राजस्थान ACB ने JJM घोटाले में महेश जोशी के खिलाफ 3,000 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान की भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) ने कथित ₹20,000 करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में 1 जुलाई 2026 को एक अहम कदम उठाते हुए पूर्व लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) मंत्री महेश जोशी और निजी व्यक्ति संजय बडाया के खिलाफ लगभग 3,000 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया। यह आरोपपत्र विशेष ACB न्यायाधीश राजेश कुमार दादिया की अदालत में प्रस्तुत किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह इस मामले में दाखिल पहला आरोपपत्र नहीं है। इससे पहले ACB पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सुबोध अग्रवाल सहित 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। एजेंसी जाँच की प्रगति के साथ-साथ चरणबद्ध तरीके से आरोप-पत्र दाखिल कर रही है और आगे पूरक आरोपपत्र दाखिल किए जाने की संभावना भी जताई गई है।
राज्य सरकार की ओर से पेश हुईं लोक अभियोजक मंजुला जैन ने अदालत को सूचित किया कि जाँच अभी जारी है और अभी तक पूरी नहीं हुई है। ACB के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत निविदा प्रक्रिया, ठेका आवंटन और वित्तीय लेनदेन में कथित अनियमितताओं की जाँच चल रही है।
आरोपियों की स्थिति
पूर्व मंत्री महेश जोशी, संजय बडाया, दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, विशाल सक्सेना, डीके गौर, महेंद्र प्रकाश सोनी, मुकेश पाठक और निरिल कुमार — ये सभी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं आरोपी अरुण श्रीवास्तव को राजस्थान उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी है। इसके अलावा जितेंद्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं और उन्हें पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
उच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ
गौरतलब है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने हाल ही में पूर्व मंत्री महेश जोशी के पुत्र रोहित जोशी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उनके पिता की गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिका खारिज करते हुए न्यायालय ने ACB और विशेष न्यायाधीश दोनों के खिलाफ कड़ी टिप्पणियाँ कीं।
न्यायमूर्ति उमाशंकर व्यास और न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के कारणों को सूचित करने की संवैधानिक आवश्यकता का ठीक से पालन नहीं किया गया था और कुछ तथ्यों के साथ छेड़छाड़ किए जाने पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
आगे क्या होगा
जाँच एजेंसी के अनुसार, जाँच आगे बढ़ने पर पूरक आरोपपत्र दाखिल किए जा सकते हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में नए घटनाक्रम सामने आने की संभावना है। यह मामला राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है और न्यायालय की सख्त टिप्पणियों के बाद ACB की कार्यप्रणाली भी जाँच के दायरे में है।