राजगीर मलमास मेला 2026: टेंट सिटी और जर्मन हैंगर पंडाल तैयार, 17 मई से 15 जून तक आयोजन

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राजगीर मलमास मेला 2026: टेंट सिटी और जर्मन हैंगर पंडाल तैयार, 17 मई से 15 जून तक आयोजन

सारांश

राजगीर में मलमास मेला 2026 के लिए बिहार सरकार ने टेंट सिटी और जर्मन हैंगर पंडाल के रूप में 4,000 से अधिक श्रद्धालुओं की आवासन क्षमता तैयार की है। 17 मई से 15 जून तक चलने वाले इस मेले में तीन शाही स्नान और अमावस्या विसर्जन समेत कई प्रमुख धार्मिक आयोजन निर्धारित हैं।

मुख्य बातें

राजगीर मलमास मेला 2026 का आयोजन 17 मई से 15 जून 2026 तक होगा।
टेंट सिटी और जर्मन हैंगर पंडाल में कुल 4,000 से अधिक श्रद्धालुओं की आवासन क्षमता तैयार की गई है।
मेले में 27 मई, 31 मई और 11 जून को तीन शाही स्नान तथा 15 जून को अमावस्या स्नान एवं विसर्जन निर्धारित है।
सभी पंडालों में सीसीटीवी, हेल्थ कैंप, पेयजल और सस्ती रोटी काउंटर जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
पीएचईडी कैम्पस , किला मैदान सहित 10 से अधिक पार्किंग स्थल चिन्हित किए गए हैं।

बिहार सरकार के पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन, नालंदा ने राजगीर मलमास मेला 2026 के लिए तैयारियाँ पूर्ण कर ली हैं। यह मेला 17 मई से 15 जून 2026 तक आयोजित होगा और देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के स्वागत के लिए व्यापक आवासन व सुविधा-व्यवस्था की गई है। राजगीर की प्राचीन धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक यह मेला हर बार अपार आस्था का केंद्र बनता है।

मलमास मेले का धार्मिक महत्व

भारतीय पंचांग के अनुसार अधिमास — जिसे मलमास भी कहा जाता है — अत्यंत पवित्र अवधि मानी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस काल में देवी-देवताओं का राजगीर में निवास एवं विचरण होता है। इसी आस्था के चलते साधु-संत, तीर्थयात्री और श्रद्धालु पूरे माह यहाँ प्रवास करते हैं तथा 22 कुण्डों और 52 धाराओं में स्नान, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।

मुख्य स्नान एवं आयोजन कार्यक्रम

मेले का शुभारंभ 17 मई को ध्वजारोहण, देवी-देवताओं के आवाहन एवं पूजन के साथ होगा। इसके बाद की प्रमुख तिथियाँ इस प्रकार हैं — 21 मई को पंचमी स्नान, 27 मई को प्रथम शाही स्नान, 31 मई को द्वितीय शाही स्नान, 5 जून को पंचमी स्नान, 11 जून को तृतीय शाही स्नान और 15 जून 2026 को अमावस्या स्नान एवं विसर्जन।

टेंट सिटी और जर्मन हैंगर पंडाल की व्यवस्था

पर्यटन विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने 16 मई को बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए टेंट सिटी और जर्मन हैंगर पंडाल तैयार किए गए हैं। राजगीर स्टेट गेस्ट हाउस के निकट 2,000 व्यक्तियों की आवासन क्षमता वाला जर्मन हैंगर पंडाल बनाया गया है। इसके अतिरिक्त राजगीर रेलवे स्टेशन परिसर, ब्रह्मकुंड के निकट और मेला थाना के पास 1,000-1,000 व्यक्तियों की क्षमता वाले अलग-अलग पंडाल स्थापित किए गए हैं।

इन सभी स्थलों पर चेंजिंग रूम, स्नानघर, पुरुष एवं महिला शौचालय, पेयजल, कंट्रोल रूम, सीसीटीवी कैमरे, हेल्थ कैंप तथा सस्ती रोटी काउंटर जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा 10 मिनी राजवाड़ी टेंट, विभिन्न स्थलों पर जर्मन यात्री शेड और वाटरप्रूफ पंडाल की भी व्यवस्था की गई है।

पार्किंग और यातायात प्रबंधन

श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए पीएचईडी कैम्पस, विश्वशांति स्तूप के निकट, किला मैदान, आरडीएच हाई स्कूल मैदान, पीटीजेएम कॉलेज, हॉकी मैदान, सोन भंडार, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, गौरक्षणी और मेयार बाईपास सहित अनेक पार्किंग स्थल चिन्हित किए गए हैं।

सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी

मेला क्षेत्र में सुरक्षा, चिकित्सा, अग्निशमन और प्रशासनिक सहायता के साथ-साथ पर्यटक सूचना केंद्र में गाइड की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। पर्यटन विभाग के विशेष सचिव सह निदेशक उदयन मिश्रा ने श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और राजगीर की पावन, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखने में सहयोग दें। यह मेला धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में बिहार सरकार के प्रयासों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जर्मन हैंगर और व्यापक पार्किंग व्यवस्था — धार्मिक पर्यटन को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। गौरतलब है कि राजगीर जैसे तीर्थस्थल पर भीड़ प्रबंधन और स्वच्छता पिछले वर्षों में चुनौती बनी रही है। असली परीक्षा यह होगी कि ये सुविधाएँ मेले के चरम दिनों — विशेषकर शाही स्नान की तिथियों — पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं, जब श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजगीर मलमास मेला 2026 कब से कब तक चलेगा?
राजगीर मलमास मेला 2026 का आयोजन 17 मई से 15 जून 2026 तक होगा। मेले का शुभारंभ 17 मई को ध्वजारोहण और देवी-देवताओं के आवाहन के साथ होगा और समापन 15 जून को अमावस्या स्नान एवं विसर्जन के साथ।
मलमास मेले में शाही स्नान की तिथियाँ क्या हैं?
मलमास मेला 2026 में तीन शाही स्नान निर्धारित हैं — 27 मई को प्रथम, 31 मई को द्वितीय और 11 जून को तृतीय शाही स्नान। इसके अलावा 21 मई और 5 जून को पंचमी स्नान तथा 15 जून को अमावस्या स्नान भी होगा।
राजगीर मलमास मेले में श्रद्धालुओं के लिए रहने की क्या व्यवस्था है?
बिहार पर्यटन विभाग ने राजगीर स्टेट गेस्ट हाउस के पास 2,000 और रेलवे स्टेशन परिसर, ब्रह्मकुंड व मेला थाना के पास 1,000-1,000 व्यक्तियों की क्षमता वाले जर्मन हैंगर पंडाल बनाए हैं। इसके अतिरिक्त टेंट सिटी और मिनी राजवाड़ी टेंट भी उपलब्ध हैं।
मलमास मेले में मलमास का धार्मिक महत्व क्या है?
भारतीय पंचांग के अनुसार अधिमास (मलमास) को अत्यंत पवित्र माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस अवधि में देवी-देवताओं का राजगीर में निवास होता है, इसीलिए श्रद्धालु यहाँ के 22 कुण्डों और 52 धाराओं में स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
राजगीर मलमास मेले में वाहन पार्किंग की व्यवस्था कहाँ है?
मेले के लिए पीएचईडी कैम्पस, विश्वशांति स्तूप के निकट, किला मैदान, आरडीएच हाई स्कूल मैदान, पीटीजेएम कॉलेज, हॉकी मैदान, सोन भंडार, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, गौरक्षणी और मेयार बाईपास सहित अनेक पार्किंग स्थल चिन्हित किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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