दौंड में जिलाबदर आरोपी का उत्पात: पुलिस से धक्कामुक्की, मामला दर्ज

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दौंड में जिलाबदर आरोपी का उत्पात: पुलिस से धक्कामुक्की, मामला दर्ज

सारांश

पुणे के दौंड में एक जिलाबदर आरोपी ने प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने की कोशिश की और पुलिस से धक्कामुक्की की। मुंबई पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 56 के तहत चार जिलों से बाहर किए गए इस आरोपी पर अब सरकारी कार्य में बाधा का मामला दर्ज हो गया है।

मुख्य बातें

17 मई को पुणे जिले के दौंड में जिलाबदर आरोपी ने प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने का प्रयास किया।
आरोपी को मुंबई पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 56 के तहत पुणे, सोलापुर, सातारा और अहिल्यानगर जिलों से एक वर्ष के लिए जिलाबदर किया गया था।
उपविभागीय दंडाधिकारी रेवणनाथ लबडे ने जिलाबदर आदेश जारी किया था।
घटना सरपंचवस्ती क्षेत्र में पुष्पलक्ष्मी हॉस्पिटल के पास पुराने सब्जी मंडी रोड पर हुई।
हेड कांस्टेबल मखरे ने मामला दर्ज किया; हवलदार भोसले जाँच कर रहे हैं।

पुणे जिले के दौंड शहर में 17 मई को एक जिलाबदर आरोपी ने प्रतिबंधित क्षेत्र में जबरन घुसने का प्रयास किया और रोकने पर पुलिस के साथ धक्कामुक्की की। हेड कांस्टेबल मखरे ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जबकि हवलदार भोसले मामले की जाँच कर रहे हैं।

घटनाक्रम

शिकायतकर्ता निखिल बालासाहेब जाधव के अनुसार, यह घटना सरपंचवस्ती क्षेत्र में पुष्पलक्ष्मी हॉस्पिटल से बोरावकेनगर की ओर जाने वाले पुराने सब्जी मंडी रोड के किनारे हुई। पुलिस ने पहले आरोपी को नरमी से प्रतिबंधित क्षेत्र में न आने की चेतावनी दी, लेकिन उसके न मानने पर हिरासत में लेने की कोशिश की गई, जिसके बाद धक्कामुक्की की स्थिति पैदा हो गई।

जिलाबदर आदेश का उल्लंघन

उपविभागीय दंडाधिकारी रेवणनाथ लबडे ने मुंबई पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 56 के तहत आरोपी को पुणे, सोलापुर, सातारा और अहिल्यानगर जिलों से एक वर्ष के लिए जिलाबदर किया था। इस आदेश के बावजूद आरोपी ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश का प्रयास किया और पुलिस के साथ अभद्र व्यवहार किया।

जिलाबदर क्या होता है

जब कोई व्यक्ति किसी क्षेत्र में बार-बार आपराधिक गतिविधियाँ करता है और स्थानीय निवासियों को लगातार परेशानी होती है, तो जिला प्रशासन उसे उस क्षेत्र में प्रवेश से रोक देता है। यह प्रतिबंध आमतौर पर छह महीने से एक वर्ष तक का होता है। इस प्रक्रिया को जिलाबदर कहा जाता है।

पुलिस की कार्रवाई

आरोपी के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस से दुर्व्यवहार के आरोप में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है। आगे की जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल उठता है कि ऐसे आदेशों की ज़मीनी निगरानी कितनी प्रभावी है। जिलाबदर की प्रक्रिया स्थानीय समुदायों को अस्थायी राहत देने के लिए बनी है, लेकिन बिना पर्याप्त निगरानी तंत्र के यह महज कागज़ी कार्रवाई बनकर रह जाती है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और मामला दर्ज करना सकारात्मक है, किंतु दीर्घकालिक समाधान के लिए आदेश के क्रियान्वयन को मज़बूत करना ज़रूरी है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिलाबदर आदेश क्या होता है और यह कब जारी किया जाता है?
जब कोई व्यक्ति किसी क्षेत्र में बार-बार आपराधिक गतिविधियाँ कर स्थानीय निवासियों को परेशान करता है, तो जिला प्रशासन उसे उस क्षेत्र में प्रवेश से रोक देता है। यह प्रतिबंध आमतौर पर छह महीने से एक वर्ष तक का होता है और मुंबई पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 56 के तहत जारी किया जाता है।
दौंड में आरोपी पर कौन-से आरोप लगाए गए हैं?
आरोपी पर जिलाबदर आदेश का उल्लंघन करने, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश का प्रयास करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस के साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप हैं। हेड कांस्टेबल मखरे ने मामला दर्ज किया है।
आरोपी को किन-किन जिलों से जिलाबदर किया गया था?
उपविभागीय दंडाधिकारी रेवणनाथ लबडे के आदेश के तहत आरोपी को पुणे, सोलापुर, सातारा और अहिल्यानगर — इन चार जिलों से एक वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया गया था।
यह घटना दौंड में कहाँ हुई?
यह घटना सरपंचवस्ती क्षेत्र में पुष्पलक्ष्मी हॉस्पिटल से बोरावकेनगर की ओर जाने वाले पुराने सब्जी मंडी रोड के किनारे हुई। शिकायतकर्ता निखिल बालासाहेब जाधव ने इसकी जानकारी दी।
इस मामले की जाँच कौन कर रहा है?
हवलदार भोसले इस मामले की जाँच कर रहे हैं। हेड कांस्टेबल मखरे ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और पुलिस ने कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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