राजगीर में मलमास मेला 2026 शुरू: सीएम सम्राट चौधरी ने ब्रह्मकुंड में किया उद्घाटन, 15 जून तक चलेगा महापर्व

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजगीर में मलमास मेला 2026 शुरू: सीएम सम्राट चौधरी ने ब्रह्मकुंड में किया उद्घाटन, 15 जून तक चलेगा महापर्व

सारांश

हर तीन साल में एक बार आने वाले मलमास में राजगीर फिर बना आस्था का केंद्र — सीएम सम्राट चौधरी ने ब्रह्मकुंड में उद्घाटन किया, 22 कुंड और 52 धाराओं में स्नान के लिए लाखों श्रद्धालुओं के उमड़ने की उम्मीद, 15 जून तक चलेगा महापर्व।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 17 मई 2026 को राजगीर के ब्रह्मकुंड परिसर में मलमास मेले का उद्घाटन किया।
मेला 15 जून 2026 तक चलेगा; प्रमुख शाही स्नान 27 मई , 31 मई और 11 जून को निर्धारित।
श्रद्धालु राजगीर के 22 कुंडों और 52 धाराओं में स्नान, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करेंगे।
हिंदू पंचांग के अनुसार मलमास (अधिमास) हर तीसरे वर्ष आता है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।
नालंदा जिला प्रशासन ने 11 स्थानों पर जर्मन हैंगर तकनीक के वाटरप्रूफ पंडाल और 3 स्थानों पर यात्री शेड तैयार किए हैं।

बिहार के नालंदा जिले के ऐतिहासिक नगर राजगीर में विश्व प्रसिद्ध मलमास मेला 2026 का शुभारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार, 17 मई 2026 को ब्रह्मकुंड परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और पारंपरिक ध्वजारोहण के बीच इस धार्मिक महापर्व का उद्घाटन किया। करीब एक माह तक चलने वाला यह मेला 15 जून 2026 तक आयोजित होगा।

मुख्यमंत्री ने किया व्यवस्थाओं का निरीक्षण

उद्घाटन के पश्चात मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ब्रह्मकुंड एवं मेला क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया और प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लिया। समारोह में अनेक राज्य मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि बिहार के पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के लिहाज से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है।

मलमास का धार्मिक और पौराणिक महत्त्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक तीसरे वर्ष आने वाले 13वें अधिक मास को मलमास या अधिमास कहा जाता है। मान्यता है कि इस पवित्र अवधि में स्वर्ग के समस्त 33 कोटि देवी-देवता अपने लोक को छोड़कर राजगीर में प्रवास करते हैं। इसी कारण देश के अन्य भागों में मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं, जबकि राजगीर की पावन भूमि पर स्नान, दान और पूजा-पाठ का फल अनंत गुना माना जाता है।

मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और तीर्थयात्री राजगीर में अवस्थित 22 कुंडों और 52 धाराओं में स्नान, ध्यान और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं। धार्मिक आस्था है कि इन कुंडों में डुबकी लगाने से पाप और कष्टों का निवारण होता है तथा आत्मशुद्धि का लाभ प्राप्त होता है।

प्रमुख स्नान पर्वों का कार्यक्रम

मेला अवधि के दौरान निर्धारित प्रमुख स्नान पर्व इस प्रकार हैं — 21 मई को पंचमी स्नान, 27 मई को प्रथम शाही स्नान, 31 मई को द्वितीय शाही स्नान, 5 जून को पंचमी स्नान, 11 जून को तृतीय शाही स्नान तथा 15 जून 2026 को अमावस्या स्नान एवं विसर्जन। ये तिथियाँ श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्त्व रखती हैं और इन दिनों भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध

पर्यटन विभाग और नालंदा जिला प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्थाएँ की हैं। 11 स्थानों पर जर्मन हैंगर तकनीक से निर्मित वाटरप्रूफ पंडाल तैयार किए गए हैं, जबकि 3 स्थानों पर बड़े यात्री शेड बनाए गए हैं। यह आयोजन बिहार में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

आगे क्या

आगामी हफ्तों में शाही स्नान पर्वों के दौरान राजगीर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए भी विशेष योजना तैयार की है, ताकि तीर्थयात्रियों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य के पर्यटन राजस्व और सांस्कृतिक पहचान का एक अहम पड़ाव है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार सरकार धार्मिक पर्यटन को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में प्रस्तुत कर रही है। गौरतलब है कि बुनियादी ढाँचे में जर्मन हैंगर तकनीक जैसे आधुनिक प्रयोग स्वागत योग्य हैं, लेकिन असली परीक्षा लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के दौरान स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था की होगी — जिसका लेखा-जोखा प्रशासन को पारदर्शी रूप से सामने रखना चाहिए।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मलमास मेला 2026 राजगीर में कब से कब तक चलेगा?
मलमास मेला 2026 राजगीर में 17 मई से 15 जून 2026 तक आयोजित होगा। इस दौरान कई प्रमुख शाही स्नान पर्व भी निर्धारित हैं।
मलमास मेला क्या है और यह क्यों खास है?
मलमास (अधिमास) हिंदू पंचांग का 13वाँ अतिरिक्त महीना है जो हर तीसरे वर्ष आता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में 33 कोटि देवी-देवता राजगीर में प्रवास करते हैं, जिससे यहाँ स्नान और दान का फल अनंत गुना माना जाता है।
मलमास मेला 2026 में शाही स्नान की तिथियाँ क्या हैं?
प्रमुख स्नान पर्व इस प्रकार हैं — 21 मई को पंचमी स्नान, 27 मई को प्रथम शाही स्नान, 31 मई को द्वितीय शाही स्नान, 5 जून को पंचमी स्नान, 11 जून को तृतीय शाही स्नान और 15 जून को अमावस्या स्नान एवं विसर्जन।
राजगीर में मलमास मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए क्या सुविधाएँ हैं?
नालंदा जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने 11 स्थानों पर जर्मन हैंगर तकनीक के वाटरप्रूफ पंडाल और 3 स्थानों पर बड़े यात्री शेड तैयार किए हैं। आधुनिक सुविधाओं के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है।
राजगीर में मलमास मेले के दौरान कितने कुंडों में स्नान होता है?
राजगीर में 22 कुंड और 52 धाराएँ हैं जहाँ मलमास के दौरान श्रद्धालु स्नान, ध्यान और पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इन कुंडों में डुबकी लगाने से पाप और कष्टों का निवारण होता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले