ममता बनर्जी ने केरल के नाम पर दी बधाई, 'बांग्ला' नाम को लेकर केंद्र से की नाराजगी व्यक्त
सारांश
Key Takeaways
- ममता बनर्जी ने केरल के नाम पर खुशी जताई है।
- 'बांग्ला' नाम बदलने की मांग लंबित है।
- पश्चिम बंगाल विधानसभा ने इस संबंध में दो बार प्रस्ताव पारित किए हैं।
- केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं की।
- ममता ने केंद्र सरकार पर बंगाली विरोधी होने का आरोप लगाया।
कोलकाता, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के निर्णय पर खुशी व्यक्त की है, जिसमें केरल का आधिकारिक नाम 'केरलम' रखा गया है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर नाराजगी भी जताई कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर 'बांग्ला' करने का प्रस्ताव अभी तक लंबित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे केरल के लोगों को इस फैसले पर हार्दिक बधाई देती हैं, क्योंकि यह राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने वाला है।
उन्होंने कहा, "कई राज्यों के नाम तब बदले जाते हैं, जब उनकी सरकारें ऐसे प्रस्ताव लाती हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल के मामले में ऐसा नहीं हुआ।" उन्होंने अपनी पुरानी शिकायत को दोहराते हुए बताया कि राज्य का नाम 'पश्चिम बंगाल' होने के कारण इसे अंग्रेजी वर्णमाला में ‘डब्ल्यू’ से शुरू किया गया है, जिससे कई बार उन्हें और छात्रों को आखिरी नंबर पर बोलना पड़ता है।
उन्होंने कहा, "मैं भी यही समस्या झेलती हूं। मीटिंग्स में मुझे अंत में बोलने का मौका मिलता है, क्योंकि मैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हूं।"
मुख्यमंत्री ने बताया कि नाम बदलकर 'बांग्ला' करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा ने इस संबंध में दो बार प्रस्ताव पारित किए हैं। जब केंद्र ने कहा कि राज्य का नाम हिंदी, बंगाली और अंग्रेजी में एक समान होना चाहिए, तो विधानसभा ने तीनों भाषाओं में 'बांग्ला' नाम को मंजूरी दी। ममता ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से कई बार व्यक्तिगत रूप से इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया, "मुझे आश्चर्य है कि केंद्र इसे मंजूरी क्यों नहीं दे रहा। मुझे ऐसा लगता है कि वे बंगाली विरोधी हैं। चुनावों में वे केवल वोट के लिए ‘बांग्ला’ शब्द का उपयोग करते हैं, लेकिन नाम बदलने की अनुमति नहीं देते।"
ममता बनर्जी ने केरल के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि यह निर्णय तब आया जब भाजपा और सीपीआईएम के बीच गठबंधन बढ़ रहा था। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, "आज के बाद यह गठबंधन बिना लिखे नहीं रहेगा। बंगाल को हमेशा कमी का सामना क्यों करना पड़ेगा?"
ममता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "एक दिन भाजपा सत्ता में नहीं रहेंगे। हम नाम बदलवा लेंगे।" उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए और राज्य की भाषाई-सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए केंद्र को तुरंत कदम उठाने चाहिए।