महाराष्ट्र का स्वतंत्र 'राज्य बीज अधिनियम': कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने की घोषणा, किसानों को मिलेगा तुरंत मुआवजा
सारांश
Key Takeaways
- महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने 28 अप्रैल 2026 को स्वतंत्र 'राज्य बीज अधिनियम' लागू करने की घोषणा की।
- किसानों को अपने उत्पादित बीज संग्रहीत, उपयोग, आदान-प्रदान और बेचने का कानूनी अधिकार मिलेगा।
- घटिया बीजों से फसल नुकसान पर किसानों को तुरंत आर्थिक मुआवजा देने का प्रावधान होगा।
- जिला स्तर पर 'बीज शिकायत निवारण केंद्र' स्थापित किए जाएंगे।
- 'साथी' पोर्टल पर सभी बीज उत्पादक संगठनों का 100%25 पंजीकरण पूरा; खरीफ 2026 से पूरी आपूर्ति श्रृंखला पोर्टल से प्रबंधित होगी।
- बीज पैकेटों पर QR कोड और केंद्रीयकृत बीज पहचान पोर्टल से उत्पादन-से-बिक्री तक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को मुंबई में घोषणा की कि राज्य सरकार जल्द ही अपना स्वतंत्र 'राज्य बीज अधिनियम' लागू करेगी। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य किसानों को कानूनी सुरक्षा देना, उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और घटिया बीजों की स्थिति में तत्काल मुआवजे का प्रावधान करना है। यह घोषणा 2025 में महाराष्ट्र विधानमंडल के दूसरे मॉनसून सत्र के दौरान दिए गए आश्वासन को पूरा करती है।
प्रस्तावित कानून में क्या है
प्रस्तावित राज्य बीज अधिनियम किसानों को अपने स्वयं के उत्पादित बीज — बिना किसी ब्रांडेड नाम का उपयोग किए — संग्रहीत करने, उपयोग करने, आदान-प्रदान करने और बेचने का कानूनी अधिकार देगा। इसके साथ ही, यदि घटिया बीजों के कारण फसल को नुकसान होता है, तो किसानों को तुरंत आर्थिक मुआवजा मिलेगा। कानून में बीज कंपनियों पर गुणवत्ता की जिम्मेदारी डाली जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त जुर्माने का प्रावधान होगा।
महाबीज को मिलेगी मजबूती
एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान मंत्री भरणे ने विधेयक को और प्रभावी बनाने के लिए कई निर्देश दिए। यह विधेयक महाराष्ट्र राज्य बीज निगम (महाबीज) — जिसे 'महावीर' भी कहा जाता है — की कार्यक्षमता बेहतर बनाने पर विशेष जोर देता है। गौरतलब है कि महाबीज राज्य में बीज आपूर्ति की रीढ़ मानी जाती है, और इसे सुदृढ़ करना किसानों की दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा के लिए अहम है।
तकनीकी आधुनिकीकरण और पारदर्शिता
नए कानूनी ढाँचे के तहत, सभी बीज उत्पादकों, प्रसंस्करण केंद्रों, वितरकों, विक्रेताओं और नर्सरियों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। बीज के पैकेटों पर QR कोड लगाए जाएंगे और एक 'केंद्रीयकृत बीज पहचान पोर्टल' स्थापित किया जाएगा, जिससे उत्पादन से लेकर बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया पर नज़र रखी जा सकेगी। बीजों में वायरस, बैक्टीरिया और फफूंदी की अधिकतम सीमा तय करने से जैविक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, नर्सरियों को अपने सभी पौधों के लिए एक 'स्रोत रजिस्टर' रखना अनिवार्य होगा।
जिला स्तर पर शिकायत निवारण केंद्र
मंत्री भरणे ने बताया कि सरकार जिला स्तर पर 'बीज शिकायत निवारण केंद्र' स्थापित करने का निर्देश दे रही है। ये केंद्र किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान में सहायक होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में घटिया बीजों से फसल नुकसान की शिकायतें वर्षों से किसानों के लिए एक बड़ी समस्या रही हैं।
साथी पोर्टल और खरीफ 2026
कृषि विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि तकनीकी उपाय पहले से ही लागू किए जा रहे हैं। 'साथी' पोर्टल पर बीज उत्पादन करने वाले सभी संगठनों का 100 प्रतिशत पंजीकरण पूरा हो चुका है। खरीफ 2026 के मौसम से, सभी प्रकार के बीजों के उत्पादन, वितरण और बिक्री का पूरा चक्र इसी पोर्टल के माध्यम से प्रबंधित किया जाएगा, जिससे पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। यह कदम महाराष्ट्र को बीज क्षेत्र में स्वतंत्र कानून बनाने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल कर सकता है।