डॉ. परमार की 120वीं जयंती पर जयराम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर हमला, बोले — 'औपचारिकता बनकर रह गया कार्यक्रम'
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने 4 अगस्त 2026 को डॉ. यशवंत सिंह परमार की 120वीं जयंती पर आयोजित राज्य सरकार के कार्यक्रम की तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश के निर्माता को उचित सम्मान देने के बजाय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की उपलब्धियों का महिमामंडन किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
जयराम ठाकुर ने कहा, 'आज डॉ. यशवंत सिंह परमार की 120वीं जयंती थी, जिन्हें हिमाचल प्रदेश का निर्माता माना जाता है और हम सभी उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठा हुए थे, लेकिन मुझे कहना होगा कि उनके इतने बड़े योगदान को देखते हुए मौजूदा कांग्रेस सरकार के तहत जिस तरह से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, वह सिर्फ एक औपचारिकता जैसा लगा। हमें लगता है कि उन्हें वह सम्मान और जगह नहीं दी जा रही है, जिसके वे असल में हकदार हैं।'
डॉक्यूमेंट्री पर आपत्ति
ठाकुर ने जनसंपर्क विभाग द्वारा कार्यक्रम में दिखाई गई डॉक्यूमेंट्री पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, 'डॉक्यूमेंट्री का एक-चौथाई हिस्सा डॉ. परमार के बारे में था, जबकि एक बहुत बड़ा हिस्सा मौजूदा सरकार को उजागर कर रहा था।' उन्होंने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री या तो पूरी तरह डॉ. परमार के जीवन और योगदान पर केंद्रित होनी चाहिए थी, या यदि वर्तमान सरकार का उल्लेख करना ही था तो वह अत्यंत संक्षिप्त होना चाहिए था।
एक्स पर जयराम ठाकुर का संदेश
ठाकुर ने एक्स पर लिखा, 'हिमाचल प्रदेश विधानसभा में हिमाचल के प्रथम मुख्यमंत्री, प्रदेश के निर्माता एवं हिमाचल के हितों के लिए आजीवन समर्पित श्रद्धेय डॉ. यशवंत सिंह परमार की 120वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। यशवंत परमार का प्रेरणादायी व्यक्तित्व और जनसेवा के प्रति समर्पण सदैव हम सभी का मार्गदर्शन करता रहेगा।'
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि डॉ. यशवंत सिंह परमार हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे और राज्य के गठन में उनकी भूमिका को ऐतिहासिक माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच राज्य में राजनीतिक तनाव पहले से ही बना हुआ है। ठाकुर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति कार्यक्रम की भावना से नहीं, बल्कि उसके आयोजन के तरीके से है।
आगे क्या
विपक्ष की इस आलोचना पर सुक्खू सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि ऐतिहासिक विरासत पर यह विवाद आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में एक नया मोर्चा खोल सकता है।