मुंबई में ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, पुलिस अधिकारी बनकर करते थे धोखाधड़ी
सारांश
Key Takeaways
- मुंबई में ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया।
- गिरोह ने पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को ठगा।
- आरोपियों में एक पत्रकार और एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी शामिल हैं।
- महिला से २ लाख रुपए ठगे गए।
- पुलिस अब गिरोह की गहराई से जांच कर रही है।
मुंबई, ३० मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई में आरे पुलिस ने ठगी और ब्लैकमेलिंग करने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा किया है। यह गिरोह लोगों को पुलिस अधिकारी बनकर धोखा देता था। पुलिस ने इस मामले में पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।
सूत्रों के अनुसार, ये सभी लोग खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों से पैसे ऐंठते थे। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों में एक पत्रकार और एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, यह मामला एक ४० वर्षीय महिला की शिकायत पर सामने आया। महिला को टैरो रीडिंग के बहाने आरे कॉलोनी के रॉयल पाम्स स्थित एक विला में बुलाया गया। वहां पहुंचने पर कुछ लोगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उसे डराया और फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दी।
आरोपियों ने महिला को एक फर्जी सेक्स रैकेट केस में फंसाने की धमकी दी और भय का माहौल बनाकर उससे ऑनलाइन २ लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए। पैसे लेने के बाद सभी आरोपी वहां से भाग गए।
महिला की शिकायत के आधार पर आरे पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजैक्शन के आधार पर सबसे पहले फरहान मुस्तफा कादरी (३३) को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने अन्य आरोपियों के नाम बताए, जिसके बाद तीन अन्य पुरुष और दो महिलाएं भी पकड़ी गईं।
गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में स्वप्नाली सुनील नाडेकर (३८), कविता अजय यादव (४०), राहुल सूर्यकांत कांबली (४१), प्रदीप मृत्युंजय पाठक (३६) (पत्रकार), और रिटायर्ड असिस्टेंट पुलिस सब-इंस्पेक्टर एरिक गिरगोल वेगास (६०) शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह गिरोह बहुत ही सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। वे लोगों को अपने जाल में फंसाकर बदनामी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे और पैसे वसूलते थे।
पुलिस अब इस गिरोह की गहराई से जांच कर रही है, ताकि पता चल सके कि कितने लोग इसके शिकार हुए हैं और क्या इसका संबंध किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क से है।