मुंबई में फर्जी पुलिस बनकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 5 लोग गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- आरे पुलिस ने एक फर्जी पुलिस गिरोह का भंडाफोड़ किया।
- 5 लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें एक पत्रकार और रिटायर्ड पुलिस अधिकारी शामिल हैं।
- महिला को ठगने के लिए फर्जी सेक्स रैकेट का सहारा लिया गया।
- पुलिस अब गिरोह की गहन जांच कर रही है।
मुंबई, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आरे पुलिस ने ठगी और ब्लैकमेलिंग करने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा किया है। यह गिरोह लोगों को पुलिस अधिकारी के रूप में पहचानकर उन्हें निशाना बनाता था। पुलिस ने इस मामले में पांच व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।
जानकारी के अनुसार, ये सभी आरोपी लोगों से पैसे वसूलने के लिए अपने आपको पुलिस अधिकारी बताकर धोखाधड़ी करते थे। सबसे चौंकाने वाला यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में एक पत्रकार और एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि यह मामला एक 40 वर्षीय महिला की शिकायत के बाद उजागर हुआ। महिला को टैरो रीडिंग के बहाने आरे कॉलोनी के रॉयल पाम्स स्थित एक विला में बुलाया गया था। वहां पहुंचने पर कुछ व्यक्तियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उसे डराया और फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी दी।
आरोपियों ने महिला को फर्जी सेक्स रैकेट केस में फंसाने की धमकी देकर उससे ऑनलाइन 2 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए। पैसे लेने के बाद सभी आरोपी वहां से फरार हो गए।
महिला की शिकायत के बाद आरे पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजैक्शन के आधार पर सबसे पहले फरहान मुस्तफा कादरी (33) को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने अन्य आरोपियों के नाम बताए, जिसके बाद तीन और पुरुष और दो महिलाएं पकड़ी गईं।
गिरफ्तार व्यक्तियों में स्वप्नाली सुनील नाडेकर (38), कविता अजय यादव (40), राहुल सूर्यकांत कांबली (41), प्रदीप मृत्युंजय पाठक (36) (पत्रकार), और रिटायर्ड असिस्टेंट पुलिस सब-इंस्पेक्टर एरिक गिरगोल वेगास (60) शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह गिरोह बहुत सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। वे लोगों को धोखे में डालकर बदनामी और कानूनी कार्यवाही का डर दिखाते थे और पैसे वसूलते थे।
पुलिस अब इस पूरे गिरोह की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने लोग इस धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं और क्या इसका संबंध किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क से है।