4 अगस्त 2026
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जल जीवन मिशन घोटाला: महेश जोशी की गिरफ्तारी पर याचिका खारिज, राजस्थान हाईकोर्ट ने ACB की प्रक्रियागत खामियाँ उजागर कीं

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जल जीवन मिशन घोटाला: महेश जोशी की गिरफ्तारी पर याचिका खारिज, राजस्थान हाईकोर्ट ने ACB की प्रक्रियागत खामियाँ उजागर कीं

सारांश

राजस्थान हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री महेश जोशी की रिहाई की याचिका खारिज कर दी — लेकिन साथ ही ACB के जवाबों को 'मनगढ़ंत' बताया और विशेष न्यायाधीश की 31 दिन की लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाई। याचिका खारिज, पर जाँच एजेंसी की साख पर सवाल।

मुख्य बातें

राजस्थान हाईकोर्ट ने 18 जून 2026 को पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज की।
याचिका पुत्र रोहित जोशी ने दायर की थी; आरोप — जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तारी असंवैधानिक है।
अदालत ने ACB के बाद में प्रस्तुत तथ्यों को प्रथमदृष्टया 'मनगढ़ंत' करार दिया।
विशेष न्यायाधीश ने गिरफ्तारी की वैधता पर आवेदन को 31 दिनों तक लंबित रखा — अदालत ने इसे 'गंभीर लापरवाही' बताया।
अदालत ने पुलिस व न्यायिक अधिकारियों के लिए अनुच्छेद 22(1) पर प्रशिक्षण और आदेश की प्रति गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजने का निर्देश दिया।

राजस्थान हाईकोर्ट ने 18 जून 2026 को पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी, साथ ही राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और संबंधित विशेष न्यायाधीश की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रक्रियागत आपत्तियाँ दर्ज कीं। यह याचिका जोशी के पुत्र रोहित जोशी ने दायर की थी, जिसमें जल जीवन मिशन से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में हुई गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्य न्यायाधीश उमाशंकर व्यास और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में बताना संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत एक संवैधानिक अनिवार्यता है। अदालत ने पाया कि ACB इस मामले में ऐसा कोई दस्तावेज़ रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं कर सकी जो यह सिद्ध करे कि महेश जोशी को गिरफ्तारी के वास्तविक आधार लिखित रूप में दिए गए थे।

अदालत ने रेखांकित किया कि केवल कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं है — 'गिरफ्तारी के आधार' और 'गिरफ्तारी के कारण' दो अलग-अलग कानूनी अवधारणाएँ हैं, और दोनों का अनुपालन अनिवार्य है।

ACB के जवाबों में विरोधाभास

हाईकोर्ट ने ACB के हलफनामों में स्पष्ट विरोधाभास नोट किया। एजेंसी ने पहले दावा किया कि गिरफ्तारी के आधार महेश जोशी को बताए गए थे, परंतु बाद में यह कहा गया कि यह जानकारी उनके परिवार को दी गई थी। अदालत ने टिप्पणी की कि बाद में प्रस्तुत किए गए अतिरिक्त तथ्य प्रथमदृष्टया 'मनगढ़ंत' प्रतीत होते हैं — यह एक असाधारण रूप से कड़ी न्यायिक भाषा है।

विशेष न्यायाधीश की कार्यवाही पर आपत्ति

हाईकोर्ट ने विशेष न्यायाधीश की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी आपत्ति जताई। अदालत के अनुसार, 7 मई को रिमांड कार्यवाही के दौरान ही गिरफ्तारी की वैधता को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन विशेष न्यायाधीश ने उस आवेदन को तत्काल निपटाने के बजाय लगभग 31 दिनों तक लंबित रखा। अदालत ने इसे 'गंभीर लापरवाही' करार दिया।

याचिका खारिज होने का आधार

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूँकि महेश जोशी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं, इसलिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से उनकी प्रारंभिक पुलिस गिरफ्तारी की वैधता की जाँच नहीं की जा सकती। यही तकनीकी आधार याचिका खारिज करने का कारण बना — अदालत ने प्रक्रियागत खामियाँ स्वीकार करने के बावजूद राहत देने से मना कर दिया।

प्रशिक्षण और अनुपालन के निर्देश

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों और अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी से जुड़े अधिकारों पर उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। आदेश की प्रति मुख्य न्यायाधीश और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजने का निर्देश दिया गया, ताकि आवश्यक अनुपालन सुनिश्चित हो सके। यह मामला राजस्थान में भ्रष्टाचार-रोधी जाँच प्रक्रियाओं की संवैधानिक जवाबदेही को लेकर एक महत्त्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ACB के जवाबों को 'मनगढ़ंत' बताना और विशेष न्यायाधीश की 31 दिन की निष्क्रियता को 'गंभीर लापरवाही' कहना — यह महज़ औपचारिक टिप्पणी नहीं है। यह राजस्थान की भ्रष्टाचार-रोधी जाँच प्रणाली की संरचनात्मक कमज़ोरी को उजागर करता है जहाँ गिरफ्तारी की शक्ति का प्रयोग संवैधानिक अनुशासन के बिना होता है। सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश दशकों पुराने हैं, फिर भी अनुपालन इतना कमज़ोर है कि अदालत को प्रशिक्षण के आदेश देने पड़ रहे हैं — यह जवाबदेही की नहीं, जवाबदेही की अनुपस्थिति की कहानी है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महेश जोशी को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
पूर्व मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने गिरफ्तार किया है। वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका क्यों खारिज की?
हाईकोर्ट ने याचिका इस आधार पर खारिज की कि महेश जोशी न्यायिक हिरासत में हैं, इसलिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से उनकी प्रारंभिक पुलिस गिरफ्तारी की वैधता की जाँच नहीं की जा सकती। हालाँकि अदालत ने ACB की प्रक्रियागत खामियों को स्वीकार किया।
हाईकोर्ट ने ACB की कार्यप्रणाली पर क्या टिप्पणी की?
अदालत ने पाया कि ACB गिरफ्तारी के लिखित आधार देने का दस्तावेज़ रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं कर सकी, जो अनुच्छेद 22(1) की संवैधानिक अनिवार्यता है। इसके अलावा ACB के बाद में प्रस्तुत तथ्यों को अदालत ने प्रथमदृष्टया 'मनगढ़ंत' बताया।
विशेष न्यायाधीश पर हाईकोर्ट ने क्या आपत्ति जताई?
हाईकोर्ट ने कहा कि 7 मई को रिमांड कार्यवाही के दौरान गिरफ्तारी की वैधता पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन विशेष न्यायाधीश ने उस आवेदन को लगभग 31 दिनों तक लंबित रखा। अदालत ने इसे 'गंभीर लापरवाही' करार दिया।
इस आदेश के बाद आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति मुख्य न्यायाधीश और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों और अनुच्छेद 22(1) पर उचित प्रशिक्षण देने की आवश्यकता बताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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