2 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मतुआ शरणार्थियों को जमीन-मकान और रिहाई का वादा: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का ऐलान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मतुआ शरणार्थियों को जमीन-मकान और रिहाई का वादा: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का ऐलान

सारांश

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने ठाकुरनगर में मतुआ सम्मेलन से बड़े वादे किए — जेल में बंद शरणार्थियों की रिहाई, जमीन-मकान और 31 दिसंबर तक CAA नागरिकता। TMC शासन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा: 'हिंदू अपनी धरती पर दोबारा शरणार्थी नहीं बनेंगे।'

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 1 नवंबर 2026 को ठाकुरनगर में मतुआ शरणार्थियों को रिहाई, जमीन और मकान देने का वादा किया।
उत्तर 24 परगना के बांगांव, बारासात और नादिया के राणाघाट के सुधारगृहों में बिना मुकदमे बंद शरणार्थियों को सम्मानपूर्वक रिहा किया जाएगा।
31 दिसंबर 2026 तक CAA के तहत नागरिकता प्रमाणपत्र देने और उसके बाद मतदाता सूची में नाम दर्ज करने का वादा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 1 सितंबर 2025 के वादे का हवाला — 31 दिसंबर 2024 तक बांग्लादेश से आए लोगों को पुलिस नहीं छुएगी।
अधिकारी ने SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग पर सीजेपी के आंदोलन की आलोचना की।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 1 नवंबर 2026 को घोषणा की कि बांग्लादेश से आए मतुआ शरणार्थी, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार के दौरान जेल में बंद किया गया था, उन्हें शीघ्र रिहा किया जाएगा और राज्य में जमीन व आवास उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने 31 दिसंबर 2026 तक इन शरणार्थियों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता प्रमाणपत्र देने का भी वादा किया।

ठाकुरबाड़ी में किए गए ऐलान

मुख्यमंत्री अधिकारी ने ये वादे उत्तरी 24 परगना जिले के बांगांव स्थित ठाकुरनगर के ऐतिहासिक ठाकुरबाड़ी — मतुआ नेतृत्व का पैतृक घर — में दूसरे अंतर्राष्ट्रीय मतुआ गोसाई सम्मेलन को संबोधित करते हुए किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर 24 परगना के बांगांव और बारासात तथा नादिया जिले के राणाघाट में किसी सुधारगृह में बिना मुकदमे के बंद मतुआ शरणार्थियों को सम्मानपूर्वक रिहा किया जाएगा।

मतुआ समुदाय की पृष्ठभूमि

मतुआ एक पिछड़े वर्ग का हिंदू समुदाय है, जो मूलतः पूर्व पूर्वी पाकिस्तान अर्थात वर्तमान बांग्लादेश से आया है। स्वतंत्रता के बाद से यह समुदाय समय-समय पर पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में बसता रहा है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद वहाँ के हिंदू भाइयों — जिनमें कई मतुआ समुदाय के लोग थे — को भारी अत्याचारों का सामना करना पड़ा।

CAA नागरिकता और मतदाता सूची

अधिकारी ने कहा कि इन शरणार्थियों को पहले CAA के तहत नागरिकता दी जाएगी और उसके बाद उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 1 सितंबर 2025 के उस वादे का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 31 दिसंबर 2024 तक बांग्लादेश छोड़कर भारत में प्रवेश करने वालों को पुलिस द्वारा छुआ तक नहीं जाएगा।

विपक्ष और SIR पर हमला

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विपक्षी दलों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के मुद्दे पर चल रहे सीजेपी के आंदोलन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'देश और राज्य को अस्थिर करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हम उनके खिलाफ लड़ेंगे। हिंदू अपनी ही धरती पर दोबारा शरणार्थी नहीं बनेंगे।'

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की नीतियाँ मतुआ समुदाय के समर्थन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं। 31 दिसंबर 2026 की समयसीमा और CAA प्रमाणपत्र वितरण की प्रक्रिया इस वादे की व्यावहारिक परीक्षा होगी। राज्य सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह शीघ्र ही रिहाई और पुनर्वास की रूपरेखा स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और BJP ने 2021 के बाद से इस वर्ग को साधने में भारी निवेश किया है। CAA प्रमाणपत्र और मतदाता सूची में नाम जोड़ने की क्रमबद्धता बताती है कि यह सिर्फ पुनर्वास नहीं, एक दीर्घकालिक चुनावी रणनीति भी है। असली कसौटी यह होगी कि 31 दिसंबर की समयसीमा कागज़ों से ज़मीन तक कितनी पहुँचती है — पिछले कई वादे इसी दूरी में खो गए।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मतुआ शरणार्थियों को किन सुधारगृहों से रिहा किया जाएगा?
मुख्यमंत्री अधिकारी के अनुसार उत्तर 24 परगना के बांगांव और बारासात तथा नादिया जिले के राणाघाट में स्थित सुधारगृहों में बिना मुकदमे बंद मतुआ शरणार्थियों को सम्मानपूर्वक रिहा किया जाएगा। उन्हें जमीन और मकान भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
मतुआ समुदाय को CAA नागरिकता कब तक मिलेगी?
मुख्यमंत्री अधिकारी ने 31 दिसंबर 2026 तक मतुआ समुदाय के लोगों को CAA प्रमाणपत्र देने का वादा किया है। नागरिकता मिलने के बाद उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज किए जाएंगे।
मतुआ समुदाय कौन है और वे पश्चिम बंगाल में क्यों आए?
मतुआ एक पिछड़े वर्ग का हिंदू समुदाय है जो मूलतः पूर्व पूर्वी पाकिस्तान अर्थात वर्तमान बांग्लादेश से है। स्वतंत्रता के बाद से यह समुदाय समय-समय पर सांप्रदायिक तनाव और उत्पीड़न के कारण पश्चिम बंगाल में बसता रहा है।
TMC की पिछली सरकार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
मुख्यमंत्री अधिकारी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC की पिछली सरकार ने मतुआ समुदाय सहित कई हिंदू शरणार्थियों को चुनिंदा रूप से गिरफ्तार किया था। इन शरणार्थियों को बिना मुकदमे के सुधारगृहों में बंद रखा गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मतुआ शरणार्थियों के बारे में क्या कहा था?
1 सितंबर 2025 को गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया था कि 31 दिसंबर 2024 तक बांग्लादेश छोड़कर भारत में प्रवेश करने वाले लोगों को पुलिस द्वारा छुआ तक नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री अधिकारी ने इसी वादे को अपने भाषण में आधार बनाया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले