जल जीवन मिशन घोटाला: विशेष अदालत ने महेश जोशी की गिरफ्तारी को वैध ठहराया, रिहाई याचिका खारिज
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में 9 जून 2026 को बड़ा कानूनी झटका लगा, जब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों की विशेष अदालत, जयपुर ने उनकी रिहाई याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तारी के दौरान संविधान और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों का पर्याप्त रूप से पालन किया।
अदालत का आदेश और मुख्य निष्कर्ष
विशेष न्यायाधीश राजेश कुमार दादिया ने अपने आदेश में कहा कि जोशी के परिवार के सदस्यों को गिरफ्तारी की सूचना समय पर मौखिक और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से दी गई थी। अदालत ने माना कि इन परिस्थितियों में गिरफ्तारी को अवैध नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि रिमांड सुनवाई के दौरान जोशी के अधिवक्ता उपस्थित थे और उन्होंने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा।
बचाव पक्ष की दलीलें
महेश जोशी की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि 7 मई को की गई गिरफ्तारी और उसके बाद पाँच दिन की पुलिस रिमांड के दौरान अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ। बचाव पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के 'विहान कुमार बनाम हरियाणा राज्य' मामले का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के कारणों की लिखित सूचना न परिवार को दी गई और न ही उसका कोई लिखित प्रमाण प्रस्तुत किया गया। इसी आधार पर तत्काल रिहाई की माँग की गई थी।
अभियोजन पक्ष का पक्ष
विशेष लोक अभियोजक मंजुला जैन ने अदालत को बताया कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में ACB की टीम गिरफ्तारी वारंट लेकर जोशी के आवास पहुँची थी। उस समय उनके पुत्र रोहित जोशी, पुत्रवधू और बड़ी बहन घर पर मौजूद थीं। अधिकारियों ने अपनी पहचान बताने के बाद कार्रवाई की जानकारी दी और जोशी को सुबह की दिनचर्या पूरी करने का समय देने के बाद ACB मुख्यालय ले जाकर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।
डिजिटल साक्ष्य और BNSS धारा 48
अभियोजन पक्ष के अनुसार, गिरफ्तारी की सूचना सबसे पहले फोन पर और बाद में व्हाट्सएप के माध्यम से रोहित जोशी को भेजी गई। इन संचार माध्यमों के स्क्रीनशॉट अदालत में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने कहा कि BNSS की धारा 48 का मूल उद्देश्य आरोपी के कानूनी बचाव के अधिकार की रक्षा करना है, और इस मामले में वह अधिकार सुनिश्चित किया गया।
आगे की राह
विशेष अदालत के इस आदेश के बाद महेश जोशी के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की जाँच ACB द्वारा सक्रिय रूप से की जा रही है। मामले की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।