचीत के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
यह जांच महाराष्ट्र में आतंकवाद-रोधी एजेंसी की उस व्यापक सतर्कता का हिस्सा है जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय संपर्क वाले संदिग्ध ऑनलाइन नेटवर्क की निगरानी की जाती है।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दायरे को और विस्तृत किया जा सकता है। यदि ग्रुप और किसी आतंकी संगठन के बीच ठोस संबंध स्थापित होता है, तो औपचारिक गिरफ्तारियां और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल एजेंसी सभी पहलुओं की जांच कर रही है और अगले कुछ दिनों में और जानकारी सामने आने की संभावना है।