जेजेएम घोटाला: राजस्थान हाईकोर्ट ने महेश जोशी की गिरफ्तारी चुनौती याचिका खारिज की, न्यायिक हिरासत बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान हाईकोर्ट ने 12 जून 2026 को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) मंत्री महेश जोशी को कथित जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में कोई राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए उनकी न्यायिक हिरासत को बरकरार रखा। यह फैसला राजस्थान के चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
हाईकोर्ट का फैसला और खंडपीठ की टिप्पणी
न्यायमूर्ति उमाशंकर व्यास और न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने महेश जोशी के पुत्र रोहित जोशी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की गिरफ्तारी प्रक्रिया को अवैध बताया गया था। खंडपीठ ने विशेष अदालत के उस आदेश को भी सही ठहराया, जिसमें पहले ही गिरफ्तारी को वैध करार दिया गया था।
याचिकाकर्ता की दलीलें
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमन अग्रवाल और नेहा गोयल ने तर्क दिया कि 7 मई को जयपुर स्थित आवास से महेश जोशी की गिरफ्तारी के दौरान एसीबी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों का पालन नहीं किया। उनका कहना था कि परिवार को गिरफ्तारी के कारणों की लिखित जानकारी समय पर नहीं दी गई, जो कानून के तहत अनिवार्य है। इसी आधार पर महेश जोशी की तत्काल रिहाई की मांग की गई थी।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद और अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने अदालत में कहा कि गिरफ्तारी पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी तरीके से की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के समय परिवार के सदस्य मौजूद थे और उन्हें कार्रवाई की पूरी जानकारी थी। इसके अलावा, जांच अधिकारियों ने रोहित जोशी को फोन के माध्यम से भी लगातार सूचित किया था कि महेश जोशी को एसीबी मुख्यालय ले जाया जा रहा है और बाद में उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया।
जेजेएम घोटाले की पृष्ठभूमि
यह मामला वर्ष 2021 में तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल के दौरान जल जीवन मिशन के तहत हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, श्री श्याम ट्यूबवेल और श्री गणपति ट्यूबवेल सहित कुछ निजी कंपनियों ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इरकॉन के कथित फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर पीएचईडी के करीब ₹960 करोड़ के ठेके हासिल किए। एसीबी का आरोप है कि इन कंपनियों ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए ठेके प्राप्त किए। गौरतलब है कि एसीबी और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में टेंडर पास कराने और नियमों की अनदेखी के बदले कथित रिश्वत और कमीशन के लेनदेन के भी संकेत मिले हैं।
आगे क्या होगा
महेश जोशी फिलहाल एसीबी और ईडी — दोनों एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं। एसीबी जहाँ जल जीवन मिशन के ठेकों में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है, वहीं ईडी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत समानांतर मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है। हाईकोर्ट द्वारा हस्तक्षेप से इनकार किए जाने के बाद अब महेश जोशी के लिए कानूनी राहत के विकल्प और सीमित हो गए हैं।