राजस्थान हाई कोर्ट ने महेश जोशी समेत ८ आरोपियों की जमानत खारिज की, ₹२०,००० करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में सुनवाई जारी
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान हाई कोर्ट ने १३ अगस्त २०२६ को जल जीवन मिशन से जुड़े कथित ₹२०,००० करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व जल आपूर्ति मंत्री महेश जोशी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया, जिससे जोशी और अन्य आरोपियों को बड़ा झटका लगा है।
किन-किन की जमानत याचिका खारिज हुई
पूर्व मंत्री महेश जोशी के साथ-साथ अदालत ने पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल, संजय बडाया, महेंद्र प्रकाश सोनी, कृष्णदीप गुप्ता, संजीव कुमार गुप्ता, दिलीप कुमार गौर और मुकेश पाठक की जमानत याचिकाएँ भी एक साथ खारिज कर दीं। इस प्रकार कुल आठ आरोपियों को न्यायालय से राहत नहीं मिली।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला राजस्थान में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें कथित घोटाले की राशि लगभग ₹२०,००० करोड़ बताई जा रही है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जाली दस्तावेजों का उपयोग करके तय दरों पर निविदाएँ आवंटित की गईं और सरकारी पदों का दुरुपयोग किया गया। गौरतलब है कि महेश जोशी अप्रैल से दिसंबर २०२५ के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में भी रहे थे।
सरकार पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने अधिवक्ता नेहा गोयल, अमन अग्रवाल और विनोद कुमार शर्मा के साथ मिलकर राजस्थान सरकार का पक्ष रखा। राज्य सरकार ने तर्क दिया कि आरोपियों पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी पदों के दुरुपयोग के गंभीर आरोप हैं। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि महेश जोशी संबंधित विभाग के तत्कालीन प्रभारी मंत्री थे और कथित तौर पर अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत से काम कर रहे थे।
बचाव पक्ष के तर्क
महेश जोशी की ओर से अधिवक्ता स्नेहदीप ने तर्क दिया कि एफआईआर दर्ज होने के लगभग डेढ़ साल बाद उनके मुवक्किल को गिरफ्तार किया गया था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि ED की हिरासत के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने उनकी हिरासत नहीं माँगी थी। तत्कालीन एसई महेंद्र प्रकाश सोनी के अधिवक्ता सुधीर जैन ने दलील दी कि एक ही तथ्यों पर कई एफआईआर दर्ज की गईं और कॉन्ट्रैक्टिंग फर्म के निदेशकों को पहले ही राहत मिल चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि विस्तृत आरोपपत्र के कारण मुकदमे में काफी समय लग सकता है।
आगे क्या होगा
हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद सभी आठों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में बने रहेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की न्यायिक जाँच तेज़ हो रही है। आरोपी उच्चतम न्यायालय में अपील का रास्ता अपना सकते हैं, हालाँकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।