29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जौनपुर पुलिस ने साइबर ठगी के मास्टरमाइंड शुभम सिंह को दबोचा, ₹2.5 करोड़ की धोखाधड़ी का भंडाफोड़

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जौनपुर पुलिस ने साइबर ठगी के मास्टरमाइंड शुभम सिंह को दबोचा, ₹2.5 करोड़ की धोखाधड़ी का भंडाफोड़

सारांश

जौनपुर पुलिस ने ₹2.5 करोड़ की साइबर ठगी के मास्टरमाइंड शुभम सिंह को दबोचा — फर्जी लोन, निवेश और टूर पैकेज से देशभर में हजारों शिकार। उसी दिन लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर से 5 और आरोपी गिरफ्तार, जो बड़ी कंपनियों के नाम पर नौकरी का झाँसा देते थे।

मुख्य बातें

जौनपुर पुलिस ने 13 जून को साइबर ठगी के मास्टरमाइंड शुभम सिंह को गिरफ्तार किया।
आरोपी पर बजाज लोन, निवेश और टूर पैकेज के नाम पर ₹2.5 करोड़ की ठगी का आरोप है।
आरोपी के खिलाफ महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में 20 से अधिक NCRP शिकायतें दर्ज हैं।
बरामदगी में 6 मोबाइल फोन, 15 एटीएम कार्ड, 9 पासबुक, 7 चेकबुक और ₹1.45 लाख नकद शामिल।
लखनऊ में जेएस टॉवर स्थित फर्जी कॉल सेंटर से 5 आरोपी — जीशान खान, सतीश पाल, सोनाली चौरसिया, शिवानी वर्मा, नीलू वर्मा — गिरफ्तार।
कॉल सेंटर से अमूल, अमेज़न, इन्फोसिस समेत प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम पर नौकरी का झाँसा दिया जाता था।

उत्तर प्रदेश की जौनपुर पुलिस ने शनिवार, 13 जून को एक बड़े साइबर ठगी गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपी की पहचान शुभम सिंह के रूप में हुई है, जिस पर बजाज लोन, निवेश योजनाओं और टूर पैकेज के नाम पर देशभर के हजारों लोगों से ₹2.5 करोड़ से अधिक की ठगी करने का आरोप है। जौनपुर की साइबर क्राइम सेल ने तकनीकी निगरानी और सर्विलांस के जरिए इस मामले की कई परतें उजागर की हैं।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, शुभम सिंह फर्जी आधार कार्ड और फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर साइबर फ्रॉड का नेटवर्क चला रहा था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से 6 मोबाइल फोन, 15 एटीएम कार्ड, 9 पासबुक, 7 चेकबुक और ₹1.45 लाख नकद बरामद किए गए। जांच में कई बैंक खातों का भी खुलासा हुआ है, जिनका उपयोग ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था।

आरोपी के खिलाफ महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के विभिन्न पुलिस थानों में 20 से अधिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायतें दर्ज हैं। जौनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देशन में साइबर अपराधियों के विरुद्ध यह अभियान लगातार जारी है।

लखनऊ में भी फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़

इसी दिन लखनऊ में भी साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया। साइबर क्राइम सेल और साइबर थाना लखनऊ की संयुक्त टीम ने विभूतिखंड थाना क्षेत्र स्थित जेएस टॉवर की चौथी मंजिल पर संचालित एक अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारकर पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पुलिस ने इस मामले में 11 की-पैड मोबाइल फोन, 2 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 102 वर्क डेटा शीट और 26 फर्जी जॉइनिंग लेटर, अप्रूवल लेटर तथा रजिस्ट्रेशन लेटर बरामद किए।

ठगी का तरीका

अतिरिक्त उपायुक्त पुलिस (ADCP) किरण यादव ने बताया कि गिरोह के सदस्य विभिन्न वेबसाइटों से नौकरी तलाश रहे युवाओं का डेटा खरीदते थे। इसके बाद कॉल सेंटर से उन्हें फोन कर अमूल, अमेज़न, इन्फोसिस, फ्लिपकार्ट, मैनकाइंड, सुजुकी, पार्ले और सिप्ला जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में आकर्षक वेतन पर नौकरी दिलाने का झाँसा दिया जाता था।

विश्वास जीतने के लिए आरोपी व्हाट्सएप के माध्यम से फर्जी जॉइनिंग लेटर और अन्य दस्तावेज भेजते थे, तथा बाद में रजिस्ट्रेशन फीस, इंटरव्यू चार्ज, गेट पास शुल्क और अन्य खर्चों के नाम पर रकम वसूल करते थे। यह धनराशि फर्जी बैंक खातों में स्थानांतरित कराई जाती थी।

गिरफ्तार आरोपी

लखनऊ कॉल सेंटर मामले में गिरफ्तार आरोपियों में कथित मैनेजर जीशान खान, टीम लीडर सतीश पाल और कॉलर के रूप में कार्यरत सोनाली चौरसिया, शिवानी वर्मा तथा नीलू वर्मा शामिल हैं।

आगे की जाँच

दोनों मामलों में पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों और डिजिटल उपकरणों की विस्तृत जाँच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, इन गिरोहों के और भी सदस्य हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस के बढ़ते साइबर अपराध के खिलाफ व्यापक अभियान का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक व्यवस्थित उद्योग बन चुका है। फर्जी सिम, फर्जी आधार और फर्जी दस्तावेजों की सुलभता इस पूरे तंत्र की नींव है — जो सवाल उठाती है कि KYC और दूरसंचार नियामक ढाँचे में क्या खामियाँ हैं। नौकरी के इच्छुक युवाओं को निशाना बनाना विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि यह बेरोजगारी की पीड़ा को हथियार बनाता है। जब तक डिजिटल साक्षरता और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र को मज़बूत नहीं किया जाता, गिरफ्तारियाँ इस हिमशैल की महज ऊपरी परत ही साबित होंगी।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जौनपुर में गिरफ्तार साइबर ठगी का मास्टरमाइंड कौन है?
गिरफ्तार आरोपी की पहचान शुभम सिंह के रूप में हुई है। उस पर बजाज लोन, निवेश योजनाओं और टूर पैकेज के नाम पर देशभर के हजारों लोगों से ₹2.5 करोड़ की ठगी करने का आरोप है।
शुभम सिंह के खिलाफ कितने मामले दर्ज हैं?
आरोपी शुभम सिंह के खिलाफ महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के विभिन्न पुलिस थानों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 20 से अधिक साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हैं।
लखनऊ के फर्जी कॉल सेंटर से कौन-कौन गिरफ्तार हुए?
लखनऊ के जेएस टॉवर स्थित अवैध कॉल सेंटर से पाँच आरोपी गिरफ्तार हुए — कथित मैनेजर जीशान खान, टीम लीडर सतीश पाल और कॉलर के रूप में कार्यरत सोनाली चौरसिया, शिवानी वर्मा तथा नीलू वर्मा।
लखनऊ के कॉल सेंटर में ठगी का तरीका क्या था?
आरोपी वेबसाइटों से नौकरी तलाश रहे युवाओं का डेटा खरीदते थे और फिर उन्हें अमूल, अमेज़न, इन्फोसिस जैसी कंपनियों में नौकरी का झाँसा देते थे। व्हाट्सएप पर फर्जी जॉइनिंग लेटर भेजकर रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य शुल्कों के नाम पर रकम वसूल की जाती थी।
जौनपुर पुलिस ने आरोपी के पास से क्या बरामद किया?
पुलिस ने शुभम सिंह के पास से 6 मोबाइल फोन, 15 एटीएम कार्ड, 9 पासबुक, 7 चेकबुक और ₹1.45 लाख नकद बरामद किए। जाँच में कई फर्जी बैंक खातों का भी खुलासा हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले