मतुआ शरणार्थियों को जमीन-मकान और रिहाई का वादा: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 1 नवंबर 2026 को घोषणा की कि बांग्लादेश से आए मतुआ शरणार्थी, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार के दौरान जेल में बंद किया गया था, उन्हें शीघ्र रिहा किया जाएगा और राज्य में जमीन व आवास उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने 31 दिसंबर 2026 तक इन शरणार्थियों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता प्रमाणपत्र देने का भी वादा किया।
ठाकुरबाड़ी में किए गए ऐलान
मुख्यमंत्री अधिकारी ने ये वादे उत्तरी 24 परगना जिले के बांगांव स्थित ठाकुरनगर के ऐतिहासिक ठाकुरबाड़ी — मतुआ नेतृत्व का पैतृक घर — में दूसरे अंतर्राष्ट्रीय मतुआ गोसाई सम्मेलन को संबोधित करते हुए किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर 24 परगना के बांगांव और बारासात तथा नादिया जिले के राणाघाट में किसी सुधारगृह में बिना मुकदमे के बंद मतुआ शरणार्थियों को सम्मानपूर्वक रिहा किया जाएगा।
मतुआ समुदाय की पृष्ठभूमि
मतुआ एक पिछड़े वर्ग का हिंदू समुदाय है, जो मूलतः पूर्व पूर्वी पाकिस्तान अर्थात वर्तमान बांग्लादेश से आया है। स्वतंत्रता के बाद से यह समुदाय समय-समय पर पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में बसता रहा है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद वहाँ के हिंदू भाइयों — जिनमें कई मतुआ समुदाय के लोग थे — को भारी अत्याचारों का सामना करना पड़ा।
CAA नागरिकता और मतदाता सूची
अधिकारी ने कहा कि इन शरणार्थियों को पहले CAA के तहत नागरिकता दी जाएगी और उसके बाद उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 1 सितंबर 2025 के उस वादे का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 31 दिसंबर 2024 तक बांग्लादेश छोड़कर भारत में प्रवेश करने वालों को पुलिस द्वारा छुआ तक नहीं जाएगा।
विपक्ष और SIR पर हमला
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विपक्षी दलों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के मुद्दे पर चल रहे सीजेपी के आंदोलन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'देश और राज्य को अस्थिर करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हम उनके खिलाफ लड़ेंगे। हिंदू अपनी ही धरती पर दोबारा शरणार्थी नहीं बनेंगे।'
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की नीतियाँ मतुआ समुदाय के समर्थन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं। 31 दिसंबर 2026 की समयसीमा और CAA प्रमाणपत्र वितरण की प्रक्रिया इस वादे की व्यावहारिक परीक्षा होगी। राज्य सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह शीघ्र ही रिहाई और पुनर्वास की रूपरेखा स्पष्ट करेगी।