सीएए नागरिकता देता है, छीनता नहीं: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता में बाँटे 300 प्रमाण पत्र
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 1 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (सीएए) किसी की नागरिकता छीनने का नहीं, बल्कि पात्र शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का कानून है। उन्होंने यह बात कोलकाता के न्यू टाउन में आयोजित एक विशेष समारोह में उत्तर 24 परगना जिले के मतुआ समुदाय के 300 सदस्यों को नागरिकता प्रमाण पत्र वितरित करने के बाद कही।
मुख्यमंत्री की मुख्य घोषणाएँ
अधिकारी ने कार्यक्रम में कहा, 'सीएए का उद्देश्य नागरिकता प्रदान करना है, किसी की नागरिकता छीनना नहीं। पात्र लोगों को आगे आकर अधिनियम के तहत आवेदन करना चाहिए।' उन्होंने यह भी घोषणा की कि पश्चिम बंगाल में सीएए के तहत लंबित सभी आवेदनों का निपटारा अगले छह महीनों के भीतर कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह सचिव से हुई चर्चा के बाद, आवेदनों के शीघ्र निपटान के लिए जिला मजिस्ट्रेटों को कानूनी और प्रशासनिक शक्तियाँ सौंपने की प्रक्रिया एक महीने के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।
अब तक के आँकड़े
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में अब तक कुल 23,956 नागरिकता प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 5,966 प्रमाण पत्र राज्य में नई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के गठन के बाद केवल पिछले 11 हफ्तों में जारी किए गए हैं। राज्यभर में कुल 2,30,605 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
जिलेवार आँकड़ों की बात करें तो नदिया जिले में सबसे अधिक 10,191 प्रमाण पत्र वितरित किए गए हैं, जबकि उत्तर 24 परगना में 8,930 प्रमाण पत्र दिए गए हैं।
सीएए के तहत कौन पात्र है
सीएए के प्रावधानों के अनुसार, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में शरण लेने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई — इन छह समुदायों के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी।
तृणमूल कांग्रेस पर निशाना
अधिकारी ने सीएए मुद्दे पर जनता को गुमराह करने के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने सीएए को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के रूप में पेश किया और विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय को यह झूठा भय दिखाया कि सीएए के तहत आवेदन करने से नौकरी, राशन लाभ या लक्ष्मी भंडार योजना का नुकसान होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में भाजपा सरकार के गठन के बाद सीएए कार्यान्वयन में तेज़ी आई है। गौरतलब है कि अधिकारी ने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम में विपक्षी विधायक भी स्वेच्छा से शामिल हुए, जिसे उन्होंने सीएए की स्वीकार्यता का प्रमाण बताया।
आगे क्या होगा
आने वाले महीनों में और अधिक प्रमाण पत्र जारी किए जाने की उम्मीद है। जिला मजिस्ट्रेटों को अधिकार सौंपने की प्रक्रिया शुरू होते ही आवेदन निपटान की गति और तेज़ होने की संभावना है। 2,30,605 में से अब तक निपटाए गए आवेदनों की संख्या को देखते हुए, अगले छह महीनों में यह प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुँचेगी।