14 जुलाई 2026
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महाराष्ट्र ATS की सोलापुर में बड़ी कार्रवाई: तीन पर ₹126 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन और पाकिस्तानी संपर्क का आरोप

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महाराष्ट्र ATS की सोलापुर में बड़ी कार्रवाई: तीन पर ₹126 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन और पाकिस्तानी संपर्क का आरोप

सारांश

महाराष्ट्र ATS ने सोलापुर के तीन लोगों पर शिकंजा कसा है — फर्जी चैरिटी के ज़रिए ₹10 करोड़ 50 लाख की कथित फंडिंग, पाकिस्तान के 70 से अधिक नंबर और चार संदिग्ध व्हाट्सएप ग्रुप। कुल ₹126 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन ने इस मामले को महाराष्ट्र की आतंकी वित्तपोषण जांच में अहम बना दिया है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र ATS ने सोलापुर के तीन व्यक्तियों के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय संगठन और पाकिस्तानी नागरिकों से कथित संबंध के आरोप में कार्रवाई की।
जांच में ₹126 करोड़ के कुल संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला है।
आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी चैरिटी संगठन के माध्यम से ₹10 करोड़ 50 लाख अंतरराष्ट्रीय संगठन को भेजे।
मोबाइल फोन डेटा में पाकिस्तान के 70 से अधिक संपर्क नंबर और चार संदिग्ध व्हाट्सएप समूह मिले।
अदालत ने एक आरोपी की जमानत याचिका और दो की अग्रिम जमानत याचिकाएँ खारिज कर दीं।
ATS को आशंका है कि भेजा गया धन आतंकी गतिविधियों में उपयोग हुआ हो सकता है; जांच जारी है।

महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने 14 जुलाई 2026 को सोलापुर के तीन व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए उन पर एक अंतरराष्ट्रीय संगठन तथा पाकिस्तानी नागरिकों से कथित वित्तीय संबंध रखने का आरोप लगाया है। जांच में ₹126 करोड़ के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चलने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

मुख्य घटनाक्रम

सोलापुर के मुख्य सरकारी अभियोजक प्रदीप सिंह राजपूत के अनुसार, प्राथमिक जांच में यह तथ्य उभरा है कि तीनों आरोपियों ने एक फर्जी चैरिटी संगठन का पंजीकरण कराकर उसके माध्यम से कथित तौर पर ₹10 करोड़ 50 लाख का लेनदेन किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह धनराशि सोलापुर के स्थानीय नागरिकों से विभिन्न माध्यमों से एकत्र की गई और बाद में संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठन को भेजी गई।

मोबाइल डेटा में चौंकाने वाले खुलासे

जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में पाकिस्तान के 70 से अधिक व्यक्तियों के संपर्क नंबर पाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, आरोपी चार व्हाट्सएप समूहों से भी जुड़े हुए थे, जिनकी सामग्री की गहन जांच जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा एजेंसियाँ सीमा-पार वित्तपोषण के नेटवर्क पर विशेष नज़र रख रही हैं।

अदालत का सख्त रुख

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। गिरफ्तार एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है, जबकि अन्य दो आरोपियों द्वारा दायर अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) याचिकाएँ भी अदालत ने नामंजूर कर दी हैं। गौरतलब है कि ऐसे मामलों में अदालतों का यह रुख जांच की गंभीरता को रेखांकित करता है।

ATS की आशंका और जांच का दायरा

ATS का कहना है कि इस मामले में कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय संगठन को भेजे गए धन का उपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए किए जाने की आशंका है। फिलहाल जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन के पूरे नेटवर्क, विदेशी संपर्कों और कथित संगठन की गतिविधियों की विस्तृत पड़ताल कर रही है।

आगे क्या होगा

ATS सूत्रों के अनुसार, मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है। ₹126 करोड़ के कुल संदिग्ध लेनदेन की परतें खोलने के लिए वित्तीय अन्वेषण एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। यह मामला महाराष्ट्र में आतंकी वित्तपोषण के खिलाफ ATS की हालिया कार्रवाइयों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन फर्जी धर्मार्थ संगठनों के ज़रिए आतंकी वित्तपोषण का यह कथित मॉडल नया नहीं है और इस पर व्यापक नीतिगत जवाब की दरकार है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र ATS ने सोलापुर में किस मामले में कार्रवाई की?
महाराष्ट्र ATS ने सोलापुर के तीन व्यक्तियों पर एक अंतरराष्ट्रीय संगठन और पाकिस्तानी नागरिकों से कथित वित्तीय संबंध रखने के आरोप में कार्रवाई की है। जांच में ₹126 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है।
सोलापुर के आरोपियों पर फंडिंग का कितना आरोप है?
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने फर्जी चैरिटी संगठन के माध्यम से कथित तौर पर ₹10 करोड़ 50 लाख अंतरराष्ट्रीय संगठन को भेजे। कुल संदिग्ध लेनदेन ₹126 करोड़ का बताया गया है।
आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अदालत ने क्या फैसला सुनाया?
अदालत ने गिरफ्तार एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है और दो अन्य आरोपियों की अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) याचिकाएँ भी नामंजूर कर दी हैं।
मोबाइल फोन जांच में क्या सामने आया?
आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में पाकिस्तान के 70 से अधिक व्यक्तियों के संपर्क नंबर मिले हैं। इसके अलावा आरोपी चार संदिग्ध व्हाट्सएप समूहों से भी जुड़े पाए गए, जिनकी सामग्री की जांच जारी है।
ATS इस मामले में आतंकी कनेक्शन क्यों मान रही है?
ATS का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संगठन को भेजे गए धन का उपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए किए जाने की आशंका है। इसी आधार पर मामले की गहन जांच की जा रही है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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