महाराजा हरि सिंह पर फिल्म बना रहे पद्मश्री बलवंत ठाकुर, बोले — 'जितना खोजता हूं, कद उतना ऊंचा'
सारांश
मुख्य बातें
पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने 23 सितंबर 2026 को रियासी में महाराजा हरि सिंह की जयंती समारोह के दौरान घोषणा की कि वे महाराजा के जीवन पर एक फिल्म बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जितना गहराई से वे महाराजा के बारे में शोध कर रहे हैं, उनका व्यक्तित्व उनके सामने उतना ही महान और प्रभावशाली होता जा रहा है।
जयंती पर हवन यज्ञ और उत्सव
ऑल इंडिया राजपूत एकता मंच ने जम्मू में महाराजा हरि सिंह की मूर्ति स्थल पर हवन यज्ञ का आयोजन किया। हवन पूजा की समाप्ति के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच प्रसाद वितरित किया गया। बलवंत ठाकुर ने कहा कि महाराजा की जयंती पर इस बार रियासी में सबसे बड़े स्तर पर आयोजन हो रहा है, जो प्रशंसनीय है।
बलवंत ठाकुर का युवाओं को संदेश
पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने जयंती समारोह में उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, 'जोश दिखाना बहुत जरूरी है, लेकिन पढ़ाई-लिखाई को भी मजबूत करना जरूरी है।' उन्होंने यह भी कहा कि हमारे देश के इतिहास और संस्कृति के प्रति युवाओं में जो उदासीनता है, वह नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार भारत के पास जितनी वीर गाथाएं और प्रेरणादायक कहानियां हैं, उतनी दुनिया में किसी अन्य देश के पास नहीं हैं।
ठाकुर ने कहा कि महाराजा हरि सिंह के बारे में अब तक बहुत कम लिखा गया है और अधिकांश युवाओं को उनके जीवन और योगदान की जानकारी नहीं है। उन्होंने आह्वान किया कि इस चुप्पी को तोड़ना होगा और उनके इतिहास को पुनः उजागर करना होगा।
फिल्म निर्माण की घोषणा
बलवंत ठाकुर ने बताया कि वे महाराजा हरि सिंह के जीवन पर आधारित एक फिल्म बना रहे हैं। उन्होंने कहा, 'महाराजा हरि सिंह के बारे में मैं जितना ज्यादा खोज रहा हूं, उस इंसान का कद मेरे सामने उतना ही ऊंचा होता जा रहा है।' यह फिल्म महाराजा के जीवन और उनके ऐतिहासिक निर्णयों पर केंद्रित रहेगी, हालांकि फिल्म की रिलीज़ तिथि का अभी खुलासा नहीं किया गया।
भाजपा विधायक की नेशनल कॉन्फ्रेंस पर टिप्पणी
भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया ने इस अवसर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका शुरू से ही महाराजा के प्रति एक खास नकारात्मक रवैया रहा है। उनके अनुसार नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कश्मीर के लोगों को यह कहकर गुमराह किया कि महाराजा का बेटा ही महाराजा बनेगा और इसीलिए वे उस व्यवस्था को खत्म करना चाहते थे।
मनकोटिया ने सवाल उठाया कि 1931 के आसपास कश्मीर में क्या हालात थे और नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर आज लोकतंत्र की क्या स्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस वंशवादी प्रथा को खत्म करने का दावा कर लोगों को गुमराह किया गया, वही प्रथा नेशनल कॉन्फ्रेंस ने खुद शुरू कर ली है।
महाराजा हरि सिंह का ऐतिहासिक महत्व
गौरतलब है कि महाराजा हरि सिंह जम्मू-कश्मीर के अंतिम डोगरा शासक थे, जिन्होंने अक्टूबर 1947 में भारत के साथ विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए थे। यह निर्णय भारतीय इतिहास की सबसे निर्णायक घटनाओं में से एक माना जाता है। आलोचकों का कहना है कि आधिकारिक इतिहास-लेखन में उनके योगदान को पर्याप्त स्थान नहीं मिला, और बलवंत ठाकुर की यह पहल उसी कमी को पूरा करने की दिशा में एक सांस्कृतिक प्रयास है।