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अमरावती में सीएसआर फंड के नाम पर ₹51 लाख की ठगी, दो आरोपियों के खिलाफ दर्यापुर थाने में मामला दर्ज

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अमरावती में सीएसआर फंड के नाम पर ₹51 लाख की ठगी, दो आरोपियों के खिलाफ दर्यापुर थाने में मामला दर्ज

सारांश

अमरावती में CSR फंड के नाम पर ₹51 लाख की ठगी — आरोपियों ने सामाजिक संस्था को ₹2 करोड़ दिलाने का भरोसा दिलाया, फिर दस्तावेज़ी प्रक्रियाओं के बहाने रकम वसूली। दर्यापुर पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की तैयारी शुरू की।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के अमरावती में CSR फंड दिलाने के बहाने सामाजिक संस्था से ₹51 लाख की ठगी।
शिकायतकर्ता भास्कर खारोडे को ₹2 करोड़ का CSR फंड दिलाने का झाँसा दिया गया था।
आरोपी आकाश नायक (नालासोपारा) और अरुण वाघमारे (नवी मुंबई) के खिलाफ दर्यापुर थाने में मामला दर्ज।
पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की; संगठित गिरोह की संभावना की भी जाँच जारी।
आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

महाराष्ट्र के अमरावती जिले में एक सामाजिक संस्था को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड दिलाने का झाँसा देकर ₹51 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। दर्यापुर पुलिस थाने में 29 जून को दो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने शिकायतकर्ता भास्कर खारोडे — जो एक सामाजिक संस्था से जुड़े हैं — को एक नामी कंपनी के माध्यम से ₹2 करोड़ का CSR फंड दिलाने का आश्वासन दिया। इस झाँसे में दस्तावेज़ी कार्यवाही, प्रक्रियागत शुल्क और विभिन्न औपचारिकताओं के नाम पर धीरे-धीरे उनसे ₹51 लाख वसूल लिए गए।

आरोप है कि आरोपियों ने शुरुआत में खुद को CSR फंड उपलब्ध कराने वाले प्रभावशाली नेटवर्क से जुड़ा बताकर विश्वास अर्जित किया। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से शिकायतकर्ता को भ्रमित करते हुए बड़ी रकम हड़प ली।

ठगी का तरीका

शिकायतकर्ता के बयान के अनुसार, बड़ी रकम प्राप्त करने के बाद मुख्य आरोपी आकाश नायक एक बार उनके घर आया, परंतु इसके बाद न तो पैसा लौटाया और न ही संपर्क में रहा। शिकायतकर्ता ने दोनों आरोपियों से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तब जाकर उन्हें ठगी का एहसास हुआ।

आरोपियों की पहचान

पुलिस ने दो आरोपियों की पहचान की है — नालासोपारा निवासी आकाश नायक और नवी मुंबई निवासी अरुण वाघमारे। दोनों के खिलाफ दर्यापुर पुलिस थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है और उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। साथ ही यह भी जाँच की जा रही है कि क्या इस ठगी के पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है।

क्या होगा आगे

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर दर्ज इस मामले में जाँच जारी है और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किए जाने की उम्मीद जताई गई है। गौरतलब है कि CSR फंड के नाम पर ठगी के मामले देश के अन्य हिस्सों में भी सामने आते रहे हैं, जहाँ सामाजिक संस्थाओं को निशाना बनाया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें सामाजिक संस्थाओं की फंडिंग की ज़रूरत और कॉर्पोरेट CSR की जटिल प्रक्रियाओं का फायदा उठाया जाता है। आरोपियों का अमरावती से दूर — नालासोपारा और नवी मुंबई में — रहना यह सुझाता है कि यह एक सुनियोजित अंतर-जिला ऑपरेशन हो सकता है, न कि स्थानीय अवसरवादी ठगी। पुलिस की 'बड़े गिरोह' की जाँच सही दिशा है, लेकिन असली सवाल यह है कि शिकायत दर्ज होने में इतना समय क्यों लगा और क्या अन्य पीड़ित भी हैं जो अब तक सामने नहीं आए।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरावती CSR फंड ठगी मामला क्या है?
महाराष्ट्र के अमरावती जिले में दो आरोपियों ने एक सामाजिक संस्था को ₹2 करोड़ का CSR फंड दिलाने का झाँसा देकर ₹51 लाख की ठगी की। शिकायतकर्ता भास्कर खारोडे की शिकायत पर दर्यापुर पुलिस ने 29 जून को मामला दर्ज किया।
इस मामले में आरोपी कौन हैं?
पुलिस ने दो आरोपियों की पहचान की है — नालासोपारा निवासी आकाश नायक और नवी मुंबई निवासी अरुण वाघमारे। दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज है और उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम बनाई गई है।
आरोपियों ने ठगी कैसे की?
आरोपियों ने खुद को CSR फंड दिलाने वाले प्रभावशाली नेटवर्क से जुड़ा बताकर शिकायतकर्ता का विश्वास जीता। इसके बाद दस्तावेज़ी कार्यवाही, प्रक्रियागत शुल्क और विभिन्न औपचारिकताओं के नाम पर धीरे-धीरे ₹51 लाख वसूल लिए।
पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है?
दर्यापुर पुलिस ने दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की है और उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। इसके अलावा यह भी जाँच की जा रही है कि क्या इस ठगी के पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है।
CSR फंड ठगी से सामाजिक संस्थाएँ कैसे बचें?
विशेषज्ञों के अनुसार, CSR फंड केवल कंपनी के आधिकारिक CSR विभाग या पंजीकृत माध्यमों से ही मिलता है। किसी भी बिचौलिए को अग्रिम शुल्क देने से पहले संबंधित कंपनी से सीधे सत्यापन करना ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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