15 जुलाई 2026
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महाराष्ट्र: एनसीपी (शरद पवार गुट) में दलबदल की अटकलें, नाना पटोले ने विपक्ष तोड़ने की साजिश का लगाया आरोप

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महाराष्ट्र: एनसीपी (शरद पवार गुट) में दलबदल की अटकलें, नाना पटोले ने विपक्ष तोड़ने की साजिश का लगाया आरोप

सारांश

महाराष्ट्र में एनसीपी के शरद पवार गुट को लेकर दलबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। कांग्रेस के नाना पटोले ने विपक्ष तोड़ने की साजिश का आरोप लगाया, जबकि शिवसेना नेताओं ने इसे शिष्टाचार और आंतरिक मामला बताया। सुप्रिया सुले ने किसी भी बदलाव से इनकार किया है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने आरोप लगाया कि शरद पवार गुट , डीएमके और शिवसेना (यूबीटी) के जनप्रतिनिधियों को तोड़ने की कोशिश हो रही है।
पटोले ने '400 पार' के नारे का हवाला देते हुए कहा कि संविधान बदलने की मंशा से विपक्षी दलों को कमज़ोर किया जा रहा है।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि सुप्रिया सुले ने एनडीए में शामिल होने की किसी भी संभावना से इनकार किया है।
शिवसेना सांसद संजय देशमुख और प्रवक्ता कृष्ण हेगड़े ने मुख्यमंत्री से मुलाकात को राजनीतिक शिष्टाचार बताया, न कि दलबदल का संकेत।
एनसीपी (शरद पवार गुट) के कुछ विधायकों की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मुलाकात की पुष्टि हुई है, लेकिन एनडीए में शामिल होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई।

महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के शरद पवार गुट को लेकर 15 जुलाई को नई हलचल देखी गई, जब कांग्रेस और शिवसेना नेताओं ने परस्पर विरोधी बयान दिए। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को तोड़ने की सुनियोजित कोशिश हो रही है, जबकि शिवसेना के नेताओं ने इसे महज राजनीतिक शिष्टाचार और एनसीपी का आंतरिक मामला करार दिया।

नाना पटोले का आरोप: संविधान बदलने की मंशा से हो रही तोड़फोड़

कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए नाना पटोले ने कहा, 'चाहे शरद पवार की पार्टी हो, डीएमके हो या शिवसेना (यूबीटी), उन्हें कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।' उनका आरोप था कि इन कोशिशों के पीछे की मंशा स्पष्ट नहीं है।

पटोले ने लोकसभा चुनाव के दौरान चर्चित '400 पार' के नारे का संदर्भ देते हुए कहा, 'इसके पीछे संविधान में बदलाव की मंशा बताई गई थी। एक भाजपा सांसद के बयान में भी इस तरह की बात सामने आई थी। संवैधानिक ढाँचे को बदलने के उद्देश्य से राजनीतिक दलों को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है।' उन्होंने इसे 'वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों की सच्चाई' बताया।

शिवसेना (यूबीटी) का रुख: शरद पवार को समझना आसान नहीं

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने एनसीपी (शरद पवार गुट) को लेकर चल रही अटकलों पर कहा, 'शरद पवार को समझना आसान नहीं है। यह उनकी पार्टी का आंतरिक मामला है और इस पर अंतिम स्थिति वही स्पष्ट कर सकते हैं।' सावंत ने बताया कि उन्होंने एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले से भी इस विषय पर बातचीत की, जिन्होंने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया है।

शिवसेना सांसद और प्रवक्ता की प्रतिक्रिया: शिष्टाचार को राजनीतिक रंग न दें

शिवसेना सांसद संजय देशमुख ने कहा, 'इसमें कोई राजनीतिक संदेश नहीं देखा जाना चाहिए। शरद पवार देश के वरिष्ठ और सम्मानित नेता हैं, इसलिए किसी भी राजनीतिक दल के नेता द्वारा उनका स्वागत करना महाराष्ट्र की परंपरा और भारतीय संस्कृति का हिस्सा है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करना राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि शिष्टाचार है।

शिवसेना प्रवक्ता कृष्ण हेगड़े ने स्वीकार किया कि शरद पवार गुट के कुछ विधायकों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मुलाकात की है, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी तक एनडीए में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हेगड़े ने इसे एनसीपी का आंतरिक मामला बताते हुए अधिक टिप्पणी से परहेज किया।

आम जनता और महागठबंधन पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब महाविकास अघाड़ी (MVA) — जिसमें कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) शामिल हैं — अपनी एकजुटता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र पहले ही 2022 में शिवसेना और 2023 में एनसीपी में ऊर्ध्वाधर विभाजन देख चुका है। यदि शरद पवार गुट के विधायक सत्तापक्ष की ओर झुकते हैं, तो विपक्ष की स्थिति और कमज़ोर हो सकती है।

आगे क्या होगा

अटकलों पर विराम लगाने के लिए सभी नज़रें अब शरद पवार और सुप्रिया सुले के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, एनडीए में किसी भी संभावित प्रवेश की पुष्टि या खंडन संबंधित विधायकों अथवा पवार स्वयं ही करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों बार विधायकों की 'स्वैच्छिक' आवाजाही ने सत्ता समीकरण पलट दिए थे। नाना पटोले का संविधान-बदलाव वाला तर्क राजनीतिक रूप से तीखा है, लेकिन इसे साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य की दरकार है। असली सवाल यह है कि शरद पवार — जो दशकों से महाराष्ट्र की राजनीति के 'किंगमेकर' रहे हैं — इस बार खुद किस ओर झुकेंगे; उनकी चुप्पी ही सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीपी (शरद पवार गुट) को लेकर महाराष्ट्र में क्या हलचल है?
शरद पवार गुट के कुछ विधायकों की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद एनडीए में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। हालाँकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया है।
नाना पटोले ने क्या आरोप लगाए हैं?
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने आरोप लगाया है कि शरद पवार की पार्टी, डीएमके और शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों व विधायकों को तोड़ने की सुनियोजित कोशिश हो रही है। उन्होंने इसे संविधान बदलने की व्यापक मंशा से जोड़ा और '400 पार' के नारे का संदर्भ दिया।
शिवसेना ने एनसीपी की मुख्यमंत्री से मुलाकात को कैसे देखा?
शिवसेना सांसद संजय देशमुख और प्रवक्ता कृष्ण हेगड़े ने इसे राजनीतिक शिष्टाचार और एनसीपी का आंतरिक मामला बताया। उनका कहना था कि वरिष्ठ नेता शरद पवार का स्वागत करना महाराष्ट्र की परंपरा है, इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं।
सुप्रिया सुले ने दलबदल की अटकलों पर क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत के अनुसार, एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने उनसे हुई बातचीत में एनडीए में शामिल होने की किसी भी संभावना से स्पष्ट इनकार किया है। अंतिम स्थिति शरद पवार स्वयं स्पष्ट करेंगे।
महाराष्ट्र में इससे पहले कब-कब दल टूटे हैं?
महाराष्ट्र 2022 में शिवसेना और 2023 में एनसीपी में बड़े विभाजन देख चुका है, जिसने सत्ता के समीकरण बदल दिए थे। इन्हीं पृष्ठभूमि में मौजूदा अटकलें महाविकास अघाड़ी के लिए चिंता का विषय बनी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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