जौनपुर पुलिस ने साइबर ठगी के मास्टरमाइंड शुभम सिंह को दबोचा, ₹2.5 करोड़ की धोखाधड़ी का भंडाफोड़
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की जौनपुर पुलिस ने शनिवार, 13 जून को एक बड़े साइबर ठगी गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपी की पहचान शुभम सिंह के रूप में हुई है, जिस पर बजाज लोन, निवेश योजनाओं और टूर पैकेज के नाम पर देशभर के हजारों लोगों से ₹2.5 करोड़ से अधिक की ठगी करने का आरोप है। जौनपुर की साइबर क्राइम सेल ने तकनीकी निगरानी और सर्विलांस के जरिए इस मामले की कई परतें उजागर की हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, शुभम सिंह फर्जी आधार कार्ड और फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर साइबर फ्रॉड का नेटवर्क चला रहा था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से 6 मोबाइल फोन, 15 एटीएम कार्ड, 9 पासबुक, 7 चेकबुक और ₹1.45 लाख नकद बरामद किए गए। जांच में कई बैंक खातों का भी खुलासा हुआ है, जिनका उपयोग ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था।
आरोपी के खिलाफ महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के विभिन्न पुलिस थानों में 20 से अधिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायतें दर्ज हैं। जौनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देशन में साइबर अपराधियों के विरुद्ध यह अभियान लगातार जारी है।
लखनऊ में भी फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़
इसी दिन लखनऊ में भी साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया। साइबर क्राइम सेल और साइबर थाना लखनऊ की संयुक्त टीम ने विभूतिखंड थाना क्षेत्र स्थित जेएस टॉवर की चौथी मंजिल पर संचालित एक अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारकर पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने इस मामले में 11 की-पैड मोबाइल फोन, 2 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 102 वर्क डेटा शीट और 26 फर्जी जॉइनिंग लेटर, अप्रूवल लेटर तथा रजिस्ट्रेशन लेटर बरामद किए।
ठगी का तरीका
अतिरिक्त उपायुक्त पुलिस (ADCP) किरण यादव ने बताया कि गिरोह के सदस्य विभिन्न वेबसाइटों से नौकरी तलाश रहे युवाओं का डेटा खरीदते थे। इसके बाद कॉल सेंटर से उन्हें फोन कर अमूल, अमेज़न, इन्फोसिस, फ्लिपकार्ट, मैनकाइंड, सुजुकी, पार्ले और सिप्ला जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में आकर्षक वेतन पर नौकरी दिलाने का झाँसा दिया जाता था।
विश्वास जीतने के लिए आरोपी व्हाट्सएप के माध्यम से फर्जी जॉइनिंग लेटर और अन्य दस्तावेज भेजते थे, तथा बाद में रजिस्ट्रेशन फीस, इंटरव्यू चार्ज, गेट पास शुल्क और अन्य खर्चों के नाम पर रकम वसूल करते थे। यह धनराशि फर्जी बैंक खातों में स्थानांतरित कराई जाती थी।
गिरफ्तार आरोपी
लखनऊ कॉल सेंटर मामले में गिरफ्तार आरोपियों में कथित मैनेजर जीशान खान, टीम लीडर सतीश पाल और कॉलर के रूप में कार्यरत सोनाली चौरसिया, शिवानी वर्मा तथा नीलू वर्मा शामिल हैं।
आगे की जाँच
दोनों मामलों में पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों और डिजिटल उपकरणों की विस्तृत जाँच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, इन गिरोहों के और भी सदस्य हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस के बढ़ते साइबर अपराध के खिलाफ व्यापक अभियान का हिस्सा है।