अमित शाह का नशे के खिलाफ एकजुट वैश्विक मोर्चे का आह्वान, भारत की 'जीरो टोलरेंस' नीति पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 15 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) की वार्षिक व्याख्यान श्रृंखला में मादक पदार्थों के खिलाफ एक एकीकृत वैश्विक युद्ध का आह्वान किया। इस वर्ष की व्याख्यान श्रृंखला का विषय था — 'मादक पदार्थ: एक सीमाहीन खतरा, एक सामूहिक जिम्मेदारी'। शाह ने स्पष्ट किया कि भारत की 'जीरो टोलरेंस' नीति के तहत देश में एक ग्राम भी नशीला पदार्थ प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य: 2047 तक नशामुक्त देश
गृह मंत्री शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 2047 तक नशामुक्त भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने बताया कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने मादक पदार्थ गिरोहों को खत्म करने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया है और उस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
शाह ने यह भी रेखांकित किया कि भारत यह सुनिश्चित करेगा कि देश को पारगमन मार्ग के रूप में भी इस्तेमाल न किया जा सके — चाहे नशीले पदार्थ देश में आएँ या देश से होकर गुज़रें।
नशे की तस्करी: केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, सामाजिक संकट
गृह मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मादक पदार्थों की तस्करी महज पुलिस या कानून-व्यवस्था का मसला नहीं है। उनके अनुसार, इसका समाज और आने वाली पीढ़ियों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है, जिससे निपटने के लिए एक व्यापक और बहु-आयामी समाधान की आवश्यकता है।
उन्होंने चेताया कि नशीले पदार्थों से प्राप्त धन का उपयोग आतंकवादी संगठनों और आपराधिक गिरोहों को वित्त पोषित करने तथा समानांतर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। साथ ही, नशे के सेवन से मानव शरीर को होने वाले स्थायी नुकसान की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा।
वैश्विक एकजुटता की अपील: अभी नहीं तो कभी नहीं
शाह ने चेतावनी दी कि यदि अभी संयुक्त प्रयास शुरू नहीं किए गए, तो 10 वर्ष बाद दुनिया को यह एहसास होगा कि हुए नुकसान की भरपाई के लिए बहुत देर हो चुकी है। उन्होंने सभी जिम्मेदार देशों से मिलकर काम करने का आग्रह किया।
उन्होंने एक एकीकृत अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढाँचे की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जब तक नियंत्रित पदार्थों की परिभाषा और तस्करी के लिए दंड मानकों पर वैश्विक स्तर पर सहमति नहीं बनेगी, तब तक नशा तस्कर गिरोह नीतिगत खामियों का फायदा उठाते रहेंगे।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भारत की उपलब्धियाँ
गृह मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में भारत ने मित्र देशों के सहयोग से 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय अपराधियों को सफलतापूर्वक स्वदेश वापस लाया है। उन्होंने मादक पदार्थों की खेपों को रोकने और ड्रग सरगनाओं को गिरफ्तार या प्रत्यर्पित करने के लिए वास्तविक समय की खुफिया जानकारी साझा करने के महत्व को भी रेखांकित किया।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की सीमाओं पर — विशेषकर उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व में — मादक पदार्थों की तस्करी के मामले लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। शाह ने स्वीकार किया कि अभी भी बहुत कुछ करना शेष है और वैश्विक सहयोग को और गहरा करने की आवश्यकता है।