30 जुलाई 2026
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साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का मास्टरमाइंड सौरभ काले थाईलैंड से डिपोर्ट, मुंबई एयरपोर्ट पर गिरफ्तार

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साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का मास्टरमाइंड सौरभ काले थाईलैंड से डिपोर्ट, मुंबई एयरपोर्ट पर गिरफ्तार

सारांश

डेढ़ साल की अंतरराष्ट्रीय जाँच के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की — थाईलैंड से डिपोर्ट किए गए साइबर सिंडिकेट के कथित मास्टरमाइंड सौरभ काले को मुंबई एयरपोर्ट पर दबोचा गया। दुबई से संचालित यह नेटवर्क ऑनलाइन टास्क फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में लिप्त था।

मुख्य बातें

सौरभ उर्फ गणेश काले को 12 जून 2026 को मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया।
आरोपी थाईलैंड से प्रत्यर्पित किया गया; पहले दुबई से नेटवर्क संचालित करता था।
पुणे के तीन अलग-अलग साइबर थानों में एफआईआर दर्ज; इससे पहले 13 आरोपी गिरफ्तार।
आरोप: ऑनलाइन टास्क फ्रॉड , शेयर मार्केट फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट ।
गिरफ्तारी डेढ़ वर्ष की जाँच और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के बाद संभव हुई।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने अंतरराष्ट्रीय समन्वय में अहम भूमिका निभाई।

महाराष्ट्र पुलिस ने 12 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट के कथित मास्टरमाइंड सौरभ उर्फ गणेश काले को मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया, जैसे ही वह थाईलैंड से प्रत्यर्पित होकर भारत पहुँचा। पुणे पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे के अनुसार, आरोपी ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, शेयर मार्केट फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे गंभीर साइबर अपराधों में संलिप्त था और दुबई से पूरे नेटवर्क का संचालन करता था।

मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर

यह मामला पुणे के देहू रोड, हिंजवडी और साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज तीन अलग-अलग प्राथमिकियों (एफआईआर) की जाँच के दौरान उजागर हुआ। जाँच के क्रम में पुलिस पहले ही इस गिरोह से जुड़े 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। उन्हीं की पूछताछ से यह खुलासा हुआ कि कोई एक मास्टरमाइंड विदेश से बैठकर भारत में मौजूद एजेंटों को निर्देश दे रहा था।

गौरतलब है कि एक अन्य गिरफ्तार आरोपी दीपक गाढ़े ने दुबई में गणेश काले से मुलाकात की थी, जिसके बाद इस सिंडिकेट के संचालन में और तेज़ी आई तथा कई लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से इस नेटवर्क से जुड़ते गए।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया

आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने रेड कॉर्नर नोटिस (आरसीएन) और लुकआउट सर्कुलर जारी करवाए। इसके साथ ही यूएई और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया गया। काले को थाईलैंड में हिरासत में लिया गया और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया।

अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई लगभग डेढ़ वर्ष की अथक मेहनत का परिणाम है। इस दौरान साइबर पुलिस स्टेशन की जाँच टीम के साथ-साथ भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आरोपी के खिलाफ आरोप

पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे ने बताया कि काले पर ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, शेयर मार्केट फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट के मामलों में संलिप्तता के आरोप हैं। वह पहले दुबई से नेटवर्क संचालित करता था और बाद में थाईलैंड भाग गया था।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के मामलों में तेज़ वृद्धि दर्ज की जा रही है। केंद्रीय एजेंसियों के आँकड़ों के अनुसार, इस तरह के अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट देश भर में हज़ारों पीड़ितों को निशाना बना चुके हैं।

आगे की जाँच

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद काले से विस्तृत पूछताछ की जाएगी, जिससे उसके विदेशी संपर्कों, पूरे नेटवर्क की संरचना और भारत में सक्रिय अन्य सहयोगियों की पहचान की जा सके। पुलिस को उम्मीद है कि इस पूछताछ से कई और मामलों में सफलता मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उतनी ही बड़ी चेतावनी भी है — एक आरोपी को पकड़ने में डेढ़ साल और बहुराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयास लगे। यह दर्शाता है कि भारत की साइबर अपराध प्रत्यर्पण प्रक्रिया अभी भी धीमी और संसाधन-गहन है। जब तक कानूनी ढाँचा तेज़ नहीं होता और द्विपक्षीय साइबर-क्राइम संधियाँ मज़बूत नहीं होतीं, इस तरह के सिंडिकेट 'सुरक्षित' देशों से संचालन जारी रखेंगे।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौरभ उर्फ गणेश काले कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
सौरभ उर्फ गणेश काले एक कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का मास्टरमाइंड है, जिसे 12 जून 2026 को मुंबई एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। वह ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, शेयर मार्केट फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों में संलिप्त बताया जाता है।
आरोपी को थाईलैंड से भारत कैसे लाया गया?
पुलिस ने रेड कॉर्नर नोटिस और लुकआउट सर्कुलर जारी करवाए और यूएई सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से समन्वय किया। थाईलैंड में हिरासत के बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया।
इस साइबर सिंडिकेट से जुड़े कितने आरोपी अब तक गिरफ्तार हुए हैं?
काले की गिरफ्तारी से पहले ही इस गिरोह से जुड़े 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था। अब काले के साथ गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 14 हो गई है।
यह साइबर नेटवर्क किस तरह काम करता था?
पुलिस जाँच के अनुसार, काले दुबई से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करता था और भारत में मौजूद एजेंटों को निर्देश देता था। आरोपी दीपक गाढ़े ने दुबई में काले से मुलाकात की थी, जिसके बाद सिंडिकेट के संचालन में तेज़ी आई।
अब आगे की जाँच में क्या होगा?
अधिकारियों के अनुसार, काले से विस्तृत पूछताछ की जाएगी ताकि उसके विदेशी संपर्कों, नेटवर्क की पूरी संरचना और भारत में सक्रिय अन्य सहयोगियों की पहचान हो सके। इससे पुणे में दर्ज तीनों एफआईआर की जाँच को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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