राजगीर में मलमास मेला 2026 शुरू: सीएम सम्राट चौधरी ने ब्रह्मकुंड में किया उद्घाटन, 15 जून तक चलेगा महापर्व
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के नालंदा जिले के ऐतिहासिक नगर राजगीर में विश्व प्रसिद्ध मलमास मेला 2026 का शुभारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार, 17 मई 2026 को ब्रह्मकुंड परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और पारंपरिक ध्वजारोहण के बीच इस धार्मिक महापर्व का उद्घाटन किया। करीब एक माह तक चलने वाला यह मेला 15 जून 2026 तक आयोजित होगा।
मुख्यमंत्री ने किया व्यवस्थाओं का निरीक्षण
उद्घाटन के पश्चात मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ब्रह्मकुंड एवं मेला क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया और प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लिया। समारोह में अनेक राज्य मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि बिहार के पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के लिहाज से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
मलमास का धार्मिक और पौराणिक महत्त्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक तीसरे वर्ष आने वाले 13वें अधिक मास को मलमास या अधिमास कहा जाता है। मान्यता है कि इस पवित्र अवधि में स्वर्ग के समस्त 33 कोटि देवी-देवता अपने लोक को छोड़कर राजगीर में प्रवास करते हैं। इसी कारण देश के अन्य भागों में मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं, जबकि राजगीर की पावन भूमि पर स्नान, दान और पूजा-पाठ का फल अनंत गुना माना जाता है।
मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और तीर्थयात्री राजगीर में अवस्थित 22 कुंडों और 52 धाराओं में स्नान, ध्यान और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं। धार्मिक आस्था है कि इन कुंडों में डुबकी लगाने से पाप और कष्टों का निवारण होता है तथा आत्मशुद्धि का लाभ प्राप्त होता है।
प्रमुख स्नान पर्वों का कार्यक्रम
मेला अवधि के दौरान निर्धारित प्रमुख स्नान पर्व इस प्रकार हैं — 21 मई को पंचमी स्नान, 27 मई को प्रथम शाही स्नान, 31 मई को द्वितीय शाही स्नान, 5 जून को पंचमी स्नान, 11 जून को तृतीय शाही स्नान तथा 15 जून 2026 को अमावस्या स्नान एवं विसर्जन। ये तिथियाँ श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्त्व रखती हैं और इन दिनों भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध
पर्यटन विभाग और नालंदा जिला प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्थाएँ की हैं। 11 स्थानों पर जर्मन हैंगर तकनीक से निर्मित वाटरप्रूफ पंडाल तैयार किए गए हैं, जबकि 3 स्थानों पर बड़े यात्री शेड बनाए गए हैं। यह आयोजन बिहार में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
आगे क्या
आगामी हफ्तों में शाही स्नान पर्वों के दौरान राजगीर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए भी विशेष योजना तैयार की है, ताकि तीर्थयात्रियों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।