जल जीवन मिशन घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री महेश जोशी को एसीबी मामले में दी नियमित जमानत
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2026 को राजस्थान के पूर्व जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले से जुड़े एसीबी मामले में नियमित जमानत दे दी। शीर्ष अदालत ने सह-आरोपी मुकेश पाठक को भी इसी आदेश के तहत राहत प्रदान की। यह मामला ₹900 करोड़ से अधिक के सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और पृष्ठभूमि
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने 12 अक्टूबर 2026 को जोशी की जमानत याचिका पर दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने अब वह आरक्षित फैसला सुनाते हुए जमानत मंजूर की। इससे पहले अगस्त 2026 में राजस्थान उच्च न्यायालय ने जस्टिस विपिन गुप्ता की एकल पीठ के माध्यम से जोशी सहित आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएँ यह कहते हुए खारिज कर दी थीं कि आरोप गंभीर हैं और राज्य के खजाने पर भारी वित्तीय असर पड़ा है। पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल भी उन आठ आरोपियों में शामिल थे जिन्हें उच्च न्यायालय ने राहत देने से इनकार किया था।
मुख्य घटनाक्रम: गिरफ्तारियों की कालक्रम
जोशी की कानूनी मुश्किलें लंबे समय से एकाधिक जाँच एजेंसियों के सामने चल रही कार्यवाहियों से जुड़ी रही हैं। अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। लगभग सात महीने हिरासत में बिताने के बाद 3 दिसंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें ईडी मामले में नियमित जमानत दे दी थी, जिसमें अदालत ने उनकी उम्र — उस समय 71 वर्ष — और जेल में बिताए समय को ध्यान में रखा था।
इसके बाद 7 मई 2026 को राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने उन्हें उनके जयपुर स्थित आवास से पुनः गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी भ्रष्टाचार के एक अलग मामले में हुई, जो ₹900 करोड़ से अधिक के टेंडरों में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी से संबंधित था। तब से वह एसीबी मामले में न्यायिक हिरासत में थे।
जल जीवन मिशन और आरोपों की प्रकृति
जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की वह महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को चालू नल-जल कनेक्शन उपलब्ध कराना है। राजस्थान में इस योजना को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर खर्च किया। जाँच एजेंसियों ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि ठेके देने में जाली दस्तावेजों का उपयोग किया गया, कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया और अधिकारियों तथा बिचौलियों द्वारा रिश्वत ली गई। इसके अतिरिक्त, परियोजनाओं में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों की जाँच ईडी और एसीबी अपने-अपने मामलों के तहत अलग-अलग कर रही हैं।
जमानत का अर्थ और आगे की राह
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने का अर्थ दोषमुक्ति नहीं है। जोशी के विरुद्ध लगाए गए आरोप न्यायिक कार्यवाही का हिस्सा बने रहेंगे और मुकदमा अपनी गति से आगे बढ़ेगा। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद पिछली सरकार के कार्यकाल से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले राजनीतिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर सक्रिय हैं। ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग मामला पहले से अलग ट्रैक पर चल रहा है, जिसमें जोशी को पहले ही जमानत मिल चुकी है।