2 अगस्त 2026
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सीएए लागू नहीं हुआ तो बयानबाजी बेकार — सुवेंदु अधिकारी पर सौगत रॉय का तीखा पलटवार

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सीएए लागू नहीं हुआ तो बयानबाजी बेकार — सुवेंदु अधिकारी पर सौगत रॉय का तीखा पलटवार

सारांश

सीएए पास हुए साल बीत गए, लागू नहीं हुआ — TMC सांसद सौगत रॉय ने सुवेंदु अधिकारी की छह महीने में आवेदन निपटाने की घोषणा को खोखला बताया। साथ ही तसलीमा नसरीन की कोलकाता वापसी पर कहा — सुरक्षा मिले तो स्वागत है।

मुख्य बातें

TMC सांसद सौगत रॉय ने 2 अगस्त 2026 को सुवेंदु अधिकारी के सीएए बयान को निरर्थक बताया।
अधिकारी ने न्यू टाउन कार्यक्रम में घोषणा की थी कि सीएए के लंबित आवेदन छह महीने में निपटाए जाएंगे।
उत्तर 24 परगना के मतुआ समुदाय के करीब 300 लोगों को नागरिकता प्रमाणपत्र वितरित किए गए।
बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन रवींद्र सदन कार्यक्रम में कोलकाता लौटीं; अधिकारी ने उन्हें सम्मानित लेखिका बताया।
सौगत रॉय ने नसरीन की वापसी का स्वागत किया, लेकिन सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री पर डाली।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने 2 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) संबंधी बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। रॉय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीएए कानून वर्षों पहले संसद में पारित हो चुका है, परंतु अब तक ज़मीन पर लागू नहीं हुआ, इसलिए इस तरह की घोषणाओं का कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं है।

सौगत रॉय का सीधा वार

सौगत रॉय ने सुवेंदु अधिकारी के सीएए नागरिकता प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम पर तंज कसते हुए कहा, 'वे कुछ नहीं कर पाएंगे। सीएए कानून कई साल पहले पास हुआ था, लेकिन अब तक लागू नहीं हुआ है। इसलिए इस तरह के बयान देने का कोई मतलब नहीं है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कोलकाता में सीएए के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है।

सुवेंदु अधिकारी का कार्यक्रम और दावे

इससे पहले शनिवार को न्यू टाउन में आयोजित सीएए नागरिकता प्रमाणपत्र वितरण समारोह में सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि राज्य में सीएए के तहत नागरिकता के लिए लंबित सभी आवेदन अगले छह महीने में निपटा दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि यह कानून नागरिकता देने के लिए बनाया गया है, छीनने के लिए नहीं। इस कार्यक्रम में उत्तर 24 परगना जिले के मतुआ समुदाय के करीब 300 लोगों को नागरिकता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

अधिकारी ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार ने 'राजनीतिक लाभ' के लिए सीएए को लेकर जनता में भ्रम फैलाया था। गौरतलब है कि मतुआ समुदाय पश्चिम बंगाल में एक महत्वपूर्ण मतदाता वर्ग है, और सीएए उनके लिए भावनात्मक रूप से संवेदनशील मुद्दा रहा है।

तसलीमा नसरीन की वापसी पर रॉय की प्रतिक्रिया

बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन के कोलकाता लौटने के मुद्दे पर भी सौगत रॉय ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'यह अच्छी बात है। सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि तसलीमा नसरीन एक अच्छी कवि और अच्छी लेखिका हैं। वह काफी समय से बंगाल नहीं आई थीं, अगर वह फिर आएं और लोगों से बातचीत करें तो यह सबके लिए खुशी की बात होगी। मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है, उनको सुरक्षा देना। अगर सुरक्षा देंगे तो अच्छा है।'

शुक्रवार को रवींद्र सदन में 'सेक्युलर मिशन, ह्यूमन राइट्स बियॉन्ड फ्रंटियर्स फाउंडेशन' द्वारा आयोजित कार्यक्रम में तसलीमा नसरीन ने कहा था कि इस्लाम की आलोचना करना मुसलमानों पर हमला नहीं है, और मुस्लिम समुदाय में सुधार, विकास एवं आज़ादी लाना ज़रूरी है। उस कार्यक्रम में सुवेंदु अधिकारी भी उपस्थित थे।

अधिकारी ने नसरीन को बताया सम्मानित लेखिका

उस कार्यक्रम में अधिकारी ने तसलीमा नसरीन की प्रशंसा करते हुए कहा था, 'नसरीन जब चाहें और जितनी बार चाहें शहर आ सकती हैं। नई सरकार ने अभिव्यक्ति की आज़ादी सुनिश्चित की है और संवैधानिक एवं मौलिक अधिकारों को बहाल किया है, जिससे सभी को शहर और राज्य में आने-जाने की पूरी आज़ादी है।' यह बयान पश्चिम बंगाल की नई सरकार की उदार छवि पेश करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

आगे क्या

सीएए के क्रियान्वयन की समयसीमा और तसलीमा नसरीन की उपस्थिति — दोनों मुद्दे पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए विमर्श को जन्म दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मतुआ समुदाय को सीएए प्रमाणपत्र वितरण और नसरीन को खुला निमंत्रण — दोनों कदम नई सरकार की पहचान स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नियम 2024 तक नहीं बने और क्रियान्वयन अभी भी अधूरा है। परंतु यह विडंबना है कि जो पार्टी वर्षों तक सीएए का विरोध करती रही, वह अब उसके अधूरे क्रियान्वयन को आधार बनाकर विपक्ष को घेर रही है। दूसरी ओर, मतुआ समुदाय को प्रमाणपत्र वितरण और तसलीमा नसरीन को खुला निमंत्रण — दोनों कदम नई सरकार की सांकेतिक राजनीति के स्पष्ट संकेत हैं, जिनकी असली परीक्षा ज़मीनी क्रियान्वयन से होगी, न कि मंच की घोषणाओं से।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौगत रॉय ने सुवेंदु अधिकारी के सीएए बयान पर क्या कहा?
TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि सीएए कानून कई साल पहले पास हुआ था लेकिन अब तक लागू नहीं हुआ, इसलिए इस तरह के बयान देने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने अधिकारी की छह महीने में आवेदन निपटाने की घोषणा को व्यावहारिक रूप से खोखला बताया।
सुवेंदु अधिकारी ने न्यू टाउन कार्यक्रम में क्या घोषणा की थी?
नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने न्यू टाउन में आयोजित सीएए नागरिकता प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम में कहा था कि राज्य में सीएए के तहत लंबित सभी आवेदन अगले छह महीने में निपटा दिए जाएंगे। इस कार्यक्रम में उत्तर 24 परगना के मतुआ समुदाय के करीब 300 लोगों को नागरिकता प्रमाणपत्र दिए गए।
तसलीमा नसरीन कोलकाता क्यों आईं और उन्होंने क्या कहा?
तसलीमा नसरीन शुक्रवार को कोलकाता लौटीं और रवींद्र सदन में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलीं। उन्होंने कहा कि इस्लाम की आलोचना करना मुसलमानों पर हमला नहीं है और मुस्लिम समुदाय में सुधार व आज़ादी लाना ज़रूरी है।
सुवेंदु अधिकारी ने तसलीमा नसरीन के बारे में क्या कहा?
सुवेंदु अधिकारी ने तसलीमा नसरीन को सम्मानित लेखिका बताया और कहा कि वह जब चाहें कोलकाता आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि नई सरकार ने अभिव्यक्ति की आज़ादी और मौलिक अधिकार सुनिश्चित किए हैं।
मतुआ समुदाय और सीएए का क्या संबंध है?
मतुआ समुदाय पश्चिम बंगाल का एक प्रमुख मतदाता वर्ग है, जो मुख्यतः बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों का प्रतिनिधित्व करता है। सीएए उनके लिए नागरिकता का मार्ग प्रशस्त करता है, इसलिए यह समुदाय इस कानून को भावनात्मक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है।
राष्ट्र प्रेस
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